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Yoga Tips: युवाओं में बढ़ रही है फैटी लिवर की समस्या, क्या योग के अभ्यास से पा सकते हैं इसमें आराम?

Mon, 09 Jan 2023 10:20 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फैटी लिवर का खतरा - फोटो : iStock
लिवर, शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, इसमें होने वाली किसी भी तरह की समस्या के चलते पूरे शरीर पर नकारात्मक असर देखा जा सकता है। लिवर में फैट एकत्रित होने, जिसके कारण फैटी लिवर की समस्या हो सकती है, युवाओं में यह तेजी से बढ़ती दिक्कत देखी जा रही है। आमतौर पर माना जाता है कि लिवर के ज्यादातर रोग शराब के अधिक सेवन के कारण होते हैं पर फैटी लिवर के कुछ मामले उन लोगों में भी हो सकते हैं जो शराब नहीं पीते हैं।

इस स्थिति को नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के रूप में जाना जाता है। डॉक्टर कहते हैं कि लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सभी लोगों को आहार पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। अध्ययनों में पाया गया है कि लिवर को स्वस्थ रखने, इसके कार्यों को बढ़ावा देने और फैटी लिवर डिजीज जैसी समस्याओं के जोखिमों को कम करने में योगासनों के अभ्यास की आदत बनाना भी फायदेमंद हो सकता है।

इतना ही नहीं नियमित रूप से योग का अभ्यास करने वालों में लिवर की बीमारियों के विकसित होने का जोखिम भी कम होता है। आइए जानते हैं कि लिवर को स्वस्थ रखने और फैटी लिवर जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करने में किन योगासनों का अभ्यास किया जा सकता है?
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नौकासन के फायदे - फोटो : istock
नौकासन योग से मिलता है लाभ

नौकासन योग को संपूर्ण शरीर के लिए लाभकारी अभ्यास के रूप में जाना जाता है। इसके अभ्यास के दौरान पाचन अंगों पर दबाव बढ़ता है जिससे पेट की समस्याओं को दूर करने और लिवर को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

यह योग मुद्रा लिवर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को निकालने और अतिरिक्त फैट के जमाव को कम करने में भी आपके लिए मददगार हो सकती है। नौकासन के अभ्यास से पीठ-पेट की स्ट्रेचिंग भी की जा सकती है।
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मत्स्यासन योग से होने वाले लाभ - फोटो : istock
मत्स्यासन योग के फायदे

मत्स्यासन योग को लिवर को उत्तेजित करने और पाचन अंगों को मजबूत बनाने में लाभकारी अभ्यास माना जाता है। फैटी लिवर जैसी समस्याओं के जोखिम को कम करने के अलावा  हिप फ्लेक्सर्स और इंटरकोस्टल (पसलियों के बीच की मांसपेशियों) की स्ट्रेचिंग से लेकर गर्दन, गले और कंधों पर बन रहे अतिरिक्त तनाव से राहत दिलाने में भी इस अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है।

मत्स्यासन योग का दैनिक अभ्यास फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और सांस को ठीक रखने में भी फायदेमंद है।
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नियमित प्राणायाम से होने वाले लाभ - फोटो : Pixabay
कपालभाति प्राणायाम का करें अभ्यास

प्राणायाम के भी कुछ अभ्यास पाचन और लिवर की समस्याओं से आराम दिलाने में आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। कपालभाति प्राणायाम को इसके लिए बेहद कारगर अभ्यास माना जाता है। सांस की यह विशेष तकनीकि लिवर को उत्तेजित करके अतिरिक्त फैट के जमाव को कम करने में विशेष लाभकारी हो सकती है।

इस अभ्यास के दौरान पेट पर झटके के साथ दबाव पड़ता है जिससे पाचन अंगों को उत्तेजित करने में लाभ पाया जा सकता है।



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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