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ये है नया भारतः आर्मी की बुलेट से हाईटेक ड्रोन तक, युवा उद्यमी सब बनाने में सक्षम

Thu, 21 Nov 2024 09:29 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: सीआईआई द्वारा आयोजित एमएसएमई कॉन्क्लेव देखने को मिला नया भारत, नवाचारों और दूरदृष्टि से सजा लघु उद्योग नए सपने संजो रहा। 
 
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बुलेट से ड्रोन तक सब बना रहे युवा उद्योगपति। - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
सीआईआई के द्वारा आयोजित क्षेत्रीय रक्षा एमएसएमई कॉन्क्लेव में नया भारत देखने को मिला। देशभर से आए युवाओं ने बताया कि वे किस तरह आर्मी की बुलेट से लेकर हाईटेक ड्रोन तक बना रहे हैं। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कॉन्क्लेव में उद्योगपति अंबरीश केला ने अमर उजाला को बताया कि मध्यप्रदेश में आयोजित यह कॉन्क्लेव देश के विकास को नई दिशा देगी। सरकार और उद्योग संगठनों के प्रयास अब धरातल पर उतर रहे हैं और लघु उद्योग अब आर्मी के लिए बुलेट तक बनाने लगे हैं। यह बताता है कि देश अब नए आयाम स्थापित करने वाला है। 
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कार्यक्रम को संबोधित करते अतिथि। - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
आर्मी अधिकारियों ने दी सलाह
आर्मी के अधिकारियों ने कॉन्क्लेव में उद्योगों को कई तरह की सलाहें दी। पहली बाद देश में रक्षा उपकरण बनाने के लिए सरकार लघु उद्योगों को अनुमति दे रही है। कई कंपनियों ने बुलेट, ड्रोन जैसे उपकरण पेश किए जो जल्द आर्मी को दिए जाएंगे। आर्मी अधिकारियों ने इन्हें और भी बेहतर बनाने के लिए सलाह दी और इन नवाचारों की खुलकर सराहना की। 

रक्षा विभाग के साथ कई मंचों का योगदान रहा 
रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (एमपीआईडीसी), भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) द्वारा संयुक्त रूप से कॉन्क्लेव का आयोजन हुआ। इसने एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र में बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य किया। विशेषज्ञों ने कई विषयों पर जानकारियां दी और रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादातर राज्य से एमएसएमई और स्टार्ट-अप द्वारा पेश किए गए उत्पादों की प्रशंसा की। 
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युवा उद्योगपतियों ने आर्मी के विशेषज्ञों से ली सलाह। - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
सेना की रक्षा प्रणाली में लघु उद्योगों की बहुत जरूरत
कॉन्क्लेव की शुरुआत रक्षा मंत्रालय की डीडीजी (आईएंडएफ) मुदिता मिश्रा द्वारा संबोधित एक आकर्षक सत्र के साथ हुई, जिन्होंने एमएसएमई के माध्यम से खरीद वरीयता के लिए विभिन्न योजनाओं को साझा किया। स्वदेशीकरण पर, उन्होंने श्रीजन पोर्टल का अवलोकन दिया, जिसमें स्थानीयकरण के लिए 24,000 से अधिक उत्पाद उपलब्ध थे। गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (DGQA) के संयुक्त नियंत्रक आर. एन. अपराजित ने रक्षा विनिर्माण में कड़े गुणवत्ता उपायों के महत्व का व्यापक अवलोकन प्रदान किया, जिसमें डिजाइन चरण से उत्पादन तक स्थिरता और परिशुद्धता की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। सीआईआई पश्चिमी क्षेत्र के पूर्व अध्यक्ष और एसआईडीएम सदस्यता समिति के अध्यक्ष प्रवीण तोषनीवाल ने रक्षा क्षेत्र में एक सुविधाकर्ता के रूप में सीआईआई और एसआईडीएम के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। सीआईआई मालवा जोन के अध्यक्ष अक्षत चोरडिया ने सम्मेलन जैसे मंच बनाने के लिए सीआईआई और एसआईडीएम के प्रयासों का उल्लेख किया, जो उद्योग के हितधारकों, नीति निर्माताओं और खरीद अधिकारियों के बीच सार्थक बातचीत को सक्षम बनाता है, जिससे क्षेत्र में सहयोग और विकास को बढ़ावा मिलता है। एडब्ल्यूईआईएल, एवीएनएल बीईएल, एचएएल, एलएंडटी और टाटा जैसे डीपीएसयू सहित प्रमुख ओईएम ने आपूर्ति श्रृंखला विस्तार के लिए अपनी आवश्यकताओं को प्रस्तुत किया और एमएसएमई के साथ जुड़ने की प्रक्रिया और प्रक्रियाओं की रूपरेखा तैयार की। 

उद्योगों को सीधे अधिकारियों से जुड़ने का मौका मिला
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण बी2बी नेटवर्किंग सत्र था, जहां एमएसएमई सीधे रक्षा खरीदारों और खरीद अधिकारियों से जुड़े। इन बातचीत ने एमएसएमई को प्रमुख रक्षा विशेषज्ञों की खरीद प्रक्रियाओं की जानकारी दी, जिससे उन्हें क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताओं को संरेखित करने में मदद मिली। इस कार्यक्रम में एमएसएमई के सामने आने वाली फंडिंग चुनौतियों पर भी चर्चा की गई, जिसमें वित्तीय संस्थानों के विशेषज्ञों ने रक्षा विनिर्माण में एमएसएमई विकास का समर्थन करने के लिए उपलब्ध विभिन्न योजनाओं और तंत्रों की रूपरेखा तैयार की। क्षेत्रीय रक्षा एमएसएमई कॉन्क्लेव ने नवाचार को बढ़ावा देने, क्षमता निर्माण करने और भारत में एक संपन्न रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए हितधारकों की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की। 
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