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Yoga For Cancer Patients: कैंसर के इलाज के दौरान योग कितना असरदार? जानिए फायदे, सावधानियां और सही आसन

Sat, 09 May 2026 10:01 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

cancer patients Yoga Benefits: क्या कैंसर मरीज योग कर सकते हैं?
हां, डॉक्टर और योग विशेषज्ञ की सलाह से कैंसर मरीज हल्के और सुरक्षित योगासन कर सकते हैं। प्राणायाम, ताड़ासन, शवासन और अनुलोम-विलोम जैसे योग तनाव कम करने, नींद सुधारने और शरीर को आराम देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि कठिन और ज्यादा दबाव वाले आसनों से बचना चाहिए।
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कैंसर में कौन से योग करें और किन आसनों से बचें - फोटो : ai

Cancer Ke liye Best Yoga: कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसका असर सिर्फ शरीर ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इलाज के दौरान मरीजों को थकान, तनाव, कमजोरी और नींद की समस्या जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में योग एक सहायक उपाय के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि सही तरीके से किया गया योग कैंसर मरीजों को शारीरिक और मानसिक रूप से राहत देने में मदद कर सकता है।

हालांकि यह समझना बेहद जरूरी है कि कैंसर के दौरान हर योगासन सुरक्षित नहीं होता। कई बार कठिन या गलत तरीके से किए गए आसन शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं, जिससे परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए योग शुरू करने से पहले डॉक्टर और प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

योग का मुख्य उद्देश्य शरीर को आराम देना, तनाव कम करना और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाना होता है। खासतौर पर हल्के योगासन और प्राणायाम मरीजों को बेहतर महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं कैंसर मरीजों के लिए कौन से योगासन फायदेमंद हो सकते हैं और किन आसनों से दूरी बनानी चाहिए।

क्या योग कैंसर का इलाज है?

ध्यान रखें योग कैंसर का इलाज नहीं है, लेकिन यह मरीजों को बेहतर महसूस कराने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है। सही खानपान, मेडिकल ट्रीटमेंट और सकारात्मक जीवनशैली के साथ योग सहायक भूमिका निभा सकता है।

 

 

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अनुलोम विलोम प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala

कैंसर मरीजों के लिए कितना असरदार है योग?

तनाव और चिंता कम करने में मददगार

कैंसर का इलाज कई बार मानसिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में योग और मेडिटेशन तनाव, चिंता और डर को कम करने में मदद कर सकते हैं। अनुलोम-विलोम और गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम मन को शांत रखने में असरदार माने जाते हैं। नियमित योग करने से मरीजों की नींद की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है।

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वृक्षासन - फोटो : istock

ये हल्के योगासन हो सकते हैं फायदेमंद

कैंसर मरीजों के लिए ताड़ासन, शवासन, वृक्षासन और बालासन जैसे हल्के योगासन सुरक्षित माने जाते हैं। ये आसन शरीर को रिलैक्स करने और थकान कम करने में मदद करते हैं। साथ ही शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी और संतुलन बनाए रखने में भी सहायक हो सकते हैं।

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भ्रामरी प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala

प्राणायाम से मिल सकता है फायदा

अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और गहरी सांस लेने वाले अभ्यास शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। इससे मरीज खुद को ज्यादा शांत और ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं। हालांकि प्राणायाम करते समय ज्यादा जोर लगाने से बचना चाहिए।

 

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शीर्षासन - फोटो : freepik.com

इन योगासनों से करें परहेज

कैंसर मरीजों को कठिन और ज्यादा दबाव वाले योगासन नहीं करने चाहिए। जैसे शीर्षासन, चक्रासन, भारी बैकबेंड या लंबे समय तक संतुलन वाले आसन कई मरीजों के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं। सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन के दौरान शरीर कमजोर रहता है, इसलिए भारी एक्सरसाइज से बचना जरूरी है।

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कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos

योग शुरू करने से पहले रखें ये सावधानियां

योग हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए। अगर मरीज को ज्यादा कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत या दर्द हो रहा हो तो तुरंत योग रोक देना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई नया आसन शुरू नहीं करना चाहिए। धीरे-धीरे और हल्के अभ्यास से शुरुआत करना बेहतर माना जाता है।

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नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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