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जेब में कार्ड डालकर सो रहा था कारोबारी, लगा 1.18 लाख का फटका

Sun, 11 Dec 2016 10:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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ठगों ने की ऑनलाइन शॉपिंग - फोटो : demo pic
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कैशलैस अर्थव्यवस्था के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए हो रहे प्रयासों को लखनऊ में तगड़ा झटका लगा है, यहां के एक शेयर मार्केट ट्रेडर ललित कुमार के क्रेडिट कार्ड से पांच दिसंबर की रात करीब एक बजे 1.18 लाख रुपये का भुगतान उनकी जानकारी के बिना कर दिया गया। 
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कार्ड ललित की जेब में था, वे सो रहे थे, लेकिन ई-मेल पर उन्हें उनके एक्सिस बैंक ने 1.04 बजे से 1.16 बजे के बीच 27 नोटिफिकेशन भेजे। खास बात है कि जालसाज ने इस 12 मिनट में ही फिल्मों के टिकट बुक करने से लेकर डॉमिनेज से पिज्जा तक मंगवाया। 

ललित ने बताया कि इस लूट की शिकायत करवाने वे गोमतीनगर थाने पहुंचे तो वहां तीन दिन उन्हें टहलाया गया। आखिरकार एफआईआर दर्ज की भी तो आईपीसी 420 धारा में केस दर्ज किया गया। इसके बाद वे हजरतगंज थाने पहुंचे तो यहां के प्रभारी वीर विजय सिंह सिरोही ने भी उनके मामले में कुछ कर पाने में अक्षमता जाहिर की और कहा कि एफआईआर में उचित धाराएं ही नहीं हैं।
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कोई बैंक नहीं ले रहा ज‌िम्मेदारी

डेमो प‌िक - फोटो : Demo
ललित कुमार ने ‘अमर उजाला’ से कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा वे कहां जाएं? एक्सिस बैंक को उन्होंने ई-मेल करके घटना की सूचना दी है। इसके बाद केवल इतना बताया गया है कि उनके मामले को देखा जा रहा है, जो ट्रांजेक्शन हुए उनकी जांच की जा रही है। 

वहीं जो पैसा क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया गया, उसकी जिम्मेदारी लेने को लेकर बैंक ने कोई जवाब नहीं दिया है। उन्हें इंतजार करने के लिए कहा है। ललित ने बताया कि उनके क्रेडिट कार्ड की खर्च करने की क्षमता 1.30 लाख रुपये है। 

इसमें से कुछ रकम वह खर्च कर चुके थे, और अब लूटने वालों ने केवल 7 हजार रुपये छोड़े हैं। वे एसपी ऑफिस भी गए, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। 
 

कम पढ़े लिखे लोग कैसे बचेंगे

डेमो पिक
ललित कुमार ने बताया कि वह शेयर ट्रेडिंग का काम करते हैं। दस साल से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए जरूरी सुरक्षा उपायों को समय-समय पर आजमाते हैं। पासवर्ड बदलते हैं, किसी से कार्ड का ब्यौरा शेयर नहीं करते हैं।

ललित ने कहा कि वह पढ़े लिखे हैं,  एक्सिस बैंक को सभी जानकारियों और साक्ष्यों के साथ ई-मेल कर चुके हैं। बड़ा सवाल तो यह है कि कम पढ़े-लिखे लोग आखिर कैसे बचेंगे। 

केंद्र सरकार ट्रांजेक्शन कैशलैस करना चाह रही है, वे इस बात की गारंटी कैसे लेगी कि दूसरे लोगों के साथ ऐसा नहीं होगा? अधिकतर लोग ई-मेल करना भी नहीं जानते, उन लोगों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड से इस तरह धांधली कैसे रुकेगी।
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जालसाज ने बुक कीं फिल्मों की टिकट, मंगवाया पिज्जा

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-ऑनलाइन टीवी शो व फिल्में बेचने वाली वेबसाइट नेट फ्लिक्स पर छह सौ से नौ सौ रुपये के दर्जनों पेमेंट 
- डॉमिनोज से 2,200 रुपये के पिज्जा मंगवाए गए।
- माइक्रोसॉफ्ट स्टोर से 5,300 रुपये के सॉफ्टवेयर खरीदे गए, कई अन्य सॉफ्टवेयर भी खरीदे गए।
- भारतीय वेबसाइट स्मार्ट बॉक्स पर पार्सल के 7,575 रुपये के कई दफा पेमेंट किए गए।
- 70-100 रुपये के टीवी चैनल सब्सक्राइव करवाए गए।
- फ्लाइट क्लब डॉट कॉम पर हवाई जहाज के 22,201 रुपये के टिकट 
- फैक्ट्री डायरेक्ट ज्वैलरी डॉट कॉम से 32,395 रुपये के जेवर खरीदे 
- वॉलमार्ट के 30,972 रुपये के पेमेंट

अधिकतर पेमेंट विदेशों में
ललित कुमार ने बताया कि अधिकतर भुगतान विदेशी वेबसाइट्स पर की गई शॉपिंग के लिए की गई है। ये पेमेंट डॉलर करेंसी के समकक्ष रुपया दिखाते हुए किए गए, यानी खरीदार भी विदेशी माने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शॉपिंग का समय रात एक बजे था जो संकेत देता है कि यह विदेशी धरती पर किया गया जहां दिन का समय था। 
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