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Yoga Tips: बढ़ती इंफर्टिलिटी की समस्या में कितने कारगर हैं योगासन? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

Thu, 11 Aug 2022 12:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंफर्टिलिटी की बढ़ती समस्या - फोटो : iStock
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर इंफर्टिलिटी यानी कि बांझपन की समस्या काफी तेजी से बढ़ती हुई रिपोर्ट की जा रही है। यह समस्या महिला-पुरुष किसी में भी हो सकती है, आम तौर पर एक तिहाई मामले पुरुषों में समस्या के कारण होते हैं। इस समस्या के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ गड़बड़ लाइफस्टाइल को प्रमुख कारण के तौर पर देखते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं यदि सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को दूर करने के साथ पौष्टिक चीजों के साथ खान-पान पर ध्यान दिया जाए तो  इंफर्टिलिटी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित रूप से योगासनों का अभ्यास करना भी इसमें आपके लिए विशेष लाभकारी हो सकता है।

योग को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। योगासन हार्मोन्स के कार्यों में सुधार करने के साथ इंफर्टिलिटी के कारकों को दूर करने में आपके लिए विशेष लाभकारी हो सकते हैं।

रक्त संचार बढ़ाने के साथ तनाव-चिंता को कम करने और यौन समस्याओं को दूर करने में नियमित रूप से योगासनों के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। आइए जानते हैं कि किन आसनों के अभ्यास से आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं?
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इंफर्टिलिटी में योगासनों से मिल सकता है लाभ - फोटो : Pixabay
इंफर्टिलिटी में योगासनों से लाभ

इंफर्टिलिटी की समस्या में योगासनों के अभ्यास की आदत बनाना कई प्रकार से आपको लाभ प्रदान कर सकता है।  
  • योगासन अंडाशय और गर्भाशय को उत्तेजित करता है।
  • तनाव और चिंता को कम करता है।
  • हार्मोन के स्तर को संतुलित रखने में सहायक है।
  • रक्त प्रवाह और परिसंचरण को बढ़ाता है।
  • मांसपेशियों को मजबूत करने में सहायक।
  • एंडोक्राइन (हार्मोन) सिस्टम को उत्तेजित करता है।
  • स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए योगासनों का अभ्यास लाभदायक माना जाता है।
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सूर्य नमस्कार योगासनों के लाभ - फोटो : pixabay
सूर्यनमस्कार के अभ्यास से मिलता है लाभ

इंफर्टिलिटी में जिन योगासनों को सबसे कारगर माना जाता है, सूर्यनमस्कार उनमें से एक है। सूर्यनमस्कार के अभ्यास  की आदत मासिक धर्म को ठीक रखने और गर्भाशय की समस्याओं को दूर करने में लाभकारी हो सकता है। सूर्यनमस्कार कई तरह के योगासनों का संयोजन है जो शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इंफर्टिलिटी की बढ़ती समस्याओं के लिए गड़बड़ मानसिक स्वास्थ्य को भी एक कारक के तौर पर देखा जाता है, सूर्यनमस्कार के अभ्यास से इसमें लाभ पाया जा सकता है।
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पश्चिमोत्तानासन योग करने से फायदे - फोटो : Pixabay
पश्चिमोत्तानासन योग 

पश्चिमोत्तानासन योग के नियमित अभ्यास की आदत आपकी सेहत को कई प्रकार से लाभान्वित कर सकती है। यह आसन आपकी पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग में सहायक है। यह महिलाओं में प्रजनन क्षमता में सुधार करने के साथ मानसिक तनाव को कम करते हुए अंडाशय और पेट के महत्वपूर्ण अंगों को सक्रिय रखने में मदद करता है। पश्चिमोत्तानासन योग  के नियमित अभ्यास की आदत बनाने से लाभ मिल सकता है।



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नोट:
यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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