फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

विज्ञापन
1 of 9
कहते हैं कि मौत के बाद कब्र ही सबसे सकून की जगह है। लेकिन ग्वाटेमाला में किराए के कब्रिस्तान में मुर्दों को ये सुख भी नसीब नहीं है।
विज्ञापन

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

2 of 9
जी हां ग्वाटेमाला में बहुमंजिला कब्रिस्तानों में कब्र के लिए हर माह शव के परिजनों को किराया भरना पड़ता है।
विज्ञापन

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

3 of 9
जिस माह किराया नहीं आता, उसके अगले माह मुर्दे को उस कब्र से निकाल कर बाहर रख दिया जाता है और सामूहिक कब्र में डाल दिया जाता है।

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

4 of 9
यहां जगह की कमी होने के चलते बहुमंजिली इमारतों जैसे कब्रिस्तानों का चलन है। एक के ऊपर एक कब्र बनी होती है और अगर किराया नहीं दिया गया तो वहां के शव को बाहर निकाल कर नए शव को अंदर दफना दिया जाता है।
विज्ञापन

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

5 of 9
यहां कब्रों का किराया काफी महंगा है। इसलिए मृतकों के परिजन हमेशा भय में रहते हैं कि न जाने कब उनके प्रिय परिजन के शव को बाहर निकाल दिया जाए।
विज्ञापन

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

6 of 9
यहां कब्रिस्तान में आपको कई ऐसे नजारे दिख जाएंगे कि किराया न भरने के चलते कुछ शवों को कब्र से बाहर निकाल दिया गया है। कई शव तो खड़े जैसे दिखते हैं जैसे इंतजार कर रहे हैं अपनी दो गज जमीन का।
विज्ञापन

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

7 of 9
प्रशासन का कहना है कि ज्यादा आबादी और कम जगह होने के चलते ऐसे नियम बनाने की मजबूरी है। यहां अमीर लोग तो अपने जीते जी कब्र के लिए रकम का जुगाड़ कर लेते हैं लेकिन गरीबों के लिए ये मुश्किल भरा काम है।

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

8 of 9
प्रशासन ने हर शहर के बाहर एक सामूहिक ग्राउंड बनाया है जहां हर साल उन शवों को दफनाया जाता है जिनके परिजन समय पर किराया नहीं भर पाते।
विज्ञापन

यहां हर महीने किराए पर रहते हैं मुर्दे, तस्वीरें कह रही हैं कहानी

9 of 9
यानी जीते जी ही नहीं मरने के बाद भी चैन नसीब नहीं है ग्वाटेमाला के लोगों को। यहां फैली गरीबी के चलते कई लोग अपने परिजनों को खुद ही सामूहिक कब्रिस्तान में अवैध तरीके से दफना देते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें