अनुलोम विलोम प्राणायाम
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सबसे पहले प्राणायाम
सबसे पहले प्राणायाम की बात करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि जितनी ज्यादा ऑक्सीजन शरीर के अंदर जाएगी या कहे कि शरीर में ऑक्सीजन का लेवल जितना अच्छा रहेगा, त्वचा उतनी ही हेल्दी रहेगी। असल में, शरीर में ऑक्सीजन का सही संतुलन ब्लड सर्कुलेशन को ठीक बनाए रखता है और सही ब्लड सर्कुलेशन त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए दिनचर्या में गहरे श्वास वाले प्राणायाम को अवश्य शामिल करें।
प्राणायाम के लिए शुद्ध स्वच्छ स्थान पर बैठें। इसके लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इसलिए शांत जगह पर बैठकर कमर-गर्दन को सीधा रखें और धीरे-धीरे श्वास पर ध्यान देते हुए गहराई से भरें और गहराई से ही छोड़ दें। इस क्रिया को 10 से 15 बार दोहराएं।
अनुलोम-विलोम एक ऐसा प्राणायाम है, जिसको कोई भी सामान्य व्यक्ति आसानी से कर सकता है। इसके लिए कमर और गर्दन को सीधा रखते हुए बैठें। प्राणायाम किसी भी एक नासिका से शुरू किया जा सकता है, मगर सही तरह से करने के लिए सर्वप्रथम दाहिनी नासिका को बंद करें और बाईं नासिका से सांस भरें। फिर उंगलियों से बाईं नासिका को बंद करें और दाहिनी नासिका को खोलकर सांस छोड़ दें। जिस तरफ से आप सांस को छोड़ती हैं, उसी तरफ से फिर से भरें और दूसरी तरफ से उंगलियों को हटाते हुए सांस को छोड़ें। इस क्रिया को 15 से 50 बार तक किया जा सकता है, परंतु ध्यान रखें कि जितनी क्षमता है, उतना ही करें और धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाती जाएं। यह स्वास्थ्य को बेहतर करेगा, ऑक्सीजन लेवल को मेंटेन करेगा और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेगा, जिसका सीधा असर त्वचा पर दिखाई देगा।