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International Yoga Day 2024: गर्भावस्था में कब और कौन से योग करने चाहिए? योगाचार्य से जानें

सार

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस लेख के माध्यम से जानिए कि गर्भावस्था में योग का महत्व और सही समय क्या है? जानिए गर्भवती को कौन से योगासन करने चाहिए और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए
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pregnant woman - फोटो : FreePik
International Yoga Day 2024 : बेहतर महिला स्वास्थ्य के लिए सबसे प्रभावी तरीकों में से एक योगासन है। नियमित योग का अभ्यास महिलाओं को होने वाली कई शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना को कम कर सकती हैं। गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दौर होता है। इस स्थिति में योग बेहद प्रभावी हो सकता है। गर्भवती योगाभ्यास से प्रसव के दौरान होने वाली परेशानियों से बच सकती है। 

गर्भावस्था के दौरान योग का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी माताओं के लिए लाभकारी होता है। योग से गर्भवती महिलाओं की शारीरिक तंदुरुस्ती बनी रहती है। गर्भावस्था में होने वाले पीठ व अन्य शारीरिक दर्द को कम किया जा सकता है। गर्भावस्था में योग एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने का। विशेषज्ञों की सलाह और आवश्यक सावधानियों के साथ, यह मातृत्व के सफर को सुखद और तनावमुक्त बना सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अमर उजाला ने योगाचार्य राहुल यदुवंशी से खास बातचीत की। उन्होंने गर्भावस्था में योग के महत्व और गर्भवती के लिए योगाभ्यास के सही समय के बारे में बताया। साथ ही गर्भवती के लिए कौन से योगासन बेहद फायदेमंद हैं और किन योगासनों को करने से बचना चाहिए, इस बारे में विस्तृत जानकारी दी।

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गर्भावस्था - फोटो : istock

गर्भावस्था में योग का महत्व 

शारीरिक तंदुरुस्ती: योगासन और प्राणायाम करने से शरीर का लचीलापन बढ़ता है। रक्त परिसंचरण सुधरता है, और मांसपेशियों में ताकत आती है। इससे प्रसव के समय कठिनाइयाँ कम होती हैं।

मानसिक शांति: योग ध्यान और श्वास-प्रश्वास तकनीकों से मानसिक तनाव कम होता है, जिससे गर्भवती महिलाओं को मानसिक शांति मिलती है। यह उन्हें प्रसव के लिए मानसिक रूप से तैयार करता है।

स्वास्थ्य समस्याओं का निवारण: गर्भावस्था में अक्सर पीठ दर्द, कब्ज, नींद न आने जैसी समस्याएं होती हैं। योग से इन समस्याओं का निदान होता है।

प्रसव के समय मदद: नियमित योगाभ्यास से प्रसव के समय दर्द और अन्य कठिनाइयाँ कम होती हैं।

पिछले 10 वर्षों से योग के क्षेत्र में कार्यरत योगाचार्य राहुल यदुवंशी कहते हैं, आज की लाइफस्टाइल के मुताबिक तो हर किसी को योग करना चाहिए, लेकिन गर्भवती महिलाओं के योग करने को लेकर बहुत सारे लोगों के मन में कई भ्रांतियां रहती हैं।हालांकि इस अवस्था के लिए अलग-अलग आसन और प्राणायाम होते हैं, जो गर्भवती के लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं। गर्भवस्था में महिलाओं के लिए ध्यान और प्राणायाम पर अधिक फोकस किया जाता है। कुछ आसन भी हैं जो गर्भावस्था में किए जा सकते हैं।

 

 

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शवासन - फोटो : Istock
गर्भवती महिलाओं के लिए योगासन

योगाचार्य राहुल बताते हैं कि गर्भावस्था में बहुत अधिक फारवर्ड बेडिंग नहीं करनी चाहिए। गर्भवती स्टेंडिंग पोस्चर वाले योग कर सकती हैं, जैसे ताड़ासन, व्रजासन कर सकते हैं। इसके बाद सिटिंग पोस्चर यानी बैठकर किए जाने वाले आसन आते हैं, जिसमें सुखासन और शवासन कर सकती हैं। गर्भवती के लिए मलासन और बद्ध कोणासन योग सबसे लाभकारी होते हैं।

वृक्षासन (Tree Pose)

यह आसन संतुलन और स्थिरता को बढ़ावा देता है और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है।

वज्रासन (Thunderbolt Pose)

यह आसन पाचन में सुधार करता है और रीढ़ को सीधा रखता है।

बद्ध कोणासन (Bound Angle Pose)

यह आसन कूल्हों और जांघों की लचीलेपन को बढ़ाता है, जिससे प्रसव के समय मदद मिलती है।

मार्जरी आसन (Cat-Cow Pose)

यह आसन रीढ़ की हड्डी की लचीलापन को बढ़ाता है और पीठ दर्द को कम करता है।

शवासन (Corpse Pose)

यह आसन गहरे विश्राम के लिए किया जाता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

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नाड़ी शोधन - फोटो : Yoga Expert Rahul Yaduvanshi
प्राणायाम

योगाचार्य गर्भवती के स्वास्थ्य के लिए प्राणायाम को बेहतर मानते हुए सलाह देते हैं कि नाड़ी शोधन प्राणायाम के पांच-पांच सेट गर्भवती कर सकती हैं। इसके अलावा भ्रामरी प्राणायाम भी किया जा सकता है। योग और प्राणायाम के अलावा ध्यान का अभ्यास भी गर्भवती के लिए प्रभावी हो सकता है। 5 से 10 मिनट रोजाना ध्यान लगा सकते हैं।

अनुलोम-विलोम

यह श्वास-प्रश्वास प्रक्रिया तनाव को कम करने में मदद करती है और मानसिक शांति प्रदान करती है।

भ्रामरी प्राणायाम

यह प्राणायाम मस्तिष्क को शांत करता है और मानसिक तनाव को कम करता है।

गर्भवती के योगाभ्यास के लिए सही अवधि 

योग विशेषज्ञ-राहुल यदुवंशी के अनुसार, विशेषज्ञ की देखरेख और सलाह के साथ गर्भावस्था के नौ महीने तक योग किया जा सकता है। हालांकि गर्भवती महिलाओं को शुरुआती तीन महीनों में अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे में तीसरे महीने (दूसरे तिमाही) से योगासन शुरू कर सतकते हैं। यह समय सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि पहले तिमाही में गर्भपात का खतरा अधिक होता है।
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शलभासन - फोटो : istock
गर्भावस्था में योग के दौरान सावधानियां

प्रारंभिक परामर्श

किसी भी योगाभ्यास को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से परामर्श करें।

पेट के बल लेटवे वाले योग न करें 

ऐसे योगासनों के अभ्यास से बचना चाहिए, जिन्हें पेट के बल लेटकर दिया जाता है। साथ ही आगे की ओर झुककर किए जाने वाले योगासन भी गर्भावस्था में नहीं करने चाहिए।

गर्मी से बचें

अत्यधिक गर्म वातावरण में योगाभ्यास न करें। हवादार और ठंडे स्थान का चयन करें।

तरल पदार्थों का सेवन

योगाभ्यास से पहले और बाद में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।


योग केवल योग दिवस तक सीमित न रहे

योगाचार्य राहुल यदुवंशी ने लोगों को योग के लिए प्रेरित करते हुए संदेश देते हुए कहा, इस बार आयुष मंत्रालय भारत सरकार का थीम है, योगा फाॅर सेल्फ एंड सोसायटी, यानी खुद के लिए योग जितना आवश्यक है, उतना ही हमारे समाज के लिए जरूरी है। स्वस्थ भारत होगा तब ही विकसित भारत होगा। इसलिए योग केवल योग दिवस तक ही सीमित न रहे, बल्कि इसे अपने जीवन में उतारें। योग को अपनी दिनचर्या बनाएं। पहले खुद योग करें, फिर अपने परिवार से योगाभ्यास कराएं और फिर समाज को योग के लिए प्रोत्साहित करें।

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नोट: यह लेख 10 वर्षों से योग के क्षेत्र में कार्यरत योगाचार्य राहुल यदुवंशी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। राहुल आयुष मंत्रालय में कार्यरत है, साथ ही फैकल्टी आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन से जुड़े हुए हैं। किसी भी आसन का अभ्यास विशेषज्ञ की सलाह और योग गुरु की निगरानी में ही करें। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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