पवनमुक्त आसन लेट कर किया जाने वाला आसन है। खाली पेट अथवा भोजन से 3-4 घंटे बाद पवनमुक्तासन का अभ्यास करना उचित रहता है।
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पवन मुक्त आसन से गैस्ट्रिक की समस्या के साथ पेट की बढ़ी हुई चर्बी को भी कम करने के लिए बहुत ही लाभप्रद है।
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pawan mukt
ऐसे करें पवनमुक्तासन
जमीन पर चटाई अथवा दरी बिछाकर सीधा लेट जाएं।
दाएं पैर को मोड़कर छाती से लगाएं।
इसके बाद दोनों हाथों की उंगलियों को घुटने के नीचे आपस में मिलकार पकड़े।
सांस छोड़ते हुए सिर को ऊपर उठाएं और नाक से घुटने का स्पर्श करें। एक से दो मिनट इसी अवस्था में रहें।
तीन से चार बार इस क्रिया को दोहराएं।
इसके बाद बाएं पैर से इसी प्रकार आसन का अभ्यास करें। दोनों पैरों से अलग अलग अभ्यास करने के बाद दोनों पैरों से एक साथ इस क्रिया को दोहराएं।
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पवनमुक्तासन के लाभ
इस आसन के अभ्यास से वायु विकार, अपच, गठिया, कमर दर्द और मोटापा दूर होता है। इस आसन का अभ्यास भोजन करने के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए।
सावधानी
कंधों में दर्द तथा पैर मोड़ने में तकलीफ होने पर आसन का अभ्यास नही करें।
हार्निया के मरीजों को योग विशेषज्ञ की देख रेख में पवनमुक्तासन का अभ्यास करना चाहिए।
कमर में दर्द तथा स्लिपडिस्क की शिकायत होने पर सिर उठाकर घुटने से नाक न लगाएं। केवल पैरों को दबाकर छाती से स्पर्श करें।