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World COPD Day 2024: फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए इन योगासनों को आजमाएं, सीओपीडी की समस्या से होगा बचाव

Wed, 20 Nov 2024 11:28 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
World COPD Day 2024: वैश्विक स्तर पर सांस संबंधी समस्याएं गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) एक ऐसी बीमारी है जो फेफड़ों और वायु मार्ग को प्रभावित करती है। इस रोग के कारण आपका वायु मार्ग अवरुद्ध हो जाता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो सकता है। वायु मार्ग में सूजन और जलन की दिक्कत होने लगती है।

वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, फेफड़ों की इस बीमारी के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत  हो जाती है। सीओपीडी को वैश्विक स्तर पर मौत का चौथा प्रमुख कारण माना जाता है। फेफड़ों की इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और बचाव के उपायों को लेकर शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल नवंबर माह के तीसरे बुधवार को विश्व सीओपीडी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष 20 नवंबर 2024 को सीओपीडी दिवस मनाया जा रहा है।

फेफड़ो की इस बीमारी से बचाव के लिए नियमित योगासनों का अभ्यास कर सकते हैं। योग फेफड़ों की सेहत का ख्याल रखने के साथ ही श्वसन समस्याओं को कम करते हैं और वायु मार्ग को बेहतर बनाते हैं। हालांकि, सीओपीडी से पीड़ित व्यक्ति को किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए और ऐसे किसी भी आसन से बचना चाहिए जो सांस लेने में बाधा उत्पन्न करता हो।
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भस्त्रिका प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala
प्राणायाम

सोओपीडी की समस्या होने पर अच्छी श्वसन क्रिया के लिए आप प्राणायाम कर सकते हैं। प्राणायाम श्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं। प्राणायाम के अंतर्गत कई श्वसन क्रिया होती हैं। सीओपीडी से पीड़ित मरीज भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास कर सकते हैं। इसके अलावा भ्रामरी प्राणायाम भी शरीर के वायु मार्ग को साफ करती है, ताकि सांस लेने में मुश्किल न आए।

अनुलोम विलोम के अभ्यास में सांस अंदर और बाहर ली जाती है। इस प्राणायाम से श्वसन संबंधी समस्याएं कम हो सकती हैं। कपालभाति का अभ्यास शुरू कर दें। ये शरीर में श्वसन क्रिया को मजबूत बनाता है और सांस की समस्याओं को कम कर सकता है।
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ताड़ासन - फोटो : Amar ujala
ताड़ासन

ताड़ासन का अभ्यास गलत पोस्चर और रीढ़ की हड्डी की खराबी को ठीक करने में मदद करता है। ताड़ासन करते समय छाती खुली और  रीढ़ लंबी होती है। यह अवस्था सांस लेने की अनुमति देती है। आसन गहरी सांस लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता और ऑक्सीजन का सेवन बढ़ सकता है।

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पश्चिमोत्तानासन योग - फोटो : amar ujala
पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास लिवर के साथ ही किडनी, अंडाशय को भी स्वस्थ बनाता है। इससे शरीर  के मध्य भाग की स्ट्रेचिंग होती है और जिन लोगों को लीवर की समस्याएं हैं, उनपर सकारात्मक असर डालता है। 
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बच्चों में निमोनिया - फोटो : Freepik.com

नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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