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दुरुस्त रखना चाहते हैं अपना दिल तो इन नियमों को करें फॉलो, रहेंगे एकदम फिट

चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 18 Jun 2019 10:41 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
हृदय संबंधी रोगों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी कोरोनरी धमनी से जुड़ी बीमारियों के मरीज सबसे ज्यादा हैं। इस बीमारी में धमनी में वसा जम जाती है और उसमें रक्त का प्रवाह कम या बंद हो जाता है। इसकी चपेट में अब बच्चे भी आ रहे हैं। इसका प्रमुख कारण गलत दिनचर्या है। एसजीपीजीआई के कार्डियो वैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी (सीटीवीएस) विभागाध्यक्ष प्रो. निर्मल गुप्ता का कहना है कि प्रकृति के जितने नजदीक रहेंगे, यह बीमारी उतना दूर रहेगी। उनका दावा है कि महीन के बजाय मोटे और मिक्स आटे की रोटी, हरी सब्जी और कच्चा फल खाने वालों में यह बीमारियां कम पाई जाती हैं। नमक व चीनी का प्रयोग कम से कम करें। पेश है प्रो. गुप्ता से बातचीत के प्रमुख अंश-

 
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डॉ निर्मल गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
हृदय रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। किस तरह के मरीज ज्यादा आ रहे हैं?
हृदय रोग कई तरह से होते हैं। इसमें जन्मजात, दिनचर्या और संक्रमण संबंधी हृदय रोग प्रमुख हैं। इन दिनों ओपीडी में दिनचर्या संबंधी हृदय रोगी ज्यादा आ रहे हैं। करीब 20 साल की स्थिति पर गौर करता हूं तो पहले एंजाइना की समस्या लेकर मरीज आते थे। इनकी उम्र 50 साल से अधिक होती थी, अब एंजाइना वाले मरीज 35 से 40 साल वाले भी आने लगे हैं। कुल मरीजों में 20 फीसदी युवा हैं, जो तनाव से हृदयरोगी हो रहे हैं। फास्ट फूड जैसा गलत खानपान, धूम्रपान भी मोटापा बढ़ा रहा है। तनाव और मोटापा शरीर के दूसरे अंगों को कमजोर कर रहे हैं। इसमें हृदय पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है।

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डॉ निर्मल गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
कम उम्र वालों के हृदय रोगों की गिरफ्त में आने की वजह क्या है?
लोगों के सोने, खाने और काम करने के तरीके बदल गए हैं। न सूर्य की रोशनी मिलती है, न शुद्ध हवा। हवा, पानी और खाने की अशुद्धता शरीर सक्रिय रखने वाले तत्व नष्ट कर रही है। यह जहर धीरे-धीरे शरीर में जमता है और फिर नसों में खून का बहाव रोकता है। भागमभाग भरी जिंदगी में हर तरह का तनाव है। ऐसे में व्यक्ति जितना ज्यादा शारीरिक और मानसिक रूप से प्रकृति के नजदीक रहेगा, उसका हृदय उतना अधिक स्वस्थ रहेगा। सबसे ज्यादा नुकसान सिगरेट और शराब पहुंचा जा रही है। खाने में जितना संभव हो बिना छिले खाएं। कुछ लोग सेब, अमरूद को छिल कर खाते हैं, यह गलत तरीका है। इतना जरूर है कि उसे कम से कम दो घंटे पानी में भिगो दें। इससे छिलके पर पड़े केमिकल का असर कम हो जाता है।

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हृदय रोग की सबसे बड़ी वजह आप तनाव बता रहे हैं। इससे कैसे बचें?
व्यक्ति जब प्रकृति के नजदीक रहता है तो उसे खुशहाली मिलती है। संगीत सुनें। शारीरिक श्रम करें। पार्क में घूमे। करीब 30 से 45 मिनट पैदल चलें। घर के पास गार्डेन लगाएं। इसी के बहाने सक्रिय रहेंगे। सीढ़ियां चढ़ें। दिमाग सक्रिय रखें। 35 साल की उम्र पूरा करने के बाद साल में एक बार हीमोग्लोबिन, ईसीजी, सीरम क्रिएटिनिन, लिवर फंक्शन टेस्ट, पल्मोनरी फक्शन टेस्ट, चेस्ट एक्सरे कराएं।

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डॉ निर्मल गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
कार्डियक सर्जरी को लेकर लोगों में डर रहता है। क्या वाकई ऐसा है?
कार्डियक सर्जरी में नई तकनीकें आ रही हैं। अब रोबोटिक सर्जरी का जमाना है। इसमें हृदय की नसों के ब्लॉक होने और वॉल्व बदलने के लिए सर्जरी की जाती है। इसमें इंटरनल थोरेसिक आर्टरी का ऑपरेशन किया जाता है। इसमें पहले हाथ या पैर की नस लेते हैं और इसका इस्तेमाल वाहक नली के तौर पर करते हैं। यह तभी किया जाता है जब हृदय की तीनों मुख्य धमनियों में समस्या होती हो, इसे बाईपास सर्जरी भी कहते हैं। इसी तरह हृदय में चार वॉल्व होते हैं। जब ये सिकुड़ जाते हैं तो इन्हें बदलना पड़ता है। कई बार इसमें बैलून लगाकर फुलाया जाता है। 

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डॉ निर्मल गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
कोरोनरी धमकी की बीमारी क्या है, यह क्यों होती है?
खून में ऑक्सीजन और पोषक तत्व होते हैं। हृदय की एक मांसपेशी पंपिंग करते इसकी पूरे शरीर में सप्लाई देती है। रक्त ले जाने वाली इस नली को कोरोनरी धमनी कहा जाता है। जब इसमें वसा, कॉलेस्ट्रोल, कैल्शियम और अन्य पदार्थ जम जाते हैं तो संबंधित स्थान पर एथेरोस्कलेरोसिस होने लगती है। इसमें कोरोनरी धमनियों में जमा पदार्थ रक्त का प्रवाह रोकता है। इससे हृदय में ब्लड और ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने लगती है।

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किस तरह का लक्षण दिखे तो तत्काल डाक्टर से सलाह लें?
कई बार लोग हृदय के दर्द को हृदय में जलन या अपच समझ लेते हैं। इसे टालते रहते हैं, लेकिन अचानक घबराहट होने लगे, पसीना आए, सीने में दर्द हो और हाथों, कंधों, पीठ और जबड़े की ओर बढ़ता दिखे तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लें। यह कोरोनरी ब्लॉकेज के संकेत हो सकते हैं। इसी तरह चलने में सांस फूलना, मिचली आना, छाती में दर्द के साथ दबाव रहना, पैर में सूजन भी इसके लक्षण हैं।

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नवजात में भी हृदय रोग बढ़े हैं। कौन से लक्षण हैं कि डॉक्टर से संपर्क करें?
पैदा होने के बाद तेजी से रोते वक्त बच्चे का शरीर नीला पड़ जाए और उसे सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसी तरह स्तनपान करते वक्त बच्चे का शरीर नीला पड़ जाए और सांस लेने में दिक्कत दिखे या तेज पसीना छोड़ने लगे तो चिकित्सक को दिखाएं। यह हृदय संबंधी बीमारी का लक्षण भी हो सकता है।

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हृदय रोग की वजहें क्या हैं?
पहली वजह गलत लाइफस्टाइल। इसके अलावा धूम्रपान, डायबिटीज, उच्च कॉलेस्ट्रोल, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, तनाव हृदय रोग बढ़ाते हैं। इसकी पहचान ईसीजी से कराई जाती है। इसी तरह इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट, न्यूक्लीयर हार्ट स्कैन, इलेक्ट्रॉन बीम कंप्युटराइज्ड टोमोग्राफी, एंजियोग्राफी, इंटरावस्कूलर अल्ट्रासाउंड से बीमारी पकड़ में आ जाती है।
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