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Yoga Day 2026: बढ़ती उम्र में नहीं होगी कमजोरी! योग दिवस 2026 की थीम के अनुसार करें ये आसान योगासन

Tue, 16 Jun 2026 09:59 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

International Yoga Day 2026 Theme: योग दिवस 2026 की थीम 'Yoga for Healthy Ageing' है। इस थीम का उद्देश्य बढ़ती उम्र में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन और शवासन जैसे योगासन संतुलन, लचीलापन और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।
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योग दिवस की थीम - फोटो : AI

Yoga Day 2026: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को हर साल मनाया जाता है। इस वर्ष योग दिवस 2026 की थीम Yoga for Healthy Ageing यानी स्वस्थ आयु के लिए योग रखी गई है। यह थीम दुनिया भर में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और स्वस्थ जीवनशैली की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चुनी गई है। उम्र बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर या मानसिक रूप से निष्क्रिय हो जाए। नियमित योग अभ्यास बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम करने, शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, योग न केवल मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। योगासन शरीर में रक्त संचार सुधारते हैं, संतुलन बनाए रखते हैं और गिरने के जोखिम को कम करते हैं। यही कारण है कि योग को स्वस्थ वृद्धावस्था का सबसे सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है।

योग दिवस 2026 की थीम लोगों को यह संदेश देती है कि उम्र चाहे कोई भी हो, नियमित योग के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर और मन को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रख सकता है। आइए जानते हैं ऐसे योगासनों के बारे में जो इस थीम को सबसे बेहतर तरीके से दर्शाते हैं।

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ताड़ासन - फोटो : Amar ujala
ताड़ासन
  • ताड़ासन शरीर को स्थिरता और संतुलन देता है।
  • ताड़ासन सबसे सरल लेकिन प्रभावी योगासन माना जाता है।
  • इस आसन से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
  • शरीर का पोश्चर सुधरता है और संतुलन बेहतर होता है।
  • बढ़ती उम्र में गिरने के जोखिम को कम करने के लिए यह योगासन बेहद लाभकारी माना जाता है।


कैसे करें अभ्यास?
  • इसे करने के लिए सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को ऊपर उठाएं।
  • पंजों पर संतुलन बनाएं।
  • कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में रहें और सामान्य श्वास लेते रहें।
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वृक्षासन - फोटो : istock
वृक्षासन
  • यह एकाग्रता और संतुलन बढ़ाने वाला योग है।
  • नियमित अभ्यास से तंत्रिका तंत्र बेहतर काम करता है।
  • मानसिक एकाग्रता बढ़ती है।
  • शरीर की स्थिरता मजबूत होती है।
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह बेहद उपयोगी योगासन है।

कैसे करें अभ्यास?
  • वृक्षासन में एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को जांघ पर रखा जाता है।
  • दोनों हाथ नमस्कार मुद्रा में ऊपर जोड़े जाते हैं।
  • यह आसन शरीर और मन दोनों के संतुलन को मजबूत करता है।

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भुजंगासन - फोटो : Amar Ujala
भुजंगासन
  • भुजंगान रीढ़ और कमर को मजबूत बनाता है।
  • यह योगासन रीढ़ की लचक बढ़ाता है।
  • कमर दर्द को कम करता है।
  • फेफड़ों की क्षमता सुधारने में मदद करता है।
  • बढ़ती उम्र में पीठ की समस्याओं से बचाव के लिए यह महत्वपूर्ण आसन है।


कैसे करें अभ्यास?
  • पेट के बल लेटकर हथेलियों के सहारे शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाना भुजंगासन कहलाता है।
  • इस दौरान कंधे पीछे की ओर रहें और गर्दन सीधी रखें।
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Vajrasana - फोटो : pexel
वज्रासन
  • पाचन और मानसिक शांति का सरल उपाय है।
  • वज्रासन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
  • गैस और अपच की समस्या को कम करता है।
  • मानसिक तनाव घटाने में सहायता करता है।
  • वरिष्ठ आयु वर्ग के लोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।

कैसे करें?
  • भोजन के बाद घुटनों के बल बैठकर एड़ियों पर बैठना वज्रासन कहलाता है।
  • यह एकमात्र ऐसा योगासन है जिसे खाने के बाद भी किया जा सकता है।
     
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शवासन - फोटो : इंस्टाग्राम
शवासन 
  • शवासन तनावमुक्त और स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
  • स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।
  • यह योगासन मानसिक तनाव कम करता है।
  • नींद की गुणवत्ता सुधारता है।
  • शरीर को गहरी शांति और आराम प्रदान करता है।

कैसे करें अभ्यास?
  • शवासन में पीठ के बल लेटकर पूरे शरीर को ढीला छोड़ दिया जाता है।
  • आंखें बंद करके केवल श्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
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नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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