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Pranayama For Mental Health: प्राणायाम से मानसिक ऊर्जा कैसे बढ़ाएं? रोज करें ये आसान सांसों के अभ्यास

Sat, 05 Sep 2026 05:33 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mental Health Breathing Exercises : प्राणायाम के दौरान सांस को नियंत्रित करने और उस पर ध्यान केंद्रित करने से मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और धीमी डायाफ्रामिक ब्रीदिंग जैसे आसान अभ्यासों को नियमित वेलनेस रूटीन में शामिल किया जा सकता है। अभ्यास हमेशा आराम से और अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
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मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए प्राणायाम - फोटो : AI

Breathing Exercises Kaise Kare :आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लगातार काम, स्क्रीन टाइम, नींद की कमी और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के कारण दिमाग अक्सर थका हुआ महसूस कर सकता है। ऐसे में बहुत से लोग खुद को तरोताजा और मानसिक रूप से सक्रिय रखने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। योग और प्राणायाम इसी दिशा में एक सरल अभ्यास माना जाता है। नियंत्रित तरीके से सांस लेने और छोड़ने की तकनीकों पर आधारित प्राणायाम को योग परंपरा में मन और शरीर के बीच संतुलन बनाने वाला अभ्यास माना जाता है।

नियमित रूप से किया गया उपयुक्त प्राणायाम व्यक्ति को शांत महसूस करने, ध्यान लगाने और तनाव से निपटने में मदद कर सकता है। खासतौर पर जब इसे आरामदायक वातावरण में सही तरीके और अपनी क्षमता के अनुसार किया जाए, तो यह दिन की शुरुआत के लिए एक उपयोगी वेलनेस रूटीन बन सकता है।

हालांकि, प्राणायाम को किसी बीमारी का इलाज या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या का विकल्प नहीं समझना चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए नए या कठिन श्वसन अभ्यास शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

अगर आप भी दिनभर मानसिक थकान महसूस करते हैं, तो कुछ आसान प्राणायाम तकनीकों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।

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अनुलोम विलोम प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala

अनुलोम-विलोम से शुरू करें

  • अनुलोम-विलोम को शुरुआती लोगों के लिए अपेक्षाकृत आसान श्वसन अभ्यास माना जाता है।
  • इसमें एक नासिका से सांस लेकर दूसरी नासिका से सांस छोड़ने का क्रम अपनाया जाता है।
  • इसे शांत वातावरण में आराम से बैठकर किया जा सकता है।
  • शुरुआत में सांस को रोकने के बजाय सामान्य गति से सांस लेने और छोड़ने पर ध्यान दें।
  • नियमित अभ्यास से आपको सांस पर ध्यान केंद्रित करने और कुछ समय के लिए मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है।
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भ्रामरी प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala

भ्रामरी प्राणायाम से मन को दें शांत माहौल

  • भ्रामरी में सांस छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी धीमी गूंज पैदा की जाती है।
  • यह अभ्यास शांत वातावरण में किया जाता है।
  • इसमें पूरा ध्यान सांस तथा आवाज पर केंद्रित रहता है।
  • इसे सुबह या दिन के किसी शांत समय में किया जा सकता है।
  • अभ्यास के दौरान शरीर को रिलैक्स रखें और सांस को जबरदस्ती रोकने या खींचने से बचें।
  • अगर आपको कान, सांस या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो इसे शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

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मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए प्राणायाम - फोटो : AI

डायाफ्रामिक ब्रीदिंग को बनाएं रूटीन का हिस्सा

  • मानसिक रूप से थकान महसूस होने पर कुछ मिनट धीमी और गहरी सांस लेने की आदत उपयोगी हो सकती है।
  • डायाफ्रामिक ब्रीदिंग में सांस लेते समय पेट का हिस्सा हल्का ऊपर उठता है और सांस छोड़ते समय नीचे आता है।
  • इसका उद्देश्य सांस को सहज और नियंत्रित बनाना है, न कि बहुत ज्यादा गहरी सांस लेना।
  • वर्क ब्रेक के दौरान कुछ मिनट शांत बैठकर इस तरह की ब्रीदिंग का अभ्यास किया जा सकता है।
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कपालभाति प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala

कपालभाति करते समय रखें खास सावधानी

  • कपालभाति योग का लोकप्रिय श्वसन अभ्यास है, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त मानना सही नहीं होगा।
  • इसमें सांस छोड़ने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सक्रिय होती है।
  • अगर आप इसे करना चाहते हैं, तो किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सही तकनीक सीखना बेहतर है।
  • शुरुआती लोग तेज गति या लंबे समय तक अभ्यास करने की कोशिश न करें।
  • गर्भावस्था, उच्च रक्तचाप, हृदय या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की स्थिति में ऐसे अभ्यास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना विशेष रूप से जरूरी है।
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मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए प्राणायाम - फोटो : AI

प्राणायाम के साथ बनाएं 'मेंटल एनर्जी' रूटीन

  • केवल कुछ मिनट प्राणायाम करने के बजाय पूरे दिन की आदतों पर भी ध्यान दें।
  • पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी और स्क्रीन से समय-समय पर ब्रेक लेना मानसिक ऊर्जा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • आप सुबह एक छोटा रूटीन बना सकते हैं, कुछ मिनट शांत बैठना, सहज श्वसन अभ्यास करना और इसके बाद हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक करना।
  • सबसे जरूरी बात यह है कि प्राणायाम को प्रतिस्पर्धा न बनाएं।
  • सांस को जबरदस्ती रोकना, बहुत तेज सांस लेना या चक्कर आने के बावजूद अभ्यास जारी रखना सही नहीं है।


प्राणायाम करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • शुरुआत आसान अभ्यास से करें।

  • सांस को जबरदस्ती न रोकें।

  • खाली या हल्के पेट अभ्यास करना सुविधाजनक हो सकता है।

  • चक्कर, घबराहट या असहजता महसूस हो तो तुरंत रुकें।

  • सही तकनीक सीखने के लिए प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की मदद लें।

  • किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें।

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