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योग टिप्स: प्राणायाम करते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 7 गलतियां? जानें सही तरीका

Sat, 03 Oct 2026 09:59 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How To Do Pranayama: कई बार लोग जल्दी-जल्दी सांस लेते हैं, जरूरत से ज्यादा देर तक सांस रोकते हैं या शुरुआत में ही कठिन प्राणायाम करने की कोशिश करते हैं। ऐसी गलतियां अभ्यास को असहज बना सकती हैं। खासकर नए लोगों के लिए प्राणायाम को धीरे-धीरे और सहज तरीके से शुरू करना बेहतर होता है।
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प्राणायाम की गलतियां - फोटो : AI

Pranayama Mistakes: प्राणायाम को योग और वेलनेस रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कई लोग सुबह उठकर या एक्सरसाइज के बाद कुछ मिनट प्राणायाम करते हैं, लेकिन सिर्फ सांस लेने और छोड़ने से ही सही प्राणायाम नहीं हो जाता। सांस लेने का तरीका, गति, शरीर की स्थिति और अपनी क्षमता का ध्यान रखना भी जरूरी है।

कई बार लोग जल्दी-जल्दी सांस लेते हैं, जरूरत से ज्यादा देर तक सांस रोकते हैं या शुरुआत में ही कठिन प्राणायाम करने की कोशिश करते हैं। ऐसी गलतियां अभ्यास को असहज बना सकती हैं। खासकर नए लोगों के लिए प्राणायाम को धीरे-धीरे और सहज तरीके से शुरू करना बेहतर होता है।

प्राणायाम का अभ्यास करते समय शरीर के संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर सांस लेने में परेशानी, चक्कर, घबराहट या असहजता महसूस हो, तो अभ्यास रोककर सामान्य सांस लेने पर लौटना चाहिए।

इस लेख में जानिए प्राणायाम करते समय होने वाली 7 आम गलतियां, जिन्हें पहचानकर आप अपने अभ्यास को ज्यादा सहज और सुरक्षित बना सकते हैं। साथ ही समझेंगे कि शुरुआती लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कब किसी योग्य योग प्रशिक्षक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
 

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प्राणायाम और योग - फोटो : AI

प्राणायाम करते समय होने वाली 7 आम गलतियां


शुरुआत में ही बहुत तेज सांस लेना

प्राणायाम का मतलब हमेशा तेज गति से सांस लेना नहीं होता। कुछ तकनीकों में सांस की गति विशेष होती है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए एक जैसी गति सही नहीं हो सकती।

शुरुआत में सांस को सहज रखें और किसी भी अभ्यास की गति धीरे-धीरे बढ़ाएं। अगर तेज सांस लेने पर चक्कर या बेच अपनी क्षमता से अधिक सांस रोकने की कोशिश न करें। सांस रोकने में असहजता और बैचेनी महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं।

सामान्य श्वसन अभ्यासों में नाक से सांस लेने पर जोर दिया जाता है, लेकिन अलग-अलग प्राणायाम तकनीकों के नियम अलग हो सकते है। याद रखें कि प्राणायाम में जल्दबाजी से ज्यादा जरूरी सही तकनीक और सहजता है।

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सांस लेने का सही तरीका - फोटो : Adobe

जरूरत से ज्यादा देर तक सांस रोकना

कुछ प्राणायाम तकनीकों में सांस रोकने का अभ्यास किया जाता है, जिसे कुंभक कहा जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शुरुआत से ही लंबे समय तक सांस रोकने की कोशिश की जाए।

शुरुआती लोग अपनी क्षमता से अधिक सांस रोकने की कोशिश न करें। सांस रोकने में असहजता, चक्कर या घबराहट महसूस हो तो अभ्यास रोक दें। खास स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों को सांस रोकने वाले अभ्यास से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

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प्राणायाम - फोटो : इंस्टाग्राम

शरीर को जरूरत से ज्यादा तनाव में रखना

प्राणायाम करते समय केवल सांस पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शरीर की स्थिति भी सहज होनी चाहिए। कंधों को जरूरत से ज्यादा ऊपर उठाना, गर्दन में तनाव रखना या चेहरे की मांसपेशियों को कसना अभ्यास को असहज बना सकता है। रीढ़ को आरामदायक और स्थिर स्थिति में रखें, लेकिन शरीर को जबरदस्ती सीधा रखने की कोशिश न करें।

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शीतकारी प्राणायाम - फोटो : इंस्टाग्राम

मुंह से सांस लेना, जब तकनीक इसकी मांग न करे

कई सामान्य श्वसन अभ्यासों में नाक से सांस लेने पर जोर दिया जाता है, लेकिन अलग-अलग प्राणायाम तकनीकों के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए हर प्राणायाम में एक ही तरह से सांस लेने की कोशिश न करें। जिस तकनीक का अभ्यास कर रहे हैं, उसकी सही विधि समझना जरूरी है। अगर आप नए हैं, तो किसी योग्य योग प्रशिक्षक से तकनीक सीखना उपयोगी हो सकता है।

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Common Yoga Mistakes - फोटो : AI

श्वास अभ्यास और खाली पेट 

कई योग परंपराओं में प्राणायाम को खाली पेट करने की सलाह दी जाती है। लेकिन हर व्यक्ति की दिनचर्या और शारीरिक स्थिति अलग होती है। भोजन के तुरंत बाद कठिन श्वसन अभ्यास करने से असहजता हो सकती है। इसलिए अपने अभ्यास का समय ऐसा रखें जिसमें शरीर सहज महसूस करे। अगर किसी विशेष योग पद्धति में भोजन और अभ्यास के बीच खास अंतर बताया गया है, तो उसके निर्देशों का पालन करें।

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कठिन प्राणायाम - फोटो : AI

शुरुआत में ही कठिन प्राणायाम करना

सोशल मीडिया पर कठिन श्वसन तकनीकों के वीडियो देखकर उन्हें तुरंत कॉपी करना सही तरीका नहीं है। प्राणायाम की कई तकनीकों में सांस की गति, रोकने का समय और शरीर की स्थिति का विशेष महत्व होता है। इसलिए शुरुआत आसान और नियंत्रित अभ्यासों से करें। पहले सांस की जागरूकता और सहज श्वसन पर ध्यान दें, फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ें।


शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना

प्राणायाम के दौरान हल्की जागरूकता और शांति महसूस हो सकती है, लेकिन अगर आपको चक्कर, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक घबराहट या कमजोरी महसूस हो तो अभ्यास जारी न रखें।सिर्फ इसलिए अभ्यास को पूरा करने की कोशिश न करें क्योंकि आपने कोई निश्चित समय या संख्या तय की है। शरीर का संकेत सबसे महत्वपूर्ण है।

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प्राणायाम का सही तरीका - फोटो : AI

सही तरीके से प्राणायाम करने के लिए 7 आसान बातें

  • शांत और आरामदायक जगह चुनें।
  • शुरुआत कुछ मिनट के सहज श्वसन से करें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करें।
  • सांस को जबरदस्ती नियंत्रित न करें।
  • लंबे समय तक सांस रोकने की कोशिश न करें।
  • कठिन तकनीक बिना सही मार्गदर्शन के न करें।
  • असहजता होने पर अभ्यास रोक दें।


सुबह प्राणायाम करने का आसान तरीका

अगर आप शुरुआत कर रहे हैं तो सबसे पहले कुछ मिनट आराम से बैठकर अपनी सामान्य सांस पर ध्यान दें। सांस अंदर आने और बाहर जाने की प्रक्रिया को महसूस करें। इसके बाद किसी आसान और सही तरीके से सीखी हुई श्वसन तकनीक का थोड़े समय के लिए अभ्यास करें। शुरुआत में लंबा सेशन करने की जरूरत नहीं है। नियमितता और सही तकनीक पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।


किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

जिन लोगों को सांस से जुड़ी बीमारी, हृदय संबंधी समस्या, बार-बार चक्कर आने की समस्या या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है, उन्हें प्राणायाम की तकनीक और उसकी तीव्रता अपने डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ से चर्चा करके तय करनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान भी सभी प्राणायाम एक जैसे उपयुक्त नहीं होते। इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के कठिन सांस रोकने वाले अभ्यास न करें।

नोट: प्राणायाम स्वास्थ्य देखभाल का विकल्प नहीं है। किसी बीमारी के इलाज या दवा को डॉक्टर की सलाह के बिना बदलें या बंद न करें।

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