अगर आप पूरी नींद नहीं लेते हैं तो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। समय रहते ध्यान नहीं दिया तो बात हाथ से निकल सकती है।
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sleeping
देहरादून के डॉक्टर विनीत काला ने बताया कि नींद पूरी न होने का सीधा असर हमारे व्यवहार और स्वास्थ्य पर पड़ता है। हम लगातार चिड़चिड़े होने लगते हैं और लगातार गुस्सा आने लगता है। जरूरत से कम सोना या ज्यादा सोना दोनों दिल के लिए नुकसानदेह हैं। नींद पूरी ना होने पर ब्लड प्रेशन बढ़ जाता है।
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mind
नींद पूरी न होने पर शरीर में थकान पैदा करने वाले रसायन बढ़ जाता है। नींद पूरी नहीं होती तो शरीर और दिमाग को आराम नहीं मिलता, जिस कारण पूरे दिन थकान का अनुभव होता है। नींद की कमी होने पर तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचता है। वहीं दिन की अपेक्षा रात की अच्छी नींद मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए बहुत जरूरी है। मस्तिष्क के मलबे में एमाईलॉएड बीटा नामक प्रोटीन होता है जो अगर दिमाग में जमा होता रहे तो भविष्य में यह अल्जाइमर या और कई दिमागी बीमारियों का कारण बन सकता है। सोने से मस्तिष्क में पाए जाने वाले इस कोशिकीय कचरे की सफाई होती है।
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सिर दर्द
डॉक्टर विनीत काला ने बताया जो लोग 7 घंटे से कम सोते हैं या फिर रात को जागकर दिन में सोते हैं, उन्हें कई तरह की प्रॉब्लम हो सकती हैं। ऐसे लोगों को आंखों में दर्द, सिर-दर्द, थकान, भूख न लगना, कमर दर्द, काम में मन न लगना, सिर भारी रहना व नींद आना व पेट खराब रहना आदि समस्याएं हो सकती हैं।
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fat man
- फोटो : getty images
जो लोग सुबह जल्दी उठते हैं वे समय से नाश्ता करते, जिस कारण उनका वजन संतुलित रहता है। वहीं जो लोग रात को देर से सोते और सुबह आठ बजे के बाद उठते हैं वे प्रतिदिन डाइट में औसतन 677 कैलोरी बढ़ाते हैं। यही नहीं, कम नींद लेने वाले व देर से सोने वाले लोगों में लेप्टिन नाम के हार्मोन का स्तर कम हो जाता है और शरीर कार्बोहाइड्रेट और शुगर की खपत 35 से 40 प्रतिशत तक अधिक करता है। नींद पूरी ना होने से मोटापा बढ़ता है।
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tension
कारपोरेट वर्ल्ड में काम के घंटे बढ़ गए हैं जिससे चलते युवा स्लीपिंग डिसऑर्डर का तेजी से शिकार हो रहे हैं। यही वजह है कि युवाओं के बीच हिंसा और आक्रोश बढ़ रहा है। इस कारण युवाओं की सोचने की क्षमता कम हो रही है और एल्कोहल, स्मोकिंग, हुक्का जैसे एडिक्शन व रोड रेज बढ़ते जा रहे हैं।
जो लोग देर से सोते हैं और जल्दी उठ जाते हैं उनकी याददाश्त कमजोर होती है। नींद के समय दिमाग खुद को रीसेट करता है, नींद पूरी न होने पर दिमाग की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जो लोग देर से सोते हैं उनमें गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) अपेक्षाकृत कम होता है जिस वजह से सोते समय उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है और वो ज्यादा खर्राटे लेते हैं।