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Yoga For Women: पीरियड्स अनियमित हैं? रोज करें ये 7 योगासन, हार्मोन बैलेंस करने में मिल सकती है मदद

Wed, 24 Jun 2026 10:43 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ के लिए सबसे प्रभावी योगासन कौन-से हैं? महिलाओं में हार्मोन संतुलन बनाए रखने के लिए भुजंगासन, सेतु बंधासन, बालासन, बटरफ्लाई पोज, सर्वांगासन, मार्जरीआसन-बितिलासन और सुप्त बद्ध कोणासन जैसे योगासन फायदेमंद माने जाते हैं। ये तनाव कम करने, रक्त संचार बढ़ाने और हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों के कार्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
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महिलाओं के लिए योग - फोटो : AI

Mahilaon Ke Liye Yoga: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित खानपान, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि का सबसे ज्यादा असर महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ पर पड़ता है। हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं, जिनमें पीरियड्स, प्रजनन क्षमता, मूड, मेटाबॉलिज्म और नींद शामिल हैं। जब हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, तो महिलाओं को पीसीओएस (बदला नाम PMOS), अनियमित मासिक धर्म, वजन बढ़ना, थकान, मूड स्विंग्स और त्वचा संबंधी समस्याओं जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योगाभ्यास हार्मोनल संतुलन बनाए रखने का एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका हो सकता है। योग न केवल तनाव को कम करता है बल्कि एंडोक्राइन सिस्टम यानी हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों के कार्य को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। कई शोधों में यह पाया गया है कि योग महिलाओं में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम कर सकता है और इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बना सकता है, जो PCOS जैसी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।

अगर आप भी हार्मोनल असंतुलन, तनाव या पीसीओएस से जूझ रही हैं, तो कुछ आसान योगासन आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 7 प्रभावी योगासनों के बारे में जो महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

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भुजंगासन - फोटो : Amar ujala

भुजंगासन

इस आसन का अभ्यास पेट और पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाने में मदद करता है। यह अंडाशय और एड्रिनल ग्रंथियों को सक्रिय कर सकता है, जिससे हार्मोनल संतुलन बेहतर हो सकता है।


भुजंगासन के फायदे

  • PMOS के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

  • तनाव कम करने में सहायक है।

  • पीठ और रीढ़ को मजबूत बनाता है।

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सेतुबंधासन - फोटो : Istock

सेतुबंधासन

यह आसन थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करने के लिए जाना जाता है। थायरॉयड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


सेतुबंधासन के फायदे
 

  • थायरॉयड फंक्शन को सपोर्ट करता है।

  • तनाव और चिंता में राहत दिलाता है।

  • पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं में मदद करता है।

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बालासन - फोटो : pexel

बालासन 

जब शरीर और मन तनावग्रस्त होते हैं तो कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ सकता है। बालासन मानसिक शांति प्रदान करता है और तनाव को कम करने में मदद करता है।

बालासन के फायदे
 

  • कोर्टिसोल लेवल कम करने में सहायक है।

  • बेहतर नींद को बढ़ावा देता है।

  • मानसिक तनाव से राहत दिलाता है।

 

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सुप्त बद्ध कोणासन - फोटो : Instagram

सुप्त बद्ध कोणासन

यह एक रिलैक्सिंग योग मुद्रा है जो शरीर को गहरी विश्रांति देती है और तनाव हार्मोन को कम करने में मदद करती है।


सुप्त बद्ध कोणासन फायदे
 

  • PMOS वाली महिलाओं के लिए ये आसन उपयोगी है।

  • मानसिक शांति प्रदान करता है।

  • हार्मोनल हेल्थ को सपोर्ट करता है।

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बद्धकोणासन योग - फोटो : Adobe

बद्ध कोणासन
 

बद्ध कोणासन को बटरफ्लाई पोज कहा जाता है। यह आसन महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। यह पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ाता है।


बद्ध कोणासन के फायदे
 

  • पीरियड्स की अनियमितता में मदद

  • प्रजनन अंगों को मजबूत बनाता है

  • पेल्विक फ्लोर को सक्रिय करता है

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सर्वांगासन - फोटो : amar ujala

सर्वांगासन

सर्वांगासन को अक्सर "क्वीन ऑफ योगा पोज़" कहा जाता है। यह थायरॉयड और पैराथायरॉयड ग्रंथियों को प्रभावित कर सकता है।

फायदे:

  • हार्मोनल संतुलन को सपोर्ट

  • ऊर्जा बढ़ाने में मदद

  • मेटाबॉलिज्म को बेहतर बना सकता है

नोट: गर्दन की समस्या वाले लोग विशेषज्ञ की सलाह के बिना यह आसन न करें।

 

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कंधे का दर्द (मार्जरीआसन) - फोटो : Adobe Stock

मार्जरीआसन-बितिलासन 

इसे कैट काऊ पोज भी कहतेहैं। यह सरल योगासन रीढ़ की हड्डी और पेट के अंगों को सक्रिय करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा प्रवाह बेहतर हो सकता है।


मार्जरी आसन के फायदे

  • तनाव कम करता है।
  • रीढ़ की लचीलापन बढ़ाता है।
  • हार्मोनल सिस्टम को सपोर्ट करता है।
 

हार्मोनल हेल्थ के लिए योग करते समय रखें ये बातें

  • खाली पेट योग करें।

  • रोजाना कम से कम 20-30 मिनट अभ्यास करें।

  • योग के साथ संतुलित आहार लें।

  • पर्याप्त नींद और पानी का सेवन करें।

  • किसी गंभीर बीमारी में डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लें।

     

    नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

    अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


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