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Yoga For Sleep: रात में नहीं आती है नींद तो करें ये योगासन, वरना स्वास्थ्य को हो सकते हैं कई नुकसान

Fri, 13 Sep 2024 12:36 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कुछ योगासनों को दिनचर्या में शामिल करें। योगासनों से बेहतर नींद आ सकती है। यहां आपको नींद पूरी न होने के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और नीद की शिकायत के इलाज के लिए योगासनों के बारे में बताया जा रहा है।
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नींद की समस्या में सुधार के लिए योग - फोटो : istock
Bedtime Yoga For Sleep : नींद न आना, जिसे *अनिद्रा* (Insomnia) कहते हैं, आजकल एक सामान्य समस्या बनती जा रही है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जो शारीरिक, मानसिक या जीवनशैली से संबंधित होते हैं। मानसिक तनाव, अत्यधिक चिंता और तनावपूर्ण जीवनशैली नींद में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। यह मस्तिष्क को शांत नहीं होने देता, जिससे गहरी नींद नहीं आ पाती।

इसके अलावा अनियमित दिनचर्या जैसे सोने और जागने का समय बदलना, रात में देर तक जागना, या बहुत अधिक स्क्रीन टाइम, नींद को प्रभावित करते हैं। रात के समय भारी भोजन करना, अधिक कैफीन या अल्कोहल का सेवन भी नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे  मधुमेह, थायराइड, हृदय रोग,स्लीप एपनिया जिसमें सांस रुकने की समस्या होती है, या श्वसन संबंधी समस्याएं भी नींद में बाधा बन सकती हैं।

नींद पूरी न होने से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जो गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं। ऐसे में नींद की शिकायत होने पर इसके कारणों का पता लगाकर उनमें सुधार लाएं। इसके अलावा कुछ योगासनों को दिनचर्या में शामिल करें। योगासनों से बेहतर नींद आ सकती है। यहां आपको नींद पूरी न होने के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और नीद की शिकायत के इलाज के लिए योगासनों के बारे में बताया जा रहा है।
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नींद न पूरी होने पर स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : istock
नींद पूरी न होने पर स्वास्थ्य समस्याएं

नींद पूरी न होना लंबे समय तक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके कारण मानसिक स्वास्थ्य पर असर होता है, इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है। साथ ही हृदय स्वास्थ्य और मोटापे की शिकायत हो सकती है।

तनाव और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

नींद की कमी से तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है, और एकाग्रता में कमी आती है।
   
इम्यूनिटी कमजोर होना

पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
   
हृदय रोग और उच्च रक्तचाप

लंबे समय तक नींद की कमी हृदय रोग और उच्च रक्तचाप का कारण बन सकती है। यह हृदय के सामान्य कार्यों को बाधित करती है।
   
मधुमेह और मोटापा

 नींद की कमी से इंसुलिन के स्तर में असंतुलन पैदा हो सकता है, जिससे मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही, यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिससे मोटापा बढ़ सकता है।
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balasana - फोटो : pexel
बेहतर नींद के लिए योगासन

योग एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है, जिससे नींद की गुणवत्ता को सुधारने में मदद मिल सकती है। कुछ योगासन जो नींद को बढ़ावा देते हैं,

बालासन (Child Pose)

बालासन का अभ्यास शरीर को शांत करने और तनाव को कम करने में सहायक है। यह मस्तिष्क को आराम देता है और बेहतर नींद लाने में मदद करता है। इस आसन को करने के लिए वज्रासन में बैठकर आगे की ओर झुकें, अपने माथे को जमीन पर रखें। हाथों को आगे की ओर फैलाएं और कुछ मिनटों तक इस स्थिति में रहें।

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शवासन - फोटो : Istock
शवासन (Corpse Pose)

शवासन शरीर और मस्तिष्क को पूरी तरह से आराम देने में सहायक है। यह योगासन नींद के लिए एक आदर्श आसन माना जाता है। इस आसन के अभ्यास के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेटे। अब हाथों को शरीर के किनारों पर रखें और पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। गहरी सांस लें और खुद को पूरी तरह से आराम दें।
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भ्रामरी प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala
भ्रामरी प्राणायाम (Bee Breathing)

भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क को शांत करने और तनाव कम करने में मदद करता है। यह अनिद्रा के लिए एक प्रभावी तरीका है। इस आसन के अभ्यास के लिए आरामदायक स्थिति में बैठकर गहरी सांस लें और छोड़ें। सांस पर ध्यान केंद्रित करते हुएमधुमक्खी की ध्वनि करें। इसे 5-10 मिनट तक दोहराएं।

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नोट: यह लेख योग गुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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