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गठिया के रोगियों को अब एक ही जगह मिलेंगी सभी सुविधाएं, केरल की तर्ज पर होगा इलाज

न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 19 Jun 2019 04:40 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
गठिया रोगियों के लिए राहत की खबर है। अब उन्हें एक ही छत के नीचे पंचकर्म से लेकर अन्य सभी तरह की सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके लिए राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज टुड़ियागंज में गठिया रोग उपचार केंद्र और शोध लैब बनाई जाएगी। इसमें केरल की तर्ज पर इलाज किया जाएगा। इसमें मरीजों को भर्ती भी किया जाएगा। इसके लिए शासन ने पहले चरण में 38.54 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। चार मंजिला भवन निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है। खास बात यह है कि यहां पूरे यूपी के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेजों से रेफर होने वाले गठिया मरीजों को भर्ती किया जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
अभी नहीं हैं इलाज की सभी सुविधाएं
यूपी में 25 लाख से ज्यादा गठिया के मरीज हैं। एलोपैथ पद्धति से गठिया के इलाज के लिए केजीएमयू और पीजीआई में तो सुपर स्पेशिएलिटी सुविधाएं भी हैं, लेकिन आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सभी सुविधाएं नहीं हैं। केरल में इस बीमारी का आयुर्वेदिक पद्धति से पूरा इलाज किया जाता है। अब टुड़ियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में एक ही छत के नीचे गठिया के इलाज की सभी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। भवन निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है। चार मंजिला भवन में ओपीडी, वार्ड, पंचकर्म, जांच केंद्र और शोध केंद्र बनेंगे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
...इसलिए जरूरी है आयुर्वेदिक इलाज
कम प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण हो रही जोड़ों की सूजन को गठिया कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे वात दोष माना गया है। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी यानी दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं। ये दवाएं लंबे समय तक चलती हैं। इससे गुर्दा और लिवर पर बुरा असर पड़ता है। इस रोग में आयुर्वेद को ज्यादा कारगर माना जाता है। इसके तहत पाचन तंत्र सुधारकर शरीर के विषाक्त पदार्थ को बाहर निकाला जाता है। विषाक्त पदार्थ पूरे शरीर में फैल कर कमजोर जोड़ों पर जमा होता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
पंचकर्म में शरीर से निकालते हैं विषाक्त पदार्थ
गठिया के लिए पंचकर्म उपचार को कारगर माना गया है। इसके लिए मरीज को भर्ती होना पड़ता है। इसमें शरीर को शुद्ध किया जाता है। औषधीय तेल से मालिश होती है। इसमें हर्बल पत्ते पर औषधीय तेल लगाकर पत्ते को गर्म किया जाता है और फिर उसे प्रभावित हिस्से में लगाया जाता है। धीरे-धीरे संबंधित स्थान से विषाक्त पदार्थ निकल जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
मरीज को भर्ती कर किया जाता है इलाज
आमवातारि रस, कोट्टमचुकादि तेल, मुरिवेन्ना आयल, रसनादि के जरिये गठिया का इलाज किया जाता है। इसके लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक की मौजूदगी जरूरी है। इसी तरह कुछ दवाएं खाली पेट खिलाई जाती हैं। इसी तरह खाने में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर वाली चीजें ज्यादा दी जाती हैं। पानी अधिक से अधिक पिलाया जाता है। कुछ व्यायाम भी कराए जाते हैं। इस वजह से मरीज को भर्ती करने की जरूरत पड़ती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वसायुक्त भोजन गठिया रोग की बड़ी वजह
शारीरिक काम न करना, ज्यादा खाना खाना, खाने में वसायुक्त भोजन करना, सर्दियों में ज्यादा सोना, डिब्बाबंद खानपान, पाचन तंत्र खराब होना, कब्ज रहना, बुखार आना, अंगुली में सूजन होना, हाथ-पांव में छोटी गांठें बनना गठिया की वजह है। कुछ लोगों में यह अनुवांशिक होता है। गठिया के अलग-अलग रूप होते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
गठिया के कई रूप
एनकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस

इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी और जोड़ प्रभावित होते हैं। जोड़ों में दर्द होता है। शरीर के निचले हिस्से की हड्डियों को सपोर्ट देने वाले सुरक्षात्मक कार्टिलेज और कोमल ऊतकों का किसी कारणवश टूटना शुरू हो जाता है। जोड़ों का लचीलापन कम हो जाता है और वो सख्त हो जाते हैं।
ऑस्टियो अर्थराइटिस
यह आम तौर पर वृद्धों में ज्यादा पाया जाता है। इसमें जोड़ों में दर्द होने लगता है। यह वात दोष की वजह से होता है। वात दोष को संतुलित करने की दवाएं दी जाती हैं।
जुवेनाइल अर्थराइटिस
यह बच्चों का गठिया रोग है। बच्चों के जोड़ों में दर्द, सूजन और जलन होती है। इसके कई लक्षण हड्डियों की टीबी से मिलते हैं। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने से यह होता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस
यह हाथ और पैर के जोड़ को प्रभावित करती है। इसमें व्यक्ति की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाएं अपने आप जोड़ों के आसपास की झिल्ली पर आक्रमण करने लगती हैं। इससे मांसपेशियों में सूजन और दर्द हो जाता है। हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
सिर्फ गठिया का होगा इलाज
गठिया रोग के इलाज के लिए अलग से भवन बनेगा। इसमें सिर्फ गठिया का इलाज होगा। प्रदेशभर के राजकीय कॉलेजों से रेफर मरीजों को यहां भर्ती किया जाएगा और उनका इलाज किया जाएगा। - डॉ. पीसी सक्सेना, प्राचार्य, राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज
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