गौतम काले के साथ जाकिर हुसैन।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
मेरे जीवन के कीमती पल थे वे
एक बार की बात है जब इंदौर में सुहाग होटल हुआ करती थी जहां वर्तमान में सीएचएल अपोलो अस्पताल है। उस समय जाकिर भाई आईटीसी टूर के अंतर्गत पंडित वीजी जोग, पंडित विजय किचलु आदि कलाकारों के साथ इंदौर आए थे। वे सब बस से होटल सुहाग पहुंचे, तो मैं उनको रिसीव करने के लिए पहुंचा। बस से सारे कलाकार उतर गए थे और मैं बाहर इंतजार कर रहा था कि जाकिर भाई कहां हैं, मैंने बस के अंदर धीरे से झांका तो देखा बस में आधे में सीट्स थी और आधे में गद्दे लगे थे जिस पर जाकिर भाई सफेद पठानी सूट में लेटे हुए थे। उन्होंने मुझे देखा और पूछा कैसे हो और बोले याने इंदौर आ गया। मैंने कहा जी। मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उनको उठने में मदद की। हम बस के बाहर आ गए और होटल के लॉन में जाकिर भाई मेरे गले में हाथ डालकर टहल रहे थे। मेरे लिए यह जीवन के कीमती पलों में से थे। वह बोले शाम को घर चलेंगे और घर आए और खूब गपशप की।
सिखाने के लिए हमेशा उत्सुक रहते थे
\गायक गौतम काले ने बताया कि इंदौर में उस्ताद जाकिर हुसैन की आखिरी परफॉर्मेंस 2019 में हुए 'इंदौर म्यूजिक फेस्टिवल' में थी। हमने उन्हें गुरुकुल बुलाया था। वे इवेंट के बाद देर रात आए। बच्चों से बोले हर शिष्य को अपने गुरु जैसा बनना चाहिए, लेकिन कुछ अपना भी क्रिएट करें, तभी आगे बढ़ पाएंगे। उन्होंने बच्चों के सवाल सुने और उनके साथ समय बिताया। वे बच्चों को सिखाने के लिए हमेशा लालायित रहते थे।