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International Yoga Day 2025: 30 के बाद हर महिला और पुरुष को शुरू कर देना चाहिए इन योगासनों का अभ्यास

Sat, 14 Jun 2025 11:55 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

International Yoga Day 2025: यहां कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बताया जा रहा है जो 30 की आयु के बाद महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए बेहद लाभदायक हैं।
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महिला और पुरुष के लिए योग - फोटो : Adobe
International Yoga Day 2025: हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है। 30 की उम्र पार करने के बाद शरीर और मन दोनों में कई बदलाव आने लगते हैं, जैसे मेटाबॉलिज्म धीमा होना, जोड़ों में जकड़न, हार्मोनल असंतुलन, स्ट्रेस और वजन बढ़ना। ऐसे में रोजाना सिर्फ 20–30 मिनट का योग अभ्यास न केवल शारीरिक फिटनेस बल्कि मानसिक संतुलन को बनाए रखता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए योग लाभदायक है। 

30 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को हार्मोन संतुलन बिगड़ने लगता है, जिसे योग स्वाभाविक रूप से संतुलित करता है। वहीं योगासनों से पीरियड्स की अनियमितता, पीसीओडी और मेनोपॉज से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। 

अगर पुरुषों के लिए योग के फायदों की बात की जाए तो कुछ आसन पुरुषों में मांसपेशियों की सख्ती, पेट की चर्बी और तनाव को नियंत्रित करने में अत्यंत सहायक होते हैं। साथ ही पुरुष द्वारा योगाभ्यास से ध्यान के साथ करने से मानसिक एकाग्रता और फोकस बढ़ता है।यहां कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बताया जा रहा है जो 30 की आयु के बाद महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए बेहद लाभदायक हैं।
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ताड़ासन - फोटो : istock
ताड़ासन

ताड़ासन को अंग्रेजी में Mountain Pose कहते हैं। इस आसन का अभ्यास प्रतिदिन 30 सेकंड से एक मिनट तक किया जा सकता है। इसके लिए सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को ऊपर उठाएं। शरीर का भार पंजों पर उठाएं और लंबी सांस लें। ताड़ासन रीढ़ की हड्डी को सीधा रखता है। पोस्चर में सुधार के साथ संतुलन विकसित करता है। यह आसन महिला और पुरुष दोनों के स्वास्थ्य के लिए असरदार है।
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भुजंगासन - फोटो : Freepik
भुजंगासन

भुजंगासन को सर्पासन भी कहते हैं। इस आसन के अभ्यास से पीठ के निचले हिस्से को मजबूती मिलती है और रीढ़ को लचीला आता है। महिलाओं के लिए यह आसन हार्मोन बैलेंस में मददगार है। इस आसन में शरीर की मुद्रा सांप जैसी हो जाती है। इस आसन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर हाथों के सहारे शरीर को ऊपर उठाएं।

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वज्रासन  - फोटो : pexel
वज्रासन 

वज्रासन के नियमित अभ्यास से पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। इस आसन को करने से पाचन में सुधार होता है। तनाव कम होता और घुटनों व एड़ियों में मजबूती आती है। रोजाना पांच से 10 मिनट वज्रासन की मुद्रा में बैठ सकते हैं। खाने के बाद इस आसन का अभ्यास करना लाभकारी हो सकता है।
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सेतुबंधासन - फोटो : adobe
सेतुबंधासन

सेतुबंधासन के अभ्यास के दौरान शरीर की मुद्रा एक पुल की तरह होती है। इसमें पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़े और कमर को ऊपर उठाएं। इस आसन के अभ्यास से हार्मोनल संतुलन, थायरॉइड ग्रंथि सक्रिय और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती है। महिलाएं सेतुबंधासन का नियमित अभ्यास करके पीसीओएस और पीसीओडी की समस्या से दूर रह सकती हैं। सेतुबंधासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और कमर को ऊपर उठाएं।
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अर्ध मत्स्येन्द्रासन - फोटो : Freepik
अर्ध मत्स्येन्द्रासन 

कमर दर्द में राहत, पाचन में सुधार और रीढ़ की नसों को शक्ति देने के लिए अर्ध मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास फायदेमंद हो सकता है। पुरुषों में प्रोस्टेट स्वास्थ्य के लिए यह आसन लाभकारी माना जाता है। इसके अभ्यास के लिए बैठकर पैरों को मोड़ते हुए रीढ़ को ट्विस्ट करें और सांस पर ध्यान दें।

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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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