ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुण्डली का आठवां घर अरिष्ट यानी मृत्यु एवं जीवन में अचानक होने वाली घटनाओं को बताता है। इस घर में जो ग्रह बैठे होते हैं या इस घर के स्वामी कौन हैं और कहां बैठे हैं उसके अनुसार मृत्यु का आंकलन किया जाता है। हलांकि इसमें कई और चीजों को भी देखा जाता है लेकिन मोटे तौर पर ऐसा माना जाता है।
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किन स्थितियों में किसकी होगी मृत्यु इस तरह बताते हैं ज्योतिषी
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अगर कुंण्डली के आठवें घर में सूर्य हो तब ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति का अग्नि से सावधान रहना चाहिए। इनसे जीवन पर खतरा रहता है। बुखार से या मूत्र मार्ग में परेशानी आने से व्यक्ति शरीर त्याग कर सकता है।
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चन्द्रमा अगर कुंडली के आठवें घर में बैठा हो तब व्यक्ति को जल क्षेत्र यानी समुद्र, तालाब, नदी आदि के आस-पास अधिक सावधान रहना चाहिए क्योंकि इन्हें जलक्षेत्र से भय रहता है। ऐसी आशंका व्यक्त की जाती है कि कुण्डली में आठवें घर में बैठा चन्द्रमा व्यक्ति को कफ, क्षय रोग, एवं फेफड़ों से संबंधित परेशानी देता है और इनसे व्यक्ति शरीर का त्याग भी कर सकता है।
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मंगल आठवें घर में होने पर आग की दुर्घटना, घाव, फोड़े, त्वचा के रोग, वाहन दुर्घटना, ऊंचाई से गिरना, जादू टोना, पीलिया, शल्य चिकित्सा आदि से मृत्यु की आशंका मानी जाती है।
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जन्म कुण्डली में बुध आठवें घर में होने पर पक्षाघात, वात, लकवा, नसों की कमजोरी, अंडकोष से संबंधित दोष, अपच एवं विषैले बुखार के कारण मृत्यु की आशंका रहती है।
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गुरु अगर कुण्डली में आठवें घर में हो तब व्यक्ति की मृत्यु अचानक हृदय रोग से हो सकती है। बुखार, शारीरिक दुर्बलता भी इनकी मृत्यु का कारण हो सकती है।
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शुक्र आठवें घर में होने पर यौन एवं मूत्र संबंधित रोग, उदर, एवं कफ जनित रोग से भी मृत्यु की आशंका रहती है।
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शनि आठवें घर में होने पर यूं तो व्यक्ति दीर्घायु माना जाता है लेकिन आशंका यह रहती है कि इनकी मृत्यु वात रोग, घाव, लंबे समय तक चलने वाली बीमारी एवं हड्डियों से संबंधित परेशानियों के कारण हो सकती है।