क्या ऐसा भी हो सकता है कि किसी समाज में लोग अच्छी किस्मत और फलते-फूलते रहने के लिए मर्दों का बहिष्कार करे?
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प्रजनन क्षमता कायम रखने के लिए पुरूषों का बहिष्कार!
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हम बात कर रहें हैं बाली के एक बहुत पुराने गांव की जिसका नाम है अगा और ये बाली के ट्रुनयान क्षेत्र में बसा है। सभी तस्वीरें डेली मेल से।
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प्रजनन क्षमता कायम रखने के लिए पुरूषों का बहिष्कार!
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बाली के गांववालों के लिए ये एक ऐसी परंपरा है जिसे वहां के लोग कभी-कभी ही अपनाते हैं। हर साल कुद चुनिंदा नौजवान लड़के इसमें भाग लेते हैं।
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इसके बाद उन्हें खुदको बहुत सारे केले के सूखे पत्तों में ढ़ंक दिया जाता है। उन्हें केले के इन सूखे पत्तों की तीन चादरें ओढ़ने होती हैं।
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उनके चेहरे को सूखे नारियल के खोल से ढ़ंक दिया जाता है। उन्हें पूरा भूतिया बना दिया जाता है और इसके बाद उन्हें पूरे गांव में घूमना होता है।
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इसमें इतने लड़के तो होने ही चाहिए जो एक पूरे परिवार को प्रदर्शित कर सकें। यानी के इसमें से कोई राजा बनता कोई रानी तो कोई उनके भाई-बहन। उन्हें नाचते हुए गांव के मंदिर बरॉन्ग ब्रूटक तक पहुंचना होता है।
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इस दौरान गांव के लोग उन्हें परेशान करते हैं और उनके पत्ते खींचकर उन्हें निर्वस्त्र करने की कोशिश करते हैं। ये परंपरा तीन दिनों तक लगातार चलती रहती है।
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अंत में इन लड़कों को 42 दिनों का बाली समाज बहिष्कार कर देता है। इस दौरान ये लड़के किसी के नजर में नहीं आते और घर के चहारदीवारी में ही रहते हैं। ऐसा करने से वो भगवान से गांव की भलाई और औरतों की प्रजनन क्षमता को पीढ़ी दर पीढ़ी बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।