World Photography Day: मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासतें आपकी फोटोग्राफी में लगाएंगी चार चांद World Photography Day: Historical heritage of Madhya Pradesh will make your photography beautiful
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मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक विरासतें आपकी फोटोग्राफी में लगाएगी चार चांद
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मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य होने के साथ-साथ पुरातत्व और ऐतिहासिक दृष्टि से भी एक समृद्ध राज्य है। यहां ऐसे कई पुरातात्विक संरचना, स्मारक, किले, और हस्तशिल्प बाजार मौजूद हैं, जो देश और दुनिया के पर्यटकों और फोटोग्राफरों के कैमरे के लेंस से छिपे हुए हैं। प्रदेश के इन अप्रतिम स्थानों को जीवन पर्यन्त के लिए कैमरे में कैद करने का स्वर्णिम अवसर सभी को एक बार तो मिलना ही चाहिए। आज वर्ल्ड फोटोग्राफी दिवस है, और इस मौके पर हम आपको बताते हैं मध्यप्रदेश के ऐसे ही छिपे हुए सौंदर्य स्थानों के बारे में।
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असीरगढ़ किला आज भी अपनी खूबसूरती को बरकरार रखे हुए है।
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बुरहानपुर का असीरगढ़ किला
बुरहानपुर जिले से लगभग 20 किमी की दूर असीरगढ़ किला स्थित है। असीरगढ़ किला आज भी अपनी खूबसूरती को बरकरार रखे हुए हैं। बुरहानपुर शहर, जो कभी मुगल साम्राज्य की राजधानी के रूप में जाना जाता था, आज भी मस्जिदों, मकबरों और महलों सहित शानदार मुगल वास्तुकला को संजोए हुए है। ताप्ती नदी के तट पर स्थित बुरहानपुर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण "दक्षिणी भारत का प्रवेश द्वार" के रूप में जाना जाता था। अगर आप किसी स्थान की संस्कृति को अपने कैमरे में कैद करना पसंद करते हैं तो यह एक आदर्श स्थान है।
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पातालकोट छिंदवाड़ा जिले की तामिया तहसील में एक रहस्यमय घाटी है।
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पातालकोट- द विलेज ऑफ नीदरलैंड
अगर आप मध्यप्रदेश में खूबसूरत पहाड़ों और विस्मयकारी दृश्यों का आनंद लेना चाहते हैं तो आप पातालकोट- द विलेज ऑफ नीदरलैंड घूमने जरूर जाएं। ये जगह निश्चित रूप से आपके लिए एक यादगार डेस्टिनेशन रहेगा।
पातालकोट भारत के मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा जिले की तामिया तहसील में एक रहस्यमय घाटी है। ऐसी मान्यता है कि 'भगवान शिव' की पूजा करने के बाद, रावण के पुत्र मेघनाथ इसी स्थान से पाताल-लोक गए थे। पातालकोट स्थानीय वनस्पतियों के कई औषधीय उपयोगों के लिए प्रसिद्ध है। इस स्थान की यात्रा के दौरान आप गोंड और भारिया जनजातियों के साथ भी बातचीत कर सकते हैं।
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चंदेरी शहर ऐतिहासिक इमारतों और साड़ियों के लिए विख्यात है।
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चंदेरी की ऐतिहासिक इमारतें
चंदेरी शहर ऐतिहासिक इमारतों और साड़ियों के लिए विख्यात है। चंदेरी में कई किले मौजूद हैं जो आज भी ऐतिहासिक कहानियों को दर्शाते हैं। यहां पहाड़ियों, झीलों और स्मारकों के रूप में पूरा एक खज़ाना मौजूद है। ऐसा माना जाता है कि चंदेरी में पहले 1200 बावड़ी थीं। यह जैन समुदाय का एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र भी है। कस्बे के कुछ सबसे उत्तम स्थलों में कोशाक महल, जामा मस्जिद, शहजादी का रोजा और चंदेरी किला शामिल है।
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मंदिरों का निर्माण 8वीं और 10वीं शताब्दी के बीच हुआ था।
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भटेश्वर- 8वीं और 10वीं शताब्दी में बने मंदिर
यदि आप एक ही स्थान पर अध्यात्म और इतिहास के बेहतरीन मिश्रण का अनुभव करना चाहते हैं, तो मध्यप्रदेश में बटेश्वर वही स्थान है। बलुआ पत्थर से बने लगभग 200 प्राचीन हिंदू मंदिरों का एक संग्रह आवास, बटेश्वर, मध्यप्रदेश में अप्रत्यक्ष स्थानों में से एक है। आपको पुराने विश्व आकर्षण प्रदान करने वाले इस स्थान की यात्रा निश्चित रूप से करनी चाहिए। ये भव्य मंदिर भगवान शिव, विष्णु और शक्ति को समर्पित हैं, और इस साइट को न केवल हिंदू धर्म के अनुयायियों के बीच बल्कि खोजकर्ताओं और फोटोग्राफरों के बीच भी प्रतिष्ठित बनाते हैं। इन मंदिरों का निर्माण 8वीं और 10वीं शताब्दी के बीच हुआ था।
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यहां के घने जंगलों में रॉयल बंगाल टाइगर सहित वनस्पतियों और जीवों की एक विस्तृत श्रृंखला है।
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रातापानी वन्यजीव अभयारण्य
आपने भले ही बहुत सारे अभयारण्य देखे होंगे, लेकिन अगर आपने रातापानी अभयारण्य की सैर नहीं की है तो निश्चित रूप से आपके यात्रा संस्मरणों में एक कमी रह जाएगी। विंध्य रेंज में यह रातापानी वन्यजीव अभयारण्य बसा हुआ है। यहां के घने जंगलों में रॉयल बंगाल टाइगर सहित वनस्पतियों और जीवों की एक विस्तृत श्रृंखला है। इसके अलावा यहां तेंदुआ, सियार, लकड़बग्घा आदि भी देखे जा सकते हैं। 823 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य में घाटियां, पहाड़ियां, मैदान और पठार शामिल हैं।
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पाल से लगभग 28 किमी दूर भोजपुर मंदिर स्थित है।
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भोजपुर शिव मंदिर
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 28 किमी दूर भोजपुर मंदिर स्थित है। यहां हर महीने लाखों की तादाद में लोग भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं। मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी से ही शुरू हो गया था।
मंदिर को बलुआ पत्थर के ब्लॉकों से बनाया गया है और इसमें विभिन्न देवी-देवताओं की जटिल नक्काशी और मूर्तियों के साथ शानदार वास्तुकला है। गर्भगृह में एक शिवलिंग भी है। इसके अलावा, मंदिर को समर्पित एक छोटा संग्रहालय है जहां आप मंदिर के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
ये मंदिर हिंदू और मुस्लिम वास्तुकला का एक अच्छा मिश्रण है।
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पन्ना के मंदिर
पन्ना जिले के मंदिर पूरे मध्यप्रदेश राज्य में प्रसिद्ध हैं। ये मंदिर हिंदू और मुस्लिम वास्तुकला का एक अच्छा मिश्रण है। पन्ना जिला दुनिया भर में प्रणामी संप्रदाय के अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ है। अधिकांश मंदिरों की प्रमुख स्थापत्य योजनाएं समान रूप से समरूप हैं। पन्ना जिले के मंदिरों के शीर्ष पर कलश है और अधिकांश ऊंचे गुंबदों में कमल का रूप है। पन्ना जिले के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक महामती प्राणनाथजी मंदिर है। यह प्राणमियों का सबसे प्रमुख मंदिर है जो उनके धार्मिक और सामाजिक जीवन को दर्शाता है। मंदिर का निर्माण 1692 ई. में पूरा हुआ था।