फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Zero Based Budgeting: हर महीने पैसों की तंगी से परेशान? अपनाएं ये स्मार्ट जीरो-बेस्ड बजटिंग फॉर्मूला

Sat, 08 Nov 2025 07:22 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Budgeting For Women: त्योहारों में बजट बिगड़ चुका है। अब आप खर्चों में कटौती करेंगी, अतिरिक्त आय के स्रोत खोजेंगी या फिर नया बजट बनाएंगी। ऐसे में ‘जीरो-बेस्ड बजटिंग’ बजट बनाने का नया तरीका सिखा सकती है।
विज्ञापन
1 of 5
दफ्तर में काम करती महिला - फोटो : Adobe
विनीता

चाहे आप कामकाजी महिला हों या गृहिणी, अपने परिवार की सीमित मासिक आय को ध्यान में रखते हुए बजट बनाना हर महिला की जिम्मेदारी है। आमदनी हर महीने लगभग समान रहती है, लेकिन खर्च की आवश्यकताएं समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। ऐसे में हर नौकरीपेशा इन्सान इस बात से जरूर ताल्लुक रखता है कि महीने की शुरुआत में ऐसा लगता है जैसे जेब में पूरी दुनिया है, लेकिन महीने का आखिरी हफ्ता आते-आते जरूरतें बढ़ जाती हैं और पैसे कम लगने लगते हैं। कभी-कभार तो उधार तक लेने की नौबत आ जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इसका एक स्मार्ट तरीका है जीरो-बेस्ड बजटिंग। यह महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि यह वित्तीय अनुशासन और नियंत्रण सुनिश्चित करती है।

जीरो-बेस्ड बजटिंग

जीरो-बेस्ड बजटिंग एक ऐसी वित्तीय योजना है, जिसमें आपकी आमदनी का हर एक हिस्सा एक निश्चित उद्देश्य के लिए तय होता है। इसका मूल नियम यह है कि मासिक आय में से सभी खर्चों और बचत को घटाने पर शेष राशि शून्य रह जाए। हालांकि इसका मतलब कतई यह नहीं है कि आपको सारे पैसे खर्च कर देने हैं। असल में जीरो-बेस्ड बजटिंग में बचत और निवेश को भी खर्च की तरह बजट में शामिल किया जाता है।

इस बजट में आमदनी को विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाता है, जैसे- मकान का किराया या ईएमआई, राशन और दैनिक जरूरी सामान, बच्चों की फीस, परिवहन और बिल, बचत, निवेश और आकस्मिक खर्च। उदाहरण के लिए, अगर आपकी मासिक आय 50,000 रुपये है तो आपको अपने बजट को इस तरह बांटना होगा- मकान का किराया या ईएमआई 15,000 रुपये, राशन और दैनिक जरूरतें 10,000, बिजली, गैस, मोबाइल, इंटरनेट आदि 5,000 आैर आकस्मिक खर्च 10,000 रुपये। 10,000 रुपये आप बचत या निवेश में डाल सकती हैं। इस तरह आपकी पूरी आय कई हिस्सों में विभाजित हो जाएगी और हर किसी का अपना एक निश्चित उद्देश्य होगा।
 
विज्ञापन

2 of 5
दफ्तर में काम करती महिला - फोटो : Adobe
कामकाजी महिलाओं के लिए जरूरी

कामकाजी महिलाओं के लिए जीरो-बेस्ड बजटिंग विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होती है। यह न केवल खर्च पर नियंत्रण रखती है, बल्कि बचत और निवेश को भी सुनिश्चित करती है। आप सबसे पहले अपनी मासिक आय को लिखें और जरूरी खर्चों, जैसे- किराया, भोजन, परिवहन आदि के लिए राशि तय करें। इसके बाद बचत, निवेश और आपातकालीन फंड के लिए अलग हिस्सा रखें। हर खर्च का ट्रैक रखना जरूरी है। अनावश्यक खर्चों को सीमित करने से आप वित्तीय अनुशासन सीखती हैं और आत्मनिर्भर बनती हैं। समय-समय पर बजट की समीक्षा करें, ताकि जीवन में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार उसे समायोजित किया जा सके। यदि किसी महीने में आपको बोनस मिलता है या अतिरिक्त आमदनी होती है तो उसे भी अपने बजट में शामिल करें। इस राशि को अपनी किसी खास जरूरत पर खर्च करें या बचत में शामिल करें।
विज्ञापन

3 of 5
Women - फोटो : Pexel
गृहिणियों के लिए भी फायदेमंद

गृहिणियों के लिए जीरो-बेस्ड बजटिंग एक अत्यंत प्रभावी वित्तीय प्रबंधन उपकरण है, जो परिवार की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के आधार पर खर्चों को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें प्रत्येक खर्च को आय के बराबर निर्धारित किया जाता है, जिससे हर पैसे का उद्देश्यपूर्ण उपयोग सुनिश्चित होता है। राशन, बच्चों की पढ़ाई, घर के बिल और दैनिक आवश्यकताओं का सही प्रबंधन करना आसान हो जाता है। महिलाएं महंगे उपहार या सामान खरीदने के बजाय खरीदारी की योजना पहले से बनाकर डिस्काउंट और ऑफर्स का फायदा उठा सकती हैं। इससे न केवल खर्चों में कमी आती है, बल्कि बचत भी बढ़ती है।

बच्चों को भी बजट बनाने और खर्च प्रबंधन की प्रक्रिया में शामिल करना उन्हें वित्तीय जिम्मेदारी सिखाने का अवसर देता है। यह उन्हें भविष्य में स्मार्ट खर्च करने की आदत डालने में मदद करता है। इस प्रकार जीरो-बेस्ड बजटिंग गृहिणियों को न केवल वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करती है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है। यह एक सशक्त कदम है, जो महिलाओं को उनके घर के वित्तीय निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देता है।

4 of 5
Women - फोटो : Pexel
कैसे बनाएं प्लान

जीरो-बेस्ड बजटिंग अपनाने के लिए सबसे पहले अपनी कुल मासिक आय का आकलन करें, जिसमें वेतन, फ्रीलांसिंग आय, किराया या अन्य स्रोत शामिल हों। इसके बाद अपने खर्चों की सूची बनाएं और उन्हें जरूरी, परिवर्तनशील और आकस्मिक खर्चों में विभाजित करें। बचत और निवेश के लिए फंड तय करें और इसे भी खर्च का हिस्सा मानें। हर खर्च का ट्रैक रखें, चाहे वो दैनिक हो या साप्ताहिक, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समायोजन किया जा सके। महीने के अंत में पिछले महीने के फायदे-नुकसान का मूल्यांकन करके अगले महीने का बजट फिर से तैयार करें। इस प्रक्रिया से हर महीने एक नई शुरुआत होती है और अगर आकस्मिक खर्च बढ़ जाए तो गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करके बजट संतुलित कर सकती हैं।

दैनिक जीवन में इसे लागू करने के लिए पहले से किराने और घरेलू जरूरतों की योजना बनाएं, बिल और ईएमआई समय पर चुकाएं और बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए अलग फंड रखें। साथ ही मनोरंजन और खुद की देखभाल के लिए निर्धारित राशि रखें, ताकि मानसिक संतुलन बना रहे। खरीदारी और खर्च में स्मार्ट निर्णय लें, जैसे छूट, ऑफर्स और थोक खरीदारी का लाभ उठाना। इस प्रकार जीरो-बेस्ड बजटिंग न केवल महिलाओं को वित्तीय नियंत्रण देती है, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है।

दैनिक जीवन में महिलाओं के लिए जीरो-बेस्ड बजटिंग एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी तरीका है, जो वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता, दोनों सिखाती है। यह योजना न केवल खर्च पर नियंत्रण रखती है, बल्कि बचत, निवेश और आकस्मिक खर्चों के लिए भी मार्गदर्शन देती है। सही योजना और नियमित समीक्षा के साथ हर महिला अपनी आय का बेहतर प्रबंधन कर सकती है और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
बचत को रखें प्राथमिकता में - फोटो : Adobe Stock
बचत को रखें प्राथमिकता में

आर्थिक मामलों के जानकार दिव्य जोशी कहते हैं, त्योहारों के बाद बजट को संभालना उतना ही जरूरी है, जितना त्योहार से पहले उसकी तैयारी करना। एक कहावत है, अपनी चादर देखकर ही पैर फैलाने चाहिए। यह पुरानी जरूर है, लेकिन आज भी सही साबित होती है। जीरो-बेस्ड बजटिंग का तरीका आपको वित्तीय मामलों में जागरूक बनाता है, इसलिए यह आपके लिए फायदेमंद साबित होता है। इसके माध्यम से आप हर खर्च का उद्देश्य तय करें और बचत को प्राथमिकता में रखें। थोड़े-थोड़े पैसे बचाकर आप फिर से अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बना सकती हैं और अपने भविष्य को संवार सकती हैं।

भारतीय समाज में कुशल गृहिणियां पहले से ही हर महीने कुछ पैसे बचाकर रखने की आदत अपनाती हैं, जिससे किसी भी आकस्मिक खर्च से उनका बजट प्रभावित नहीं होता है और परिवार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। वहीं अगर आप नौकरीपेशा हैं तो हर महीने अपनी आमदनी का एक हिस्सा एफडी, पीपीएफ या एसआईपी में निवेश करें। यह न केवल सुरक्षित बचत का माध्यम है, बल्कि टैक्स बचत में भी मददगार साबित होता है। जीरो-बेस्ड बजटिंग आपके खर्च के हर हिस्से का उद्देश्य तय कर आपको बचत करना सिखाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें