ये इंदौरी गेर है, जो अपने रंगों में हर किसी को रंग ले लेता है। इस बार गेर का 76वां वर्ष है। हर जगह रंग-गुलाल और अबीर की धूम है। शहर की सड़कें और आसमान सतरंगी दिख रहे हैं। रंगोत्सव का यह पल हर किसी के लिए खास बन रहा है। सुबह से ही लोग पोहा, जलेबी और कचौरी खाकर गेर के रंग में एक-दूसरे को रंगने के लिए घरों से निकले हैं। चलिए, तस्वीरों के जरिए देखते हैं कैसा है यह रंगोत्सव
गेर की खुशियां परवान चढ़ रही हैं। रंगोत्सव का ये बेहद खास पल हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। सुबह से इंदौर वासियों में आज एक अलग ही उत्साह दिख रहा था। खास बात यह है कि ये सिलसिला 76 वर्षों से जारी है। गेर का दायरा और खुशियां सब का विस्तार हो रहा है। शहर की सड़कें और आसमान सतंरगी दिख रहा है। इंदौरी पोहा और कचौरी के किस्से तो खूब सुने होंगे आप लेकिन इंदौरी गेर के किस्से भी किसी से कम नहीं हैं। रंगपंचमी की पारंपरिक गेर से जुड़ी तस्वीरों को देखकर आप अनुमान लगा सकते हैं कि यह कितना भव्य है।
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रंगों की बौछार।
- फोटो : अमर उजाला
रंग और गुलाल से सतरंगी हुआ नगर
बैलगाड़ी, ट्रैक्टर और डीजे से होता हुआ गेर का दल अब मिसाइलों से रंग बरसाने तक जा पहुंचा है। पिछले तीन वर्षों से यहां पहुंचने वाले लोगों की संख्या 5 लाख से अधिक रही है। जिससे यह यह आयोजन देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में शामिल हो चुका है।
रंग पंचमी की अवसर पर निकाले जाने वाली गेरों के रंगों से भगवान कृष्ण सुरक्षित रहे हैं, इसलिए कृष्ण के मंदिरों को भी ढक दिया गया है। इस वर्ष गेर का 76वां वर्ष है।सुरक्षा व्यवस्था के तहत गेर मार्ग पर 500 से अधिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। टोरी कॉर्नर से राजवाड़ा की ओर आगे बढ़ा पूरे इलाके में रंगों के बादल उमड़ने लगे। रंग और गुलाल से क्षेत्र सतरंगी हो गया
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युवा थिरके।
- फोटो : अमर उजाला
100 रुपये का टिकट लेकर लोग गेर देख रहे गेर को देखने के लिए नगर की सड़कों पर विशाल जनसमूह उमड़ पड़ा है। इस बीच ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवा जमकर थिरके। तस्वीर में आप देख सकते हैं कैसे एक समूह युवा रंगों से रंगे हुए डांस कर रहे हैं। मंदिरों पर रंग न पड़े इसके लिए तिरपाल से उनको कवर किया गया है। अन्य भवनों का भी बचाव किया गया है। गोराकुंड के समीप तीन इमारतों की छतों से भी गेर देखने की प्रशासन ने सशुल्क व्यवस्था की है। यहां 100 रुपये का टिकट लेकर लोग गेर देख रहे हैं। करीब 150 लोगों की यहां व्यवस्था है और 100 से ज्यादा टिकट बिक चुके हैं। यहां बालाजी टावर, पृथ्वी लोक भवन व एक अन्य इमारत पर गेर देखने के इंतजाम किए गए हैं।
राजवाड़ा पहुंची टोरी कॉर्नर की गेर
पहली गेर टोरी कॉर्नर की निकली, वह करीब सवा 11 बजे राजवाड़ा पहुंच गई थी। गेर में सैकड़ों लोग शामिल हैं। राजवाड़ा पर ढोलों और ताशों की थाप पर युवा थिरकते नजर आए।
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गेर में शामिल लोग मास्क पहने हुए।
- फोटो : अमर उजाला
रंगीन हुआ समां
जैसे ही गेरों का सिलसिला टोरी कॉर्नर से राजवाड़ा की ओर आगे बढ़ा पूरे इलाके में रंगों के बादल उमड़ने लगे। रंग और गुलाल से क्षेत्र सतरंगी हो गया। वहां मौजूद कोई शख्स रंगों और पानी से भीगे बिना नहीं रह सका।
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अनोखे अंदाज में रंगे हुए दिख रहे बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
गेर के रंगों को लेकर बच्चों में एक अलग तरह का उत्साह है। बच्चे अलग-अलग रंग में रंगे हुए हैं। अपने शरीर पर कलर किए हुए हैं। यहां तक की बालों पर भी रंग लगाए हुए हैं। इन बच्चों पर जिसकी नजर परड़ती है कुछ पल के लिए थम सी जाती है। थमे भी न क्यों? जो ये गेर का रंग और अवसर है। तभी तो सालभर लोग इस गेर का इंतजार करते हैं।
गेर में कई रंग हैं। एक रंग है देश भक्ति का। आसमान पर रंगों से की गई कलाकारी से जब आंखों के सामने तिरंगा उभरा तो देशभक्ति का एक अलग ही भाव लोगों के दिल में जग उठा। यही तो वो रंग है जो देश को एकता के सूत्र में पिरोने का काम करता है। लोगों का विशाल जनसमूह और रंगोत्सव की बाहर ने मजबूर कर दिया दूर-दूर तक खड़े लोगों को मोबाइल कैमरा ऑन करने के लिए।