विनीता
चाहे आप कामकाजी महिला हों या गृहिणी, अपने परिवार की सीमित मासिक आय को ध्यान में रखते हुए बजट बनाना हर महिला की जिम्मेदारी है। आमदनी हर महीने लगभग समान रहती है, लेकिन खर्च की आवश्यकताएं समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। ऐसे में हर नौकरीपेशा इन्सान इस बात से जरूर ताल्लुक रखता है कि महीने की शुरुआत में ऐसा लगता है जैसे जेब में पूरी दुनिया है, लेकिन महीने का आखिरी हफ्ता आते-आते जरूरतें बढ़ जाती हैं और पैसे कम लगने लगते हैं। कभी-कभार तो उधार तक लेने की नौबत आ जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इसका एक स्मार्ट तरीका है जीरो-बेस्ड बजटिंग। यह महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि यह वित्तीय अनुशासन और नियंत्रण सुनिश्चित करती है।
जीरो-बेस्ड बजटिंग
जीरो-बेस्ड बजटिंग एक ऐसी वित्तीय योजना है, जिसमें आपकी आमदनी का हर एक हिस्सा एक निश्चित उद्देश्य के लिए तय होता है। इसका मूल नियम यह है कि मासिक आय में से सभी खर्चों और बचत को घटाने पर शेष राशि शून्य रह जाए। हालांकि इसका मतलब कतई यह नहीं है कि आपको सारे पैसे खर्च कर देने हैं। असल में जीरो-बेस्ड बजटिंग में बचत और निवेश को भी खर्च की तरह बजट में शामिल किया जाता है।
इस बजट में आमदनी को विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाता है, जैसे- मकान का किराया या ईएमआई, राशन और दैनिक जरूरी सामान, बच्चों की फीस, परिवहन और बिल, बचत, निवेश और आकस्मिक खर्च। उदाहरण के लिए, अगर आपकी मासिक आय 50,000 रुपये है तो आपको अपने बजट को इस तरह बांटना होगा- मकान का किराया या ईएमआई 15,000 रुपये, राशन और दैनिक जरूरतें 10,000, बिजली, गैस, मोबाइल, इंटरनेट आदि 5,000 आैर आकस्मिक खर्च 10,000 रुपये। 10,000 रुपये आप बचत या निवेश में डाल सकती हैं। इस तरह आपकी पूरी आय कई हिस्सों में विभाजित हो जाएगी और हर किसी का अपना एक निश्चित उद्देश्य होगा।