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संवेदनशील दांतों की देखभाल जरूरी, रेड वाइन समेत इन फलों से करें परहेज

Sat, 24 Aug 2019 05:04 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
संवेदनशील दांत बहुत तकलीफ देते हैं। कई बार दांत इतने संवेदनशील होते हैं कि गर्म चाय पीने और ठंडी आइसक्रीम खाने के खयाल से ही घबराहट होने लगती हैं। खास बात है कि ये दिक्कत तेजी से लोगों में बढ़ रही है। केजीएमयू के प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग की डॉ. स्नेहकिरन रघुवंशी बताती हैं कि इस मामले में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। मुंह संबंधी किसी समस्या की शुरुआत सांसों में बदबू या स्वाद में गड़बड़ से होती है। मसूड़ों से खून आना दांतों के अस्वस्थ होने का संकेत है।
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डाॅ स्नेहकिरन रघुवंशी - फोटो : amar ujala
ठंड से होने वाली संवेदनशीलता बहुत कम समय के लिए और कभी-कभी ही होती है, लेकिन दर्द अगर दांतों के आसपास एक सीमित क्षेत्र तक बना रहे तो यह माइक्रोक्रेक, फिलिंग के निकलने और केविटी का संकेत हो सकता है। यदि आपके दांत गर्माहट के प्रति संवेदनशील हैं, आप चबाने में दबाव महसूस करते हैं तो आपको डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है। हो सकता है कि यह इन्फेक्शन की शुरुआत हो। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
माउथवाॅश का ज्यादा इस्तेमाल न करें 
दिनभर माउथवॉश का इस्तेमाल ठीक नहीं है। इससे मुंह में छाले हो सकते हैं। माउथ क्लीनर्स संवेदनशील दांतों को खराब कर देता है। इसके अलावा आपको ब्रश करने का तरीका बदलने की जरूरत है। जोर से रगड़कर ब्रश न करें, इससे चमक चली जाएगी। अपने चमकदार सफेद दांतों पर हल्के हाथों से आराम से ब्रश करें। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर
हर टूथब्रश हर प्रकार दांतों के लिए नहीं होता। संवेदनशील दांतों के लिए अल्ट्रासॉफ्ट ब्रश का इस्तेमाल करें। इसके अलावा दांतों को पीसना बंद करें। दांतों को पीसने या टकराने से इनेमल हट जाता है और डेंटिन दिखने लगता है। अनेमल और डेंटिल उन चार अवयवों में से हैं, जिनसे दांत बनते हैं। अगर दांतों का पीसना किसी बीमारी के कारण है तो डॉक्टर को दिखाएं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
रेड वाइन, सोडा, खट्टे फल और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ छोड़ दें। ड्रिंक करना ही चाहते हैं तो स्ट्रॉ का इस्तेमाल करें। ताकि इसमें मौजूद एसिड पूरे मुंह में न फैले। खाना खाने के बाद गर्म पानी से 2-3 मिनट तक कुल्ला करें। इसके अलावा कम से कम दो बार ब्रश करें। हर तीन से चार माह में टूथ ब्रश बदलें, यदि इससे पहले ब्रिस्ट फैल जाएं तो भी बदल दें। यदि क्राउन लगा है या दांतों के बीच गैप है तो डेंटल फ्लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए इंटरडेंटल ब्रश का इस्तेमाल करना चाहिए। हर छह माह पर दांतों की जांच जरूरी है। इस बात का ध्यान रखें कि खाना दांत में फंसे नहीं। कभी-कभी संवेदनशीलता दांतों की वजह से ही नहीं बल्कि मसूड़ों की खराबी से होती है, इसलिए जांच जरूरी होती है। 
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