पूजा वस्त्रकार
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स्टेडियम में ही दिख गई थी खेल की लगन
पूजा के बचपन के कोच आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि शुरुआत में क्रिकेट को लेकर शहडोल में बहुत कुछ नहीं था। उस समय शहडोल एक जिला था। जिला मुख्यालय के इसी स्टेडियम में सुबह क्रिकेट अकादमी का सेशन चलता था। वहां देखा कि एक लड़की टेनिस बॉल से खेल रही है। लंबे-लंबे छक्के लगा रही है। उसके खेल को देखकर मैं काफी प्रभावित हुआ। मैंने उसे बोला कि हमारे साथ खेलना चाहती हो, लेकिन लड़कों के साथ खेलना पड़ेगा। उसने कहा खेलूंगी। मैंने कहा कि ठीक है, कल से जॉइन करो। वह बोली कि नहीं, मैं आज ही जॉइन करूंगी। वह दिन था और आज का दिन है। उसके बाद पूजा ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआत में उसके घर में कुछ समस्याएं आई थी। एक महीने का गैप लिया था। उसके बाद से मुझे याद नहीं कि पूजा कभी भी एक भी दिन इस मैदान में प्रैक्टिस में न आई हों। उसने रेगुलर प्रैक्टिस की और उसका परिणाम आप देख ही रहे हैं कि आज वह कहां पहुंच चुकी हैं।