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Yoga Tips: 40 की उम्र में घुटनों के दर्द से हैं परेशान तो शुरू कर दें इन योगासनों का अभ्यास

Sat, 21 Dec 2024 12:05 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

अभी से योगाभ्यास की आदत बना लेंगे तो 60 की आयु के बाद भी चलने फिरने में अधिक दिक्कत और दर्द महसूस नहीं होगा।
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जोड़ों के दर्द के लिए योग - फोटो : Amar ujala
Yoga Tips For Knee Pain Relief: उम्र बढ़ने के साथ घुटनों के दर्द की समस्या बढ़ने लगती है। जोड़ों में दर्द का एक प्रमुख कारण बुढ़ापा है। ये समस्या उम्र के साथ अधिक बढ़ जाती है लेकिन अगर आपको 35-40  की उम्र में जोड़ों का दर्द होना शुरू होने लगे तो समस्या को अनदेखा न करें। उम्र से पहले घुटनों या जोड़ों में दर्द का एक कारण शारीरिक गतिविधियों का अधिक इस्तेमाल है। जैसे व्यायाम, खेल ज्यादा करने से घुटनों के जोड़ों पर दबाव पड़ता है।

घुटनों में चोट लगने पर भी दर्द हो सकता है। इसके अलावा पोषण की कमी, जैसे- शरीर में विटामिन सी, विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होने से घुटनों और जोड़ों में दर्द हो सकता है। जब शरीर में यूरिक एसिड बहुत ज्यादा बनने लगता है तो गाउट की समस्या हो सकती है और घुटनों में दर्द हो सकता है।

अगर 35-40 की आयु में घुटनों में दर्द की समस्या से आप भी परेशान हैं तो कुछ योगासनों का अभ्यास करके दर्द से निजात पा सकते हैं। अगर अभी से योगाभ्यास की आदत बना लेंगे तो 60 की आयु के बाद भी चलने फिरने में अधिक दिक्कत और दर्द महसूस नहीं होगा।
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त्रिकोणासन - फोटो : istock
त्रिकोणासन

त्रिकोणासन का अभ्यास शरीर को लचीला बनाने के साथ ही मांसपेशियों को मजबूत करता है। इससे रीढ़ की हड्डी और पीठ के दर्द से राहत मिलती है। शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। इस आसन का अभ्यास तनाव व चिंता कम करने के साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।

आसन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े हो जाएं। अब पैरों के बीच करीब दो फीट की दूरी रखें और लंबी गहरी सांस लेते हुए शरीर को दाईं ओर झुकाएं। फिर बाएं हाथ को ऊपर की ओर ले जाएं। अपनी नजरें भी बाएं हाथ की उंगलियों पर टिकाएं। कुछ देर इस मुद्रा में रहे और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं। अब दूसरी ओर से ये प्रक्रिया अपनाएं।
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मलासन - फोटो : Istock
मलासन

मलासन शरीर को टोन करता है। इस आसन के अभ्यास से कमर दर्द, घुटनों और हाथों के जोड़ों में दर्द दूर होता है। पाचन तंत्र सक्रिय करने से लेकर कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है। पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है। मलासन से टखने और घुटनों में लचीलापन आता है।

इस आसन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े होकर दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। अब हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में ले आएं और धीरे से नीचे बैठें। सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। दोनों कोहनियों को जांघों के बीच 90 डिग्री के एंगल में ले जाएं और सामान्य तरीके से सांस लें। फिर सामान्य अवस्था में सीधे खड़े हो जाएं।

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पर्श्वोत्तनासन - फोटो : Freepik
पर्श्वोत्तनासन

पर्श्वोत्तनासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और लचीलापन आता है। इस आसन से कूल्हों, कंधों और कलाइयों को मजबूती मिलती है। गर्दन, कंधों, कोहनी और कलाई में गठिया कम करने में पर्श्वोत्तनासन असरदार है। 

इसे पिरामिड पोज भी कहते हैं।  पर्श्वोत्तनासन का अभ्यास करने के लिए दाहिने पैर को आगे बढ़ाकर 45 डिग्री एंगल बनाएं। अब आगे की ओर झुकते हुए हाथों को नीचे जमीन पर सटाएं। इस दौरान घुटनों को मोड़ें नहीं। इस स्थिति में कुछ देर रहने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं।जाएं।
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योग के फायदे - फोटो : Adobe Stock
नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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