धनुरासन और चक्रासन
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योग शिक्षक बनने तक का सफर
एक दशक से अधिक समय तक योग का अभ्यास करने के बाद आखिरकार मैंने योग शिक्षक और मूल्यांकनकर्ता बनने का फैसला किया। मैंने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान में योग का अध्ययन किया और फिर भारत के योग सर्टिफिकेशन बोर्ड द्वारा आयोजित कठिन परीक्षा दी। फरवरी 2025 में मैं योग शिक्षक और मूल्यांकनकर्ता के रूप में प्रमाणित हुआ।
इसके बाद से मैं राजनयिकों और योग में रुचि रखने वाले लोगों के लिए योग कक्षाएं आयोजित कर रहा हूं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मैंने अजरबैजान के बाकू में पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए एक विशेष योग सत्र भी आयोजित किया।
योग आखिर है क्या?
दस साल से अधिक समय तक योग का अभ्यास करने के बाद मेरी समझ में योग केवल व्यायाम नहीं है। आसन शरीर को तैयार करते हैं, प्राणायाम सांस पर ध्यान केंद्रित करना सिखाता है और ध्यान मन को शांत करने की दिशा में ले जाता है। योग की व्यापक परंपरा में शरीर, सांस और मन पर नियंत्रण के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर अधिक संतुलन विकसित करने की कोशिश करता है।
मेरी योग यात्रा ने मुझे यही सिखाया है कि योग किसी एक वर्ग, उम्र या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी परंपरा है, जिससे हर व्यक्ति अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार कुछ न कुछ सीख सकता है। आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे आश्चर्य होता है कि जिस योग के बारे में बचपन में मैंने कभी सुना तक नहीं था, वही आज मेरे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
योग ने मुझे शरीर को समझने, सांस पर ध्यान देने और मन को शांत करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
योग हम सभी को जोड़ता है। रोजाना सिर्फ 15 मिनट भी योग के लिए निकालना आपको शांति, सकारात्मकता और बेहतर जीवनशैली की दिशा में एक कदम आगे ले जा सकता है। मैं योग को सभी के लिए अपनाने की दिल से सलाह देता हूं।
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