फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yoga Tips: रक्त को शुद्ध रखने के लिए योगासनों को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा, शरीर को मिलते हैं कई प्रकार के लाभ

Sat, 10 Dec 2022 11:58 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 4
रक्त को कैसे शुद्ध रखा जाए? - फोटो : Pixabay
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से बाहरी और आंतरिक दोनों सफाई आवश्यक होती है। हम सभी अक्सर बाहरी सफाई पर तो ध्यान दे लेते हैं पर आंतरिक सफाई को जाने-अनजाने नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही कारण है कि अंगों और रक्त में विषाक्तता बढ़ जाती है। रक्त में मौजूद विषाक्त पदार्थों का शरीर के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक असर हो सकता है। यही कारण है कि सभी लोगों को शरीर को डिटॉक्स करते रहने की सलाह दी जाती है। इसके लिए दिनचर्या में कुछ आवश्यक बदलाव के साथ बेहतर आहार और नियमित योगासनों से लाभ पाया जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि दिनचर्या में नियमित रूप से योगासनों को शामिल करने की आदत शरीर के लिए कई प्रकार से लाभकारी हो सकती है। रक्त शुद्धिकरण को बढ़ावा देने में भी इससे लाभ पाया जा सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, योग मुद्राएं और व्यायाम केवल शारीरिक स्थिरता और लचीलापन को ही नहीं बढ़ाते हैं बल्कि यह मांसपेशियों, नसों, ऊतकों और अंगों पर भी प्रभाव डालते हैं जिससे आपकी आंतरिक शक्ति और क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

आइए जानते हैं किन योगासनों की मदद से रक्त को शुद्ध किया जा सकता है?
विज्ञापन

2 of 4
गरुणासन योग से होने वाले लाभ - फोटो : Istock
ईगल पोज़ के लाभ

रक्त विकारों में शोधकर्ताओं ने ईगल पोज़ अभ्यास को लाभकारी पाया है। योग विशेषज्ञ कहते हैं, रक्त परिसंचरण के साथ शुद्धिकरण को बढ़ावा देने में इस योग के लाभ हो सकते हैं। यह लसीका प्रणाली से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा, यह मुद्रा मांसपेशियों की बेहतर स्ट्रेचिंग में मददगार है। कूल्हों, जांघों, कंधे और पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को आराम देने में भी इसके अभ्यास से लाभ मिल सकता है।
विज्ञापन

3 of 4
शोल्डर स्टैंड पोज के लाभ - फोटो : Pixabay
सर्वांगासन योग (शोल्डर स्टैंड) की बनाएं आदत

सर्वांगासन योग, संपूर्ण शरीर के लिए लाभकारी योगाभ्यासों में से एक  है। शरीर में रक्त के बेहतर संचरण को बढ़ावा देने के साथ विषाक्तता के जोखिम को कम करने में नियमित रूप से इस योग के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। इस योग के नियमित अभ्यास की आदत बनाने से हृदय को डिटॉक्सिफाई करने और ऑक्सीजन युक्त और साफ रक्त के संचार को बढ़ावा देने में लाभ पाया जा सकता है।
विज्ञापन

4 of 4
नाड़ी शोधन प्राणायाम - फोटो : pixabay
नाड़ी शोधन प्राणायाम से मिलता है लाभ

नाड़ी शोधन प्राणायाम को अध्ययनकर्ताओं ने पूरे शरीर के लिए कई प्रकार से लाभकारी पाया है। यह आपके रक्त को शुद्ध करता है, दिमाग को शांत करने और मानसिक तनाव को कम करने में भी इस योग के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। प्राणायाम के नियमित अभ्यास की आदत बनाना मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का सबसे कारगर तरीका हो सकता है।



------------------
नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें