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World Thalassemia Day: थैलेसीमिया के मरीजों के लिए असरदार योग, जो खून संबंधी लक्षणों को करें कम

Thu, 08 May 2025 06:00 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Yoga For Thalassemia  थैलेसीमिया के मरीजों के लिए योग बेहद प्रभावी हैं। इनके अभ्यास से खून संबंधी लक्षणों को कम किया जा सकता है और जीवनशैली को बेहतर बना सकते हैं।
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थैलेसीमिया - फोटो : Adobe
Yoga Asanas For Thalassemia: थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण सामान्य रूप से नहीं हो पाता। इस वजह से शरीर में खून की कमी (एनीमिया) होती है और समय-समय पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। 

हालांकि, नियमित दवाओं और उपचार के साथ-साथ योग अपनाकर थैलेसीमिया के मरीज अपने जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं और रोग के लक्षणों को कम कर सकते हैं।

योग का नियमित अभ्यास शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और खून से संबंधित लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है। दवाओं और डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ अगर योग को दिनचर्या में शामिल किया जाए तो थैलेसीमिया मरीज भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। आइए जानें थैलेसीमिया में कौन-कौन से योगासनों का अभ्यास लाभकारी माना जाता है।
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कपालभाति प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala
कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति प्राणायाम के नियमित अभ्यास से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनता है। यह शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाता है जिससे कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं। यह मानसिक तनाव कम करने के साथ शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखता है। प्राणायाम करने से बेहतर ऑक्सीजन आपूर्ति के कारण शरीर के अंगों का पोषण अच्छा होता है, जिससे खून की कमी से होने वाली थकान और कमजोरी कम होती है।
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Vajrasana - फोटो : pexel
वज्रासन 

इस आसन के नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया मजबूत होती है। यह आसान शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है, जिससे एनीमिया के लक्षण कम होते हैं।

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bhujangasana - फोटो : Pexel
भुजंगासन 

भुजंगासन का अभ्यास रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। साथ ही खून का संचार बेहतर करता है। पेट से संबंधित समस्याओं को कम करता है। पाचन बेहतर होने से रक्त निर्माण में सहायता मिलती है।
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हीमोग्लोबिन - फोटो : Adobe
नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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