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Yoga Tips: पित्त दोष के कारण पाचन और मूड संबंधी हो सकती हैं दिक्कतें, इन योगासनों से मिलता है लाभ

Tue, 03 Jan 2023 11:53 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पित्त दोष के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Pixabay
योगासनों को संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर रखने वाले अभ्यास के तौर पर जाना जाता है, जिससे मन शांत रखने के साथ कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं के जोखिम को कम करने तक के लाभ हैं। आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार शरीर में बीमारियों के लिए तीन दोष प्रमुख कारक हैं- वात, पित्त और कफ। इनमें होने वाले असंतुलन की स्थिति, दोष के आधार पर शरीर की सेहत को प्रभावित कर सकती है।

आयुर्वेदिक दिनचर्या में योगासनों को शामिल करने को विशेष लाभकारी बताया गया है, इससे इन तीनों को संतुलित रखने में भी मदद मिल सकती है। इस लेख में हम पित्त दोष के कारण होने वाली समस्या और इसमें सुधार करने वाले योगासनों के बारे में जानेंगे।

जिन लोगों को पित्त दोष की समस्या होती है उनको शरीर में अत्यधिक गर्मी पैदा होने, एसिड, गैस, अपच जैसी समस्याओं का जोखिम अधिक होता है। इस तरह की दिक्कतों पर ध्यान न देने की स्थिति में आगे चलकर गंभीर रोग विकसित होने का भी खतरा हो सकता है। शरीर को स्वस्थ रखने और पित्त से संबंधित विकारों के जोखिम को कम करने के लिए दिनचर्या में योगासनों को शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है, आइए इस बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
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कब्ज और अपच की समस्या - फोटो : pixabay
पित्त दोष के कारण होने वाली समस्याएं

पित्त, हार्मोन, एंजाइम, तापमान और पाचक अग्नि को नियंत्रित करता है, ऐसे में इसमें होने वाली समस्या पाचन स्वास्थ्य के साथ शरीर के तापमान की स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है। पित्त दोष के कारण कब्ज और अपच की समस्या के अलावा जोड़ों की सूजन, गुस्सा और चिड़चिड़ापन, शरीर की गंध और बहुत ज़्यादा पसीना आने की भी समस्या हो सकती है।  

शरीर की क्षमता से अधिक मेहनत करने पर भी पित्त दोष में वृद्धि हो जाती है। इसे कई प्रकार के योगासनों के माध्यम से कंट्रोल किया जा सकता है।
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सर्वांगासन योग से लाभ - फोटो : Pixabay
सर्वांगासन योग से मिलता है लाभ

सर्वांगासन योग को पित्त विकारों से संबंधित समस्याओं को दूर करने और शरीर में कूलिंग इफेक्ट को बढ़ावा देने में लाभकारी अभ्यास के तौर पर जाना जाता है। पित्त बढ़ने की स्थिति में मन की आशांति भी बढ़ जाती है, इस तरह की समस्याओं के जोखिम को कम करने में भी सर्वांगासन योग के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि सर्वांगासन योग रक्त संचार को ठीक रखने और पाचन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद अभ्यास है।
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बटरफ्लाई पोज का अभ्यास - फोटो : istock
बटरफ्लाई पोज का करें अभ्यास

बटरफ्लाई पोज का अभ्यास करके भी पित्त विकार के कारण होने वाली कई तरह की समस्याओं के जोखिम को कम करने और पित्त को शांत करने में लाभ मिल सकता है। बटरफ्लाई पोज न सिर्फ पाचन अंगों का बेहतर तरीके से मालिश करने वाला अभ्यास है साथ ही यह सौम्य स्ट्रेचिंग के साथ  मन और शरीर दोनों को शांत करने में भी मदद करती है। शरीर के दर्द और हार्मोन्स के असंतुलन को ठीक करने में इस योग के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। 



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञ के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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