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Yoga Tips: पॉश्चर से लेकर बेहतर पाचन तक के लिए लाभकारी है मत्स्यासन योग का अभ्यास, जानिए इसके तरीके और फायदे

Sat, 22 Oct 2022 11:57 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मत्स्यासन योग के नियमित अभ्यास की बनाएं आदत - फोटो : istock
शरीर की कई तरह की समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी उम्र के लोगों को नियमित रूप से योगासनों के अभ्यास की सलाह देते हैं। योग, मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूती देने के साथ अंगों की कार्यक्षमता को बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में आपके लिए विशेष लाभकारी हो सकते हैं। शरीर के पॉश्चर से लेकर पाचन तक के लिए विशेषज्ञ नियमित रूप से मत्स्यासन योग के अभ्यास को काफी कारगर मानते हैं। मत्स्यासन योग को फिश पोज के रूप में भी जाना जाता है, जिसके नियमित अभ्यास की आदत बनाकर शरीर को कई प्रकार के लाभ मिल सकते हैं।

योग विशेषज्ञ बताते हैं, मत्स्यासन योग का अभ्यास आसानी से किया जा सकता है। शरीर की बेहतर स्ट्रेचिंग के साथ रक्त के परिसंचरण को ठीक रखने में इसके लाभ देखे गए हैं। शरीर के पॉश्चर में गड़बड़ी के कारण पीठ और कमर में दर्द की समस्या हो सकती है, इस प्रकार के विकारों के जोखिम को कम करने में भी इस योग के अभ्यास से लाभ पाए जा सकते हैं। आइए मत्स्यासन योग के तरीके और इससे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।
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फिश पोज योग का तरीका - फोटो : Istock
मत्स्यासन योग कैसे किया जाता है?

योग विशेषज्ञ कहते हैं किसी भी योगासन से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए उसका सही तरीके से अभ्यास किया जाना आवश्यक माना जाता है।  मत्स्यासन योग का अभ्यास अपेक्षाकृत आसान है हालांकि इसके लिए विशेषज्ञों की निगरानी आवश्यक होती है।

इस योग का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं। पैरों को पद्मासन की मुद्रा में लेकर आएं। जांघें और घुटने फर्श पर रखते हुए सांस खींचते हुए सीने को ऊपर की तरफ उठाएं। सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर ही रखें। कुछ समय तक इस स्थिति में बने रहें और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पूर्ववत स्थिति में आ जाएं। 
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मत्स्यासन योग का अभ्यास मांसपेशियों और हड्डियों के लिए फायदेमंद है। - फोटो : Pixabay
मत्स्यासन योग करने के क्या लाभ हैं?

मत्स्यासन योग शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए कई प्रकार से लाभकारी हो सकता है। मत्स्यासन योग का अभ्यास मांसपेशियों की ताकत, हड्डियों की सहनशक्ति, पाचन क्रिया, शारीरिक मुद्रा, मासिक धर्म के दर्द और जटिलताओं में सुधार करने में मददगार माना जाता है। इस योग के अभ्यास की आदत पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने और रीढ़ के लचीलेपन में सुधार करने में भी मददगार हो सकता है। सभी उम्र के लोगों को रोजाना इस योगाभ्यास की आदत बनानी चाहिए।
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चोट की स्थिति में न करें मत्स्यासन का अभ्यास - फोटो : istock
ये सावधानियां भी जरूरी

जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है, जिन्हें स्पॉन्डिलाइटिस या माइग्रेन की दिक्कत बनी रहती है, उन्हें इस योग का अभ्यास न करने की सलाह दी जाती है। हृदय संबंधी बीमारियों के शिकार और गर्भवती महिलाओं को भी मत्स्यासन करने से बचना चाहिए। किसी भी योग का अभ्यास विशेषज्ञों की निगरानी में ही करें इससे चोट के जोखिम को कम करते हुए अधिकतम लाभ प्राप्त करने में मदद मिलती है। 



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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