Benefits Of Pranayama And Types: हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है, जो योग के महत्व और उसके स्वास्थ्य लाभों को दुनिया तक पहुंचाने का एक प्रयास है। योग शरीर और मन दोनों को प्राकृतिक रूप से लंबे समय तक स्वस्थ रखने का एक आसान तरीका है। इसमें मुद्राएं और आसन होते हैं जो कि शरीर को अंदर से बाहर तक प्रभावित करती हैं। योग का एक अहम हिस्सा प्राणायाम है। प्राणायाम श्वास नियंत्रण की विद्या है। प्राणााम पूरी तरह से सांस पर आधारित होता है जो न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। कई प्रकार के प्राणायाम होते हैं। योग दिवस के मौके पर प्राणायाम के प्रकार और हर एक के फायदों के बारे में जानिए।
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अनुलोम विलोम प्राणायाम
- फोटो : Amar Ujala
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
यह प्राणायाम नासिकाओं के माध्यम से श्वास लेने और छोड़ने की प्रक्रिया है, जो मानसिक संतुलन और शांति प्रदान करती है। अनुलोम विलोम प्राणायाम के अभ्यास से मानसिक तनाव और चिंता में राहत मिलती है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
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कपालभाति प्राणायाम
- फोटो : Amar Ujala
कपालभाति प्राणायाम
इसमें तेजी से श्वास को बाहर निकालते हैं और पेट की मांसपेशियों को संकुचित करते हैं। यह शुद्धि और ऊर्जा को बढ़ावा देने वाला प्राणायाम है। कपालभाति का अभ्यास शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है। इसके नियमित अभ्यास से मोटापा और चर्बी कम करने में मदद मिलती है।
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भस्त्रिका प्राणायाम
- फोटो : Amar Ujala
भस्त्रिका प्राणायाम
इसमें तेजी से और गहराई से श्वास लेना और छोड़ना शामिल है। यह फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है। शरीर को ऊर्जावान और स्फूर्ति देता है। साथ ही थकान और मानसिक सुस्ती दूर करता है।
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भ्रामरी प्राणायाम
- फोटो : Amar Ujala
भ्रामरी प्राणायाम
इसमें श्वास छोड़ते समय भौंरे की गूंज जैसी ध्वनि निकालनी होती है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है
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उज्जायी प्राणायाम
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उज्जायी प्राणायाम
इसमें गले से एक हल्की सी घुरघुराहट की आवाज निकालते हुए श्वास लेना और छोड़ना होता है। यह शांति और ध्यान में सहायक होता है।
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शीतली प्राणायाम
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शीतली प्राणायाम
इसमें जीभ को मोड़कर श्वास लेना और नाक से श्वास छोड़ना होता है। यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और गर्मी के मौसम में लाभकारी होता है। यह श्वसन प्रणाली को शुद्ध करता है और मानसिक एकाग्रता व धैर्य को बढ़ाता है। प्यास और अधिक गर्मी से राहत देता है और गुस्से व हाई बीपी को शांत करता है।
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शीतकारी प्राणायाम
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शीतकारी प्राणायाम
इसमें दाँतों के बीच से श्वास लेना और नाक से श्वास छोड़ना होता है। यह भी शीतली प्राणायाम की तरह ठंडक प्रदान करता है।
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नाड़ी शोधन प्राणायाम
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नाड़ी शोधन प्राणायाम
यह प्राणायाम नाड़ियों की शुद्धि के लिए किया जाता है और इसमें अनुलोम-विलोम जैसी तकनीक होती है, लेकिन यह ज्यादा ध्यान और शांति प्रदान करने वाला होता है।
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सूर्य भेदी प्राणायाम
- फोटो : Amar Ujala
सूर्य भेदी प्राणायाम
इसमें केवल दाईं नासिका से श्वास लेना और बाईं नासिका से छोड़ना होता है। यह शरीर को गर्मी और ऊर्जा प्रदान करता है।
इसमें केवल बाईं नासिका से श्वास लेना और दाईं नासिका से छोड़ना होता है। यह शरीर को ठंडक और शांति प्रदान करता है। शरीर की ऊर्जा का संतुलन बनाए रखता है। इम्यून सिस्टम मजबूत करता है और ध्यान और मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है।
------------------- नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।