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इंदौर: पेड़ों की कटाई पर बवाल, अधिकारी और पर्यावरणप्रेमी आमने सामने

Mon, 05 Oct 2026 03:55 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

एमओजी लाइन क्षेत्र में 25 से अधिक पेड़ों की कटाई पर पर्यावरण प्रेमी मंच ने कड़ा विरोध जताया है। मंच ने अनुमति पत्र सार्वजनिक करने, ट्रांसप्लांटेशन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और पूरी जानकारी उजागर करने की मांग की है।
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बड़ी संख्या में काटे गए पेड़। फोटो- जयेश मालवीय। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
इंदौर में एक तरफ हरियाली बढ़ाने और पुराने पेड़ों को बचाने के लगातार दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एमओजी लाइन क्षेत्र में 25 से अधिक हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई ने नगर निगम और संबंधित प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद पर्यावरण प्रेमी मंच के सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे और चल रही पेड़ कटाई का जोरदार विरोध जताया। विरोध प्रदर्शन के दौरान मंच के सदस्यों ने नगर निगम से पेड़ काटने की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की। मौके पर मौजूद उद्यान विभाग के अधिकारियों ने पर्यावरण प्रेमियों को अनुमति से जुड़ा एक पत्र दिखाया। इस दौरान काटे गए पेड़ों की लकड़ियों को नगर निगम के स्टोर में भिजवाते हुए भी देखा गया। पर्यावरण प्रेमी मंच का आरोप है कि जिन पेड़ों को ट्रांसप्लांट यानी स्थानांतरित किया जाना था, उन्हें भी नियम विरुद्ध तरीके से ऊपर से काट दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान मौके पर कोई तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद नहीं था। 
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ट्रांसप्लांट वाले पेड़ों को भी बुरी तरह से काट दिया गया। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
क्या है मामला
पर्यावरण प्रेमी मंच के सदस्य संदीप खानवलकर का कहना है कि यहां पर सैकड़ों पेड़ लगे हैं। 25 से अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति वन विभाग दे ही नहीं सकता। मौके पर भी 25 से बहुत अधिक पेड़ कटे हुए हैं। वहीं निगम अधिकारियों का कहना है कि दो बार 22 और 24 की संख्या में पेड़ काटे गए। वन विभाग ने इसकी अनुमति दी थी, हमने तो सिर्फ पेड़ काटे हैं। दूसरी तरफ वन विभाग का कहना है कि दो अलग अलग अनुमति आई थी। यदि 25 से अधिक पेड़ों को काटने की एक ही अनुमति मांगी गई होती, तो मामला हाईपावर कमेटी के पास जाता। 

पेड़ों की कटाई की अनुमति प्रक्रिया पर उठ रहे गंभीर सवाल
पर्यावरण प्रेमी मंच ने सवाल उठाया है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की अनुमति किस अधिकारी और किस प्रक्रिया के तहत जारी की गई। नियमानुसार 25 से अधिक पेड़ों की कटाई के लिए उच्च स्तरीय समिति यानी हाई पावर कमेटी की स्वीकृति आवश्यक होती है। ऐसे में संबंधित अनुमति पत्र, काटे जाने वाले पेड़ों की कुल संख्या, उनकी प्रजातियों का विवरण और कटाई के ठोस कारणों की जानकारी आम जनता के सामने लाई जानी चाहिए। पर्यावरणप्रेमी चंद्रशेखर गवली ने कहा कि मौके पर मौजूद उद्यान विभाग के कर्मचारियों का कहना था कि वे व्यक्तिगत रूप से पेड़ों को काटना नहीं चाहते, लेकिन उच्च अधिकारियों से मिले दिशा-निर्देशों और आदेशों का पालन करना उनकी प्रशासनिक मजबूरी है। पर्यावरण प्रेमियों ने पूछा कि जब शहर में पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के अभियान चलाए जा रहे हैं, तब स्थानीय निवासियों को पूर्व सूचना दिए बिना इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की गई।

ट्रांसप्लांटेशन के नाम पर नियमों की अनदेखी का आरोप
मामले में सबसे गंभीर मुद्दा पेड़ों के स्थानांतरण को लेकर सामने आया है। मंच के सदस्यों ने कहा कि जो पेड़ यहां से ट्रांसप्लांट किए जाने थे उन्हें भी काट दिया गया। यदि कुछ पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाना था, तो इसके लिए विशेषज्ञों की टीम की उपस्थिति क्यों दर्ज नहीं की गई। पेड़ प्रत्यारोपण एक जटिल और पूरी तरह से वैज्ञानिक व तकनीकी प्रक्रिया है। केवल पेड़ के ऊपरी हिस्से को काट देने से प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी से स्वतंत्र जांच करवाई जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

पारदर्शी जांच और विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग
पर्यावरण प्रेमी मंच ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मंच का स्पष्ट कहना है कि नगर निगम प्रशासन को अनुमति पत्र, सक्षम समिति की स्वीकृति, काटे गए पेड़ों की सूची, कटाई के कारण और काटी गई लकड़ी के भंडारण व निस्तारण का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए। इसके साथ ही यह भी उजागर किया जाना चाहिए कि किन पेड़ों को प्रत्यारोपण के योग्य चिह्नित किया गया था और उनके साथ क्या कानूनी व तकनीकी प्रक्रिया अपनाई गई। मंच ने जोर देकर कहा कि शहर की पहचान केवल उसकी स्वच्छता रैंकिंग से नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध हरियाली और सदियों पुराने वृक्षों से भी है। बुनियादी विकास के कार्य निश्चित रूप से आवश्यक हैं, लेकिन शहर के पर्यावरण और हरे-भरे आवरण को नष्ट करके विकास की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए।

मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष
एमओजी लाइन क्षेत्र में चल रहे प्रोजेक्ट को लेकर स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अर्थ जैन ने बताया कि योजना के अंतर्गत क्षेत्र में 22 अलग-अलग भूखंड तैयार किए गए हैं। प्रत्येक भूखंड पर मौजूद पेड़ों को नियमानुसार हटाने या काटने की जिम्मेदारी संबंधित कार्यदायी एजेंसी को सौंपी गई है और उसी के अनुसार आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं वन विभाग की रेंजर संगीता ठाकुर ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार पेड़ों की कटाई की अनुमति जारी की गई थी और वहां से लगातार अलग-अलग आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। अब स्थिति की समीक्षा और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आगे कोई नया आवेदन प्राप्त होता है, तो उसे स्वीकृति के लिए हाई पावर कमेटी के समक्ष प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। नगर निगम के उद्यान अधिकारी शांतिलाल यादव ने जानकारी दी कि एमओजी लाइन क्षेत्र में पेड़ों को हटाने के लिए अलग-अलग चरण में आवेदन आ रहे हैं। इससे पहले 22 और हाल ही में 24 पेड़ों को काटा गया है। उन्होंने बताया कि नियम के अनुसार 25 से अधिक पेड़ों की कटाई से जुड़े आवेदनों को निर्णय के लिए हाई पावर कमेटी को भेजना अनिवार्य होता है, क्योंकि वहां अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने आवंटित हिस्से में कार्य कर रही हैं।
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