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MP News: महाभारत समागम के दूसरे दिन दिखा भारत-श्रीलंका की सांस्कृतिक विरासत का भव्य संगम

Sun, 18 Jan 2026 09:08 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

महाभारत समागम के दूसरे दिन दर्शकों को भारत और श्रीलंका की समृद्ध कला परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिला। नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने महाभारत के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।

 

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महाभारत समागम में प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला

वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित महाभारत समागम के दूसरे दिन दर्शकों को भारत और श्रीलंका की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिला। श्रीलंका और पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से आए कलाकारों ने महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को अपनी-अपनी नृत्य और नाट्य शैलियों में मंचित कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बहिरंग मंच पर श्रीलंका के एके फोक आर्ट रिसर्च सेंटर, कोलंबो द्वारा संगीत-नाट्य पांचाली की प्रस्तुति दी गई। इसके पहले पूर्वरंग में कथकली नृत्य शैली में दुशासन वध, मणिपुर के कलाकारों द्वारा नृत्य-नाट्य उर्वशी और अंतरंग मंच पर शिखंडी का सशक्त मंचन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने कलाकारों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

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कार्यक्रम में नाट्य की प्रस्तुति देते महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
पांचाली में महाभारत का भावनात्मक प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसमें द्रौपदी की पुष्प प्राप्त करने की इच्छा, भीम का वनगमन, हनुमान से भेंट और अर्जुन के साथ पांडवों के पुनर्मिलन को प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया। यह प्रस्तुति वीरता, भक्ति, पारिवारिक प्रेम और दिव्य मार्गदर्शन का सुंदर चित्रण रही। अंतरंग मंच पर प्रस्तुत नाटक शिखंडी ने दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया। यह प्रस्तुति शिखंडी के संघर्ष, पहचान और सामाजिक स्वीकृति की कहानी कहती है। नाटक में लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा जैसे समकालीन विषयों को सशक्त रूप से उठाया गया।
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कलाकार प्रस्तुति देते हुए - फोटो : अमर उजाला
मणिपुरी नृत्य-नाटिका उर्वशी में अहंकार के दुष्परिणामों को दर्शाया गया। नर-नारायण की तपस्या, उर्वशी के गर्व और महर्षि दुर्वासा के शाप की कथा को मणिपुरी नृत्य की कोमलता और आध्यात्मिकता के साथ प्रस्तुत किया गया। पूर्वरंग में कथकली शैली में प्रस्तुत दुशासन वध ने दर्शकों को बांधे रखा। भीम और दुशासन के युद्ध तथा द्रौपदी के अपमान के प्रतिशोध को सशक्त अभिनय और नेत्राभिनय के माध्यम से दिखाया गया।
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कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
इसी दिन महाभारत समागम के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह का भी शुभारंभ हुआ। प्रसिद्ध रंगमंच निर्देशक पीटर ब्रुक की चर्चित फिल्म द महाभारत का प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने बड़ी संख्या में युवा और छात्र पहुंचे। समागम के तीसरे दिन 18 जनवरी को उरुभंगम्, मोहे पिया और नेत्रट जैसी नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
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