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Yoga Tips: सूर्यनमस्कार के ये तीन योगासन 20 तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को कर सकते हैं दूर, जरूर करें दिनचर्या में शामिल

Sun, 03 Jul 2022 12:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सूर्य नमस्कार योग करने के लाभ - फोटो : Pixabay
सूर्यनमस्कार योग का अभ्यास वर्षों से कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता रहा है। सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योग मुद्राओं का एक संयोजित अभ्यास है। इसकी नियमित आदत बनाकर कार्डियोवस्कुलर स्वास्थ्य से लेकर शरीर और दिमाग को स्वस्थ और फिट बनाए रखने तक में मदद मिल सकती है। सुबह खाली पेट सूर्य नमस्कार का अभ्यास करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए विशेषज्ञ इस योग को 'अल्टीमेट आसन' के रूप में भी वर्गीकृत करते हैं।

सूर्य नमस्कार का अभ्यास आपकी पीठ के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत करता है साथ ही रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में भी इसके लाभ देखे गए हैं। 

योग विशेषज्ञ बताते हैं, नियमित रूप से सूर्यनमस्कार के योगासनों को दिनचर्या में शामिल करना कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित लाभ दे सकता है। इसके कुछ योगाभ्यास काफी कारगर और पसंदीदा रहे हैं, जिनके नियमित अभ्यास की आदत बनाकर कई प्रकार के लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं कि सभी लोगों को किन तीन आसनों को नियमित रूप से जरूर अभ्यास करने की आदत बनानी चाहिए?
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प्राणामासन योग करने के फायदे - फोटो : pixabay
प्राणामासन योग का अभ्यास

प्राणामासन योग, सूर्यनमस्कार आसन का सबसे आसान और प्रभावी अभ्यास माना जाता है। सीधे खड़े होकर किया जाने वाला यह योग मुद्रा शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह की सेहत को विशिष्ट लाभ दे सकता है।  प्राणामासन योग तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाने, पाचन में सुधार करने, शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाए रखने और मानसिक शांति को बढ़ावा देने के लिए काफी फायदेमंद अभ्यास है। सभी लोगों को इसे नियमित रूप से दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।
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माउंटेन पोज योग का अभ्यास - फोटो : istock
पर्वतासन योगासन

पर्वतासन या माउंटेन पोज योग का अभ्यास कलाई और पैरों को मजबूत करता है। यह सिर में रक्त के संचार को बढ़ावा देने के साथ हृदय और फेफड़ों की मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक है। इसके अलावा नियमित रूप से पर्वतासन का अभ्यास करने वाले लोगों को रीढ़ की हड्डी, कंधे, घुटने और टखने के दर्द से राहत मिल सकती है। इस योगासन को दिनचर्या में शामिल करना आपके लिए विशेष लाभप्रद हो सकता है। 
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कोबरा पोज के लाभ - फोटो : Istock
भुजंगासन का अभ्यास

भुजंगासन जिसे कोबरा पोज के रूप में भी जाना जाता है, यह सूर्यनमस्कार के सबसे प्रभावी आसनों में से एक है। भुजंगासन का अभ्यास रीढ़ को मजबूत करके छाती और फेफड़ों, कंधों और पेट की बेहतर स्ट्रेचिंग करने में सहायक है। अक्सर तनाव और थकान से परेशान रहने वाले लोगों के लिए भी इसका अभ्यास मदद करता है। साइटिका और अस्थमा के लक्षणों को कम करने में भी इस योग को काफी कारगर बताया गया है। 


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नोट:
यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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