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Yoga Tips: मधुमेह में तंत्रिकाओं से संबंधित विकारों का खतरा अधिक, इन योगासनों की मदद से पा सकते हैं लाभ

Sat, 12 Nov 2022 12:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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योग के अभ्यास से लाभ - फोटो : Pixabay
डायबिटीज की स्थिति शरीर में कई प्रकार की समस्याओं का कारण बन सकती है। ब्लड शुगर का स्तर लगातार बढ़ा हुआ रहना कई अंगों को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकता है। यही कारण है कि मधुमेह वाले लोगों को समय के साथ कम दिखाई देने, पाचन और किडनी की समस्याएं होने लगती हैं। डायबिटीज की गंभीर स्थितियों में तंत्रिकाओं को भी क्षति होने का खतरा रहता है, इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी के रूप में  जाना जाता है। यह समस्या पैरों में दर्द और उनके अक्सर सुन्न हो जाने जैसे लक्षणों के साथ पाचन-पेशाब संबंधी और दिल की धड़कन को नियंत्रित रखने से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते डायबिटीज के खतरे, जटिलताओं और इससे बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। डॉक्टर्स कहते हैं, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाले उपायों को करके इस तरह की जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।

योग को दिनचर्या में शामिल करना इसमें अच्छा विकल्प माना जाता है। योगासन तंत्रिकाओं को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकते हैं। आइए जानते हैं किन योगासनों की मदद से डायबिटिक न्यूरोपैथी के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है?
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योगासन से मस्तिष्क और तंत्रिकाओं को लाभ - फोटो : Pixabay
प्राणायाम आसनों से मिलता है लाभ

दिनचर्या में प्राणायाम जैसे कपालभाति, अनुलोम विलोम, भस्त्रिका, भ्रामरी, उज्जयी आदि के अभ्यास को शामिल करके संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ पाया जा सकता है। ये अभ्यास नसों को मजबूती देने के साथ रक्त के परिसंचरण को बेहतर बनाए रखने में आपके लिए मददगार हो सकते हैं। प्राणायाम को मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार के स्वास्थ्य लाभ के लिए जाना जाता है। यह न सिर्फ डायबिटिक न्यूरोपैथी के जोखिमों को कम करने में सहायक है, साथ ही मधुमेह को कंट्रोल में रखने में भी इससे लाभ पाया जा सकता है।
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बालासन योग के अभ्यास से फायदे - फोटो : istock
बालासन योग का करें अभ्यास

बालासन जिसे चाइल्ड पोज के रूप में भी जाना जाता है, इसके अभ्यास की आदत शारीरिक समस्याओं को दूर करने में काफी फायदेमंद हो सकती है। बालासन योग तंत्रिकाओं को स्वस्थ रखने और इससे संबंधित जटिलताओं से बचाने में फायदेमंद हो सकती है। पीठ, गर्दन और कंधों के तनाव को दूर करने में भी इस योग के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। यह आसन मानसिक स्वास्थ्य लाभ में भी मददगार है।
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विपरीत करणी योग का अभ्यास - फोटो : Istock
विपरीतकरणी योग के फायदे

विपरीतकरणी योग का अभ्यास संपूर्ण शरीर, विशेषरूप से मस्तिष्क में रक्त के संचार को ठीक रखने में आपके लिए बहुत मददगार है। इससे तंत्रिताओं को भी स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है। पीठ के निचले हिस्से और पैरों में दर्द-झुनझुनी जैसी दिक्कतों को कम करने में भी इस योग से लाभ पाया जा सकता है। तंत्रिकाओं को स्वस्थ रखने से कई और प्रकार के गंभीर रोगों के विकसित होने के जोखिमों को कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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