बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि ‘भारत बंद’ के दौरान दलितों पर जुल्म ढाने वाली भाजपा सरकारों को डॉ. भीम राव आंबेडकर की जयंती मनाने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं को दलितों के गांव में जाकर रुकने का नाटक करने के बजाय प्रमोशन में आरक्षण बिल को लोकसभा में पारित करवाना चाहिए। साथ ही एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून, 1989 को उसके मूल रूप में बहाल करवाना चाहिए। केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर भी ऐसा कर सकती है।
बसपा सुप्रीमो ने जारी बयान में कहा कि भाजपा सरकारें समाज में सांप्रदायिकता के साथ ही वैमनस्यता बढ़ा रही हैं। भाजपा के नेता डॉ. आंबेडकर का नाम मजबूरीवश लेते हैं, लेकिन उनके अनुयायियों पर जुल्म ढाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर के विचारों की अनदेखी करने वाली कोई भी सरकार कल्याणकारी हो ही नहीं सकती।
मायावती ने कहा कि दलितों व पिछड़ों ने ऐसा पाखंड बहुत देखा है। अब वे संगठित होकर भेदभाव के खिलाफ लड़ना सीख गए हैं। इसके विरोध की कीमत जेल जाकर चुका रहे हैं।
मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि उनके संघर्ष व आकांक्षाओं को ज्यादा दिनों तक दबाया नहीं जा सकता। सरकार ने इतना भय का माहौल बना दिया है कि दलित व पिछड़े आंबेडकर की जयंती भी खुलकर मनाने को लेकर आशंकित हैं।