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बदलते मौसम में खुद को बदलें, सर्दी में जरूर बरतें ये 6 सावधानियां

Tue, 21 Nov 2017 09:02 AM IST
अंशुमाला
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सर्दी का मौसम है। यह वक्त है सर्दी को समझने का। सर्दी से दोस्ती करने का। यह दोस्ती सेहत के लिए जरूरी है। कोई छींक रहा है, तो कोई खांस कर परेशान है। किसी का टॉन्सिल दर्द कर रहा है, तो कोई गले की खराश से जूझ रहा है। सर्दियों में होने वाली ये तमाम समस्याएं बहुत सामान्य हैं। इन छोटी-मोटी समस्याओं का इलाज तो आप घर पर भी कर सकते हैं, लेकिन ठंड का मौसम अपने साथ कुछ अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी लाता है और उनके बढ़ने का कारण भी बनता है। अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, इन्फ्लूएंजा, हृदय संबंधी रोग आदि कुछ ऐसी ही समस्याएं हैं, जो लोगों को परेशान कर सकती हैं। 

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अस्थमा है, तो कम निकलें बाहर

आजकल स्मॉग से लोग परेशान हैं। जिन्हें अस्‍थमा है, वे स्मॉग से तो रोज जूझ ही रहें हैं, अब बढ़ती सर्दी भी इन्हें सताएगी। अस्थमा एक एलर्जिक समस्‍या है। सर्दी में अस्थमा के रोगियों की तकलीफ बढ़ जाती है। सर्दियों में कोहरा बढ़ने से एलर्जी के तत्‍व कोहरे के कारण हवा में उड़ते नहीं हैं, बल्कि आसपास ही रहते हैं। इन तत्वों से अस्थमा ग्रस्त मरीजों को तकलीफ होने लगती है। कई बार सांस लेने में भी दिक्कत होती है। ऐसे में अधिक देर तक ठंड में घर से बाहर न रहें। बाहर जाते समय गला, नाक, कान और सिर को ढक कर रखें। दवाइयों का सेवन नियमित रूप से करें।
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सताएगा जोड़ों का दर्द

ठंड में अधिकतर लोगों को हड्डियों में दर्द की समस्या शुरू हो जाती है। जो लोग पहले से ही जोड़ों के दर्द से ग्रस्त हैं, उनमें समस्या अधिक देखने को मिलती है। ऐसा सर्दियों के दिनों में शरीर में स्टिफनेस बढ़ने के कारण भी होता है। यदि आपको गठिया है, तो यह मौसम तकलीफों भरा हो सकता है, खासकर तब, जब आप अपने ऊपर विशेष ध्यान न दें। सर्दी के दिनों में जोड़ों में सूजन आने की समस्या बढ़ जाती है। नसों में सिकुड़न आती है। ऐसे में जोड़ों का दर्द या हड्डियों से जुड़ी कोई अन्य समस्या से बचे रहने के लिए व्यायाम करें। खुद को जितना हो सके गर्म रखें।

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रूखी-सूखी त्वचा

​जिनकी त्वचा रूखी है, उनमें स्किन शुष्क होने की समस्या अधिक बढ़ने लगती है। इन दिनों वातावरण में नमी की मात्रा कम होने से ऐसा होता है। अच्छी क्वालिटी का मॉइस्चराइजर लगाएं। नारियल का तेल भी बेहतर विकल्प है। नहाने के बाद पूरे शरीर में तेल या लोशन लगाएं।
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उच्च रक्तचाप में रहें सतर्क

सर्द हवाओं से बचना चाहते हैं, तो उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारी से पीड़ित लोग सतर्क रहें। डॉक्टर्स के अनुसार, जिन्हें उच्च रक्तचाप की शिकायत है, उन्हें अधिक जागरूक रहने की आवश्यकता है। दरअसल, ठंड में पसीना नहीं आने से शरीर में नमक का स्तर बढ़ जाता है। इसी वजह से रक्त चाप भी बढ़ने लगता है। इन दिनों ब्लड प्रेशर सामान्य रहे, इसके लिए दवाओं का सेवन नियमित रूप से करें। प्रतिदिन एक्सरसाइज करें। पौष्टिक डाइट लें। खाने में नमक का इस्तेमाल सोच-समझकर करें।
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बदलते मौसम का दिमाग पर असर

मौसम बदलने का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। कुछ लोगों का मानसिक संतुलन तक बिगड़ जाता है और वे अवसादग्रस्त हो जाते हैं। चूंकि सर्दियों में दिन छोटे होते हैं, जिससे हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है। शरीर में विटामिन डी की कमी आती है। इससे हृदय के साथ-साथ दिमाग पर भी प्रभाव पड़ता है। सर्दियों में डिप्रेशन से बचने के लिए सूर्य की रोशनी में कुछ देर बैठें। पर्याप्त नींद लें।

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कम न होने दें तापमान

सर्दी के मौसम में शरीर का तापमान जब 35 डिग्री से नीचे चला जाए, तो उसे ‘हाइपोथर्मिया’ कहते हैं। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं, सांस लेने में तकलीफ होती है। हार्ट बीट बढ़ जाती है, बीपी कम हो जाता है। अगर शरीर का तापमान कम हो जाए, तो मृत्यु भी हो सकती है। ऐसे में सुबह के समय सर्द हवाओं में न जाएं। गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
 
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

‌फिजिशियन डॉ. जुगल किशोर कहते हैं कि सर्दी-जुकाम, बुखार के अलावा सर्दी के मौसम में अस्थमा, उच्च रक्त चाप, सीओपीडी (फेफड़े से संबंधित समस्या), कार्डियैक प्रॉब्लम, सुबह के समय हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा, हृदय रोग है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इन दिनों वातावरण में प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में अस्थमा के मरीज सुबह में टहलने बिल्कुल न जाएं। अच्छी तरह से गर्म कपड़े पहनें। दवाइयों का डोज खुद से न बढ़ाएं। दिल के मरीज भी डॉक्टर से सलाह लेते रहें।  
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