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Vrikshasana: वृक्षासन के अभ्यास का सही तरीका, जानें इससे होने वाले फायदे

Tue, 02 Jul 2024 09:22 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आइए जानते हैं वृक्षासन के अभ्यास के क्या फायदे हैं, वृक्षासन करने का सही तरीका क्या है और इसके अभ्यास के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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वृक्षासन योग - फोटो : istock
Benefits of Vrikshasana : योग का अभ्यास शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से आपके लिए फायदेमंद है। हालांकि योग के अभ्यास के दौरान गलत आसन, पोस्चर या श्वास लेने के गलत तरीके से स्वास्थ्य को नुकसान भी हो सकता है। ऐसे में कुछ ऐसे बेसिक पोज हैं, जिसमें अधिक ट्विस्ट और टर्न शामिल नहीं हैं और आसानी से किए जा सकते हैं।
अगर आप योगाभ्यास शुरू करने जा रहे हैं तो आसान योगासन का अभ्यास करें।

सामान्य और आसान योग में वृक्षासन का नाम शामिल है, जिसे अंग्रेजी में ट्री पोज कहते हैं। नाम से ही स्पष्ट है वृक्षासन में शरीर वृक्ष के मुद्रा में होता है और उसमें संतुलन बनाना होता है। आइए जानते हैं वृक्षासन के अभ्यास के क्या फायदे हैं, वृक्षासन करने का सही तरीका क्या है और इसके अभ्यास के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
वृक्षासन के फायदे
 
  • वृक्षासन संतुलन बनाने वाला आसन है, जिससे शारीरिक और भावनात्मक दोनों संतुलन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
  • वृक्षासन पैरों, टखनों, पिंडलियों, घुटनों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
  • इस आसन से एकाग्रता में सुधार होता है।
  • साइटिका की समस्या में इस योग के अभ्यास से राहत मिल सकती है।
  • वृक्षासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है।
  • घुटने मजबूत बनाता है और हिप्स के जोड़ ढीले रखने में मदद करता है
  • आंखों, कान और कंधों की मजबूती के लिए यह आसान असरदार है
  • इस आसन से छाती की चौड़ाई बढ़ाने में मदद मिलती है।
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tree pose - फोटो : file photo
वृक्षासन के अभ्यास का सही तरीका

स्टेप 1- वृक्षासन के अभ्यास के लिए सीधे खड़े हो जाएं।

स्टेप 2- अब दाहिने घुटने को मोड़कर दाएं पैर को बाईं जांघ पर रखें।

स्टेप 3- बाएं पैर को सीधा रखते हुए शरीर का संतुलन बनाएं।

स्टेप 4- हाथों को सिर के ऊपर उठाएं और हथेलियों को एक साथ मिलाकर नमस्ते मुद्रा में लाएं।

स्टेप 5- कुछ समय इसी अवस्था में रहें और फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में वापस आ जाएं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अभ्यास के दौरान सावधानियां
 
  • वैसे तो वृक्षासन का अभ्यास हर तरह से सुरक्षित है और हर कोई इसे कर सकता है। लेकिन उच्च रक्तचाप की शिकायत होने पर डॉक्टरी सलाह या किसी विशेषज्ञ के सामने ही अभ्यास करें।
  • उच्च रक्तचाप वाले लोग वृक्षासन के अभ्यास के दौरान हाथों को छाती के पास रखते हुए नमस्ते की मुद्रा में आए, हाथ सिर के ऊपर न उठाएं।
  • वर्टिगो या माइग्रेन की शिकायत है तो इस आसन के अभ्यास से बचें।
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yoga - फोटो : istock
अभ्यास का सही समय
 
  • वृक्षासन का अभ्यास सुबह के वक्त ही किया जाना चाहिए। हालांकि समय न मिल पाने के कारण अगर आप शाम को वृक्षासन कर रहे हैं तो भोजन से कम से कम 4 से 6 घंटे पहले ही आसन कर लें।
  • ध्यान रखें कि आसन से पहले शौच कर लिया हो और पेट एकदम खाली हो।

वृक्षासन से पहले और बाद में कौन से आसन करें

वृक्षासन के अभ्यास से पहले त्रिकोणासन, वीरभद्रासन 2 और बद्ध कोणासन किया जाना चाहिए। साथ ही वृक्षासन के अभ्यास के बाद खड़े होकर किए जाने वाले योगासन ही करें।

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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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