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Yoga Tips: थायराइड को करना है जड़ से खत्म तो नियमित करें इन योगासनों का अभ्यास

Fri, 31 Jan 2025 09:57 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर के लिए पर्याप्त  हार्मोन पैदा नहीं कर पाती तो इसे हाइपो-थायराइडिज्म कहते हैं। वहीं जब हाइपर-थायराइडिज्म में थायराइड ग्रंथि हार्मोन का उत्पादन अधिक करने लगती है।
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थायराइड की समस्या के लिए योग - फोटो : istock
Yoga For Thyroid: थायराइड गले में पाई जाने वाली तितली की आकार की एक ग्रंथि होती है जो कि हार्मोन का उत्पादन करती है। यह हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर और संपूर्ण विकास को नियंत्रित करता है। जब थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर के लिए पर्याप्त  हार्मोन पैदा नहीं कर पाती तो इसे हाइपो-थायराइडिज्म कहते हैं। वहीं जब हाइपर-थायराइडिज्म में थायराइड ग्रंथि हार्मोन का उत्पादन अधिक करने लगती है।

थायराइड के लक्षण

थायराइड की शिकायत होने पर वजन बढ़ना या घटता है। थकान और सुस्ती महसूस होती है। त्वचा और बालों में रूखापन,अवसाद और चिड़चिड़ापन, ठंड अधिक लगना, याददाश्त कमजोर होना,अधिक पसीना आना, घबराहट और बेचैनी, हृदय गति तेज होना, अनिद्रा और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है। योग के नियमित अभ्यास से थायराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। यहां थायराइड से आराम पाने के लिए कुछ योगासनों के विकल्प दिए जा रहे हैं।
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सर्वांगासन - फोटो : amar ujala
सर्वांगासन

यह थायराइड ग्रंथि को सक्रिय करता है और हार्मोन बैलेंस करता है। इस आसन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाएं और कमर को हाथों से सहारा दें। इस आसन के अभ्यास से आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और तनाव कम होता है। साथ ही आंखों के कार्यात्मक विकार ठीक होते हैं और दृष्टि बढ़ती है।
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हलासन - फोटो : Freepik
हलासन

यह योगासन थायराइड ग्रंथि की कार्यक्षमता बढ़ाता है। हलासन से वजन कम करने में मदद मिलती है। पाचन में फायदेमंद है। मधुमेह के प्रबंधन में मदद करता है और थायराइड के मरीजों के लिए भी असरदार है। ये रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और त्वचा व बालों के लिए फायदेमंद होता है। हलासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाएं और सिर के पीछे ज़मीन पर टिकाएं।

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मत्स्यासन - फोटो : https://www.instagram.com/malaikaaroraofficial/
मत्स्यासन

यह थायराइड को नियंत्रित कर ब्लड सर्कुलेशन सुधारता है। इसके अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटें। फिर छाती को ऊपर उठाएं और सिर को पीछे झुकाएं। मत्स्यासन से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत बेहतर होती है। ये आसन गर्दन, गले और कंधों के तनाव को दूर करता है और गर्दन व पेट के सामने के हिस्से को स्ट्रेच करके टोन करने में मदद करता है।
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उज्जायी प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala
उज्जायी प्राणायाम

यह थायराइड ग्रंथि को सक्रिय करने और गले में ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद करता है। इस श्वसन क्रिया के अभ्यास के लिए गले से हल्की घरघराहट की आवाज निकालते हुए धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें।

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नोट: किसी भी योग का अभ्यास स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सुझाव के बाद और योग गुरू की निगरानी में ही करें।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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