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आज का योग: वीरभद्रासन योग के अभ्यास से दूर होती हैं कई बीमारियों का जोखिम, जानिए इसके फायदे

Fri, 11 Mar 2022 12:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वीरभद्रासन योग करने के फायदे - फोटो : Pixabay
शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित योगासनों की आदत आपके लिए कई तरह से लाभकारी हो सकती है। वीरभद्रासन या वारियर पोज़ ऐसा ही एक योगासन है जिसका नियमित रूप से अगर अभ्यास किया जाए तो इससे शरीर को कई तरह से स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। शरीर की संपूर्ण शक्ति को बढ़ावा देने के साथ संतुलन को सुधारने में इस योग के अभ्यास की आदत आपके लिए काफी लाभदायक हो सकती है। शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह की सेहत को फिट रखने में इस योग को काफी कारगर माना जाता है।

इस आसन को विशेषज्ञ योग के सबसे बेहतरीन आसनों में से एक मानते हैं। इसका अभ्यास कठिन है और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। इसलिए किसी विशेषज्ञ से प्रशिक्षण के बाद ही इस अभ्यास को करने से लाभ मिलता है। शरीर के कई अंगों और मांसपेशियों की क्षमता को बढ़ाने और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने के लिए इस योगासन के अभ्यास की आदत आपके लिए मददगार हो सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में वीरभद्रासन योग करने से सेहत को होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानते हैं।
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वॉरियर पोज योगासन - फोटो : Pixabay
वीरभद्रासन योग कैसे किया जाता है?
योग विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी योगासन से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए उसका सही तरीके से अभ्यास किया जाना आवश्यक माना जाता है। वीरभद्रासन योग की कई मुद्राएं हैं, ऐसे में किसी विशेषज्ञ से बेहतर प्रशिक्षण के बाद ही इस अभ्यास की शुरुआत करें।
इस योग के लिए सबसे पहले सीधी मुद्रा में खड़े हो जाएं। अब अपनी बाहों को फर्श के समानांतर उठाते हुए  सिर को बाईं ओर मोड़ें। बाएं पैर को भी 90 डिग्री बाईं ओर मोड़ें। कुछ देर तक इस अवस्था में बने रहें। इसी तरह से दूसरी तरफ का भी अभ्यास करें।
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वीरभद्रासन योग के हैं कई फायदे - फोटो : Istock
वीरभद्रासन योग करने के क्या लाभ है?
योग विशेषज्ञों के मुताबिक वीरभद्रासन योग के नियमित अभ्यास की आदत आपको कई तरह के स्वास्थ्य लाभ दे सकती है। 
  • यह योग कंधे, हाथ, पैर, टखनों और पीठ को मजबूत करता है।
  • कूल्हों, छाती और फेफड़ों को खोलने में सहायक है।
  • शरीर के संतुलन, स्थिरता और मन की एकाग्रता में सुधार करता है।
  • रक्त परिसंचरण और श्वसन को बेहतर बनाए रखने में सहायक योग माना जाता है।
  • बाहों, पैरों, कंधों, गर्दन, पेट, कमर और टखनों की स्ट्रेचिंग और इन्हें मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
  • शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
  • पेट के अंगों को उत्तेजित करके पाचन की समस्या को ठीक रखने में सहायक है।

ध्यान रखने वाली बात
योग विशेषज्ञों के मुताबिक उच्च रक्तचाप वाले रोगियों या जिन लोगों को गर्दन की समस्या है, उन्हें इस योग के अभ्यास से पहले डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए। योग के सही आसनों के बारे में जानने के लिए किसी योग विशेषज्ञ से जरूर मिलें। 


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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 


 
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