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शान की सवारी 'बुलेट' कैसे बनी देसी बाइक? दिलचस्प इतिहास

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रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल जितनी शानदार है इसका इतिहास उतना ही जानदार है। जानिए इसके दिलचस्प इतिहास के बारे में।
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शान की सवारी 'बुलेट' कैसे बनी देसी बाइक? दिलचस्प इतिहास

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भारतीय बाजार ही नहीं विदेशों में भी रॉयल एनफील्ड इंडिया बुलेट मोटरसाइकिल के जलवे हैं। लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि ये कंपनी साइकिल बनाने वाले एक विदेशी शख्स भारतीय कारोबारी के साथ मिलकर शुरू की थी।
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शान की सवारी 'बुलेट' कैसे बनी देसी बाइक? दिलचस्प इतिहास

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लंदन में एनफील्ड नाम का एक इलाका है जहां एलबर्ट ईडी नाम का अंग्रेज 'पैरीज साइकिल कंपनी' चलाता था। एलबर्ट ने 1890 के दशक में आर.डब्‍ल्यू स्मिथ के साथ मिलकर साइकिल बनाने की कंपनी शुरू की और इस कंपनी का नाम एनफील्ड मैनुफैक्चरिंग लिमिटेड पड़ा।

शान की सवारी 'बुलेट' कैसे बनी देसी बाइक? दिलचस्प इतिहास

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एनफील्ड मैनुफैक्चरिंग कंपनी साइकिल बनाने के साथ ही राइफल के भी कुछ कीमती पार्ट्स भी बनाती थी और इनकी सप्लाई रॉयल आर्म्स फैक्ट्री को करती थी। 1998-99 में इस कंपनी ने मोटर लगी साइकिल भी बनाई। ध्यान दें कि रॉयल नाम इसी आर्म्स कंपनी से मिला।
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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बिटिश हुकूमत को सैनिकों के लिए मजबूत मोटरसाइकिलों की जरूरत पड़ी तो एनफील्‍ड कंपनी आगे आई। कंपनी ने सैनिकों के लिए 350 सीसी की एक मजबूत मोटर साइकिल का डिजाइन तैयार किया।
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1926 में इसी एनफील्ड कंपनी ने पहली बार महिलाओं के लिए 225 सीसी की मोटर साइकिल भी बनाई। यूं तो 1949 से ही ये मोटरसाइकिलें भारत में बिक रही थी लेकिन 1955 में एनफील्ड ने मद्रास मोटर्स से करार किया और आधिकारिक तौर पर रॉयल एनफील्ड इंडिया नाम की कंपनी शुरू की गई।
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1955 से 1965 मद्रास मोटर्स ने मोटर साइकिल बनाने की तकनीक हासिल कर ली थी और फिर भारत में ही रॉयल एनफील्ड बुलेट का निर्माण शुरू हुआ।

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बुलेट मोटरसाइकिल की उपयोगिता को देखते हुए भारत सरकार ने पहली बार सीमा पर गश्त लगा रहे जवानों के लिए 350 सीसी की 800 मोटर साइकिलें का बनाने का आर्डर दिया। तब से अब तक बुलेट मोटरसाइकिल भारत में एक लोकप्रिय बाइकों में शुमार है।
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वर्तमान में रॉयल एन्फील्ड का बाजार इतना बड़ा हो गया है कि इनकी मांग यूरोप, अमेरिका और साउथ अफ्रीका के देशों में हो रही है।
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