भोजशाला में पूजन के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
समाज में हर्ष
भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमीत चौधारी ने बताया कि भोजशाला के ताले खुलवाने के लिए सत्याग्रह की शुरुआत सन 1992 में हुई थी। इसमें पहले हिंदू समाज को भोजशाला के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। ताले खुलवाने के लिए भोजशाला के बाहर स्टूल पर मां वाग्देवी का पोस्टर व हनुमानजी का पोस्टर रख कर सत्याग्रह किया जाता था। हिंदू समाज के लंबे संघर्ष के बाद 2003 में भोजशाला के ताले हिंदू समाज के लिए खुले। इसके बाद प्रति मंगलवार को भोजशाला में सत्याग्रह शुरू हुआ जो आज तक चल रहा है। 15 साल पहले इसी फोटो को फ्रेमिंग कराया था। परंतु अब फ्रेमिंग खराब होने के कारण नई फ्रेमिंग कराना थी। हमने इसी स्वरूप में नया चित्र लेकर अंदर गए थे। परंतु प्रशासन ने हमसे यह छीन लिया था। मां वाग्देवी की मूर्ति लंदन में कैद है। दूसरी मूर्ति ग्वालियर में कैद, इसके बाद तीसरी मर्तबा तेल चित्र पुरातत्व विभाग की कैद में पहुंचा था, जो अब पुन मिᚤल चुका है। जिसके कारण हिंदू समाज में हर्ष है।
चालीसा का हुआ पाठ
भोजशाला में सुबह जब मां वाग्देवी का चित्र समाज को मिला जो सत्याग्रह में बडी संख्या में लोग एकत्रित हुए। सबसे पहले हनुमान चालीसा का पाठ होने से भोजशाला गूंज उठी अंत में आरती कर प्रसादी का वितरण भी किया गया। इधर प्रशासन की टीम सत्याग्रह के कारण भोजशाला पहुंची थी। डीएसपी आनंद तिवारी सहित तीन थानों के टीआई व पुलिसबल बडी संख्या में मौजूद रहा।
एएसआई ने चित्र को जब्त किया था, जो हमें मिल गया है। विवाद की स्थिति समाप्त हो चुकी है। हम सभी नियमित सत्याग्रह के लिए एकत्रित हुए थे। बसंत पंचमी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। निर्वघन रूप से शुक्रवार के दिन पूजन होगा।
-हेमंत दौराया, संरक्षक