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इंसानों को भी शर्म महसूस करा दें ये समझदार जानवर

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हम समझते हैं कि इंसान ही समझदार और तेज दिमाग होते हैं लेकिन ऐसे कई जानवर, कीड़े और पक्षी हैं जो इंसानों जैसे ही बहुत समझदार हैं। इंसानों का सबसे ज्यादा आईक्यू लेवेल 7.6 होता है। मकड़ियां धरती पर मौजूद उन छोटे जानवरों में से हैं जिनका बुद्धिमत्ता बहुत ज्यादा होती है। खासकर अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली सफेद दाढ़ी वाली पोर्शिया मकड़ी।
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बॉटलनोज डॉल्फिन में भी बातचीत करने के गुण होते हैं। यहां तक कि वे आसानी से खुद को शीशे में देख कर पहचान भी जाती हैं। इनका आईक्यू लेवेल 5.3 होता है। कई बार डॉल्फिन विपरीत हालातों में इंसान से भी ज्यादा समझदारी दिखाती हैं।
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चीटियां होती तो बहुत नन्ही सी हैं लेकिन दिमाग के क्या कहने। इनमें उन आपदाओं से भी लड़ने की क्षमता होती है जिनसे दूसरे जानवर नहीं लड़ पाते। ये झुंड में ही अपना घर बनाती हैं और खाना लाती हैं। अपने आस पास के वातावरण के साथ आसानी से घुल मिल जाती हैं। ये सारे गुण एक समझदार जानवर में होने जरूरी हैं।

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सी लॉयन ऐसे जानवर हैं जो तर्कों के साथ सोच सकते हैं और यहां तक कि गणित के प्रश्न भी हल कर सकते हैं जैसे a=b, b=c तो a=c हुआ।
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बंदरों की एक प्रजाति बबून ऐसी है जिनकी हरकतें देख कर लगता है कि वाकई इंसानों से कितना मेल खाते हैं। शोध कहते हैं कि बबून कई बार तनाव को पहचान लेते हैं और उससे लड़ते भी हैं, जबकि दूसरे जानवरों में ये क्षमता नहीं होती। ये मुश्किल स्थितियों में भी बहुत समझदारी से काम लेते हैं।
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चूहों पर कई तरह के प्रयोग तो होते ही हैं लेकिन एक बात ये भी सच है कि उन्हें चीजें लंबे वक्त तक याद रहती हैं। वे आसानी से बदलती स्थितियों में ढल जाते हैं। आईक्यू लेवेल- 0.5।
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कबूतरों को तो बहुत पुराने वक्त से ही युद्ध के दौरान और संदेश पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। ऐसा इसलिए क्योंकि वे आसानी से रास्ता समझ लेते हैं और उन में लोगों को लंबे वक्त तक याद रखने की भी क्षमता होती है। वे जिस जगह या इंसान को एक बार देख लें, उसे जिंदगी भर के लिए याद रखते हैं।

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कौए भी कुछ कम नहीं हैं। कबूतरों की तरह ये भी दुनिया की समझदार पंछियों में से एक हैं। ये कठिन से कठिन समस्या का हल निकाल सकते हैं। वो कहानी तो याद ही होगी कि कैसे कौए ने मटके में कंकड़ डालकर पानी पिया था!

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माना जाता है कि सबसे अच्छी याद्दाश्त भेड़ की होती है, यहां तक कि इंसानों से भी बेहतर। वे समझ जाती हैं कि कब उनके झुंड़ से एक भेड़ गायब हो गया। ये अपने आस पास चल रही घटनाओं के प्रति भावनाएं भी जाहिर करती हैं।

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गिलहरी आकार में छोटी होती हैं लेकिन उनके दिमाग को कम नहीं आंका जा सकता। उनकी सारी समझदारी अपना खाना खोजने में ही खर्च होती है। वे कई कई सालों तक आराम से याद रख सकती हैं कि उन्होंने अपना खाना कहां कहां छिपाया है।

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हाथियों का दिमाग दूसरे जानवरों के मुकाबले बड़ा होता है। उनमें भावनाएं होती हैं तभी तो कई बार इंसानों के साथ परस्पर व्यवहार निभाते दिखते हैं। ये अपने पैरों में होने वाले कंपन के जरिए एक दूसरे से बात करते हैं। इनका आईक्यू लेवल 1.3 होता है।

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ऑक्टोपस के लिए कहा जाता है कि ये पूरी प्लानिंग के साथ अपना शिकार ढूंढते हैं। ये भी कई समझदार जानवरों की तरह जटिल समस्याएं हल कर सकते हैं।

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व्हेल मछली एक दूसरे से संपर्क करने के लिए तरह तरह की आवाजों का इस्तेमाल करती हैं और पूरे समूह के साथ तालमेल बिठा कर ही काम करती हैं।

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एक शोध के मुताबिक ठीक-ठाक उम्र का सुअर एक तीन साल के बच्चे जितना समझदार होता है। ये आसानी से नई कलाएं सीख लेते हैं।
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