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अस्थमा की बीमारी से बनी रहे दूरी, इन 3 योगासन का करें अभ्यास

Fri, 17 Apr 2020 08:25 AM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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योगा - फोटो : फाइल फोटो
अस्थमा सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी के दौरान गला व छाती काफी प्रभावित हो जाता है। अस्थमा की समस्या हो जाने पर फेफड़ों को सही मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल पाता है और सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को कई तरह की सावधानियां बरतनी होती है। हालांकि कुछ योगासन के अभ्यास इस बीमारी में आराम पहुंचा सकते हैं। आइए जानते हैं अस्थमा में कौन से योगासन का अभ्यास करना चाहिए...
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प्रतीकात्ममक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अर्ध मत्येंद्र आसन
इस आसन को करने के लिए पहले आप अपने दोनों पैरों को सीधे फैला लें। इसके बाद बाएं पैर को मोड़कर एड़ी के सहारे बैठें। अब अपने दाहिने पैर के घुटने को मोड़कर खड़ा कर दें और बाएं पैर की जांघ से ऊपर ले जाते हुए जांघ के पीछे जमीन पर रख दें। इसके बाद अपने बाएं हाथ को दाहिने पैर के घुटने से पार करके दाहिने पैर का अंगूठा पकड़ें। अब अपने दाहिना हाथ को पीठ के पीछे से घुमाएं। अपने सिर को  दाहिनी ओर इतना घुमाएं कि आपकी ठोड़ी और बायां कंधा एक सीधी रेखा में आ जाए। नीचे की ओर झुकें नहीं। छाती बिल्कुल तनी हुई रखें।
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प्रतीकात्ममक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पवन मुक्तासन
इस आसन के करने से शरीर की दूषित हवा बाहर निकल जाती है। इसी कारण इस आसन को पवन मुक्तासन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए शवासन की मुद्रा में लेटकर अपने दोनों पैरों को एक-दूसरे से मिला लें। अब अपने हाथों को कमर पर रखें। अपने पंजों को जमीन पर रखते हुए पैरों को घुटनों के पास से मोड़ें। अब धीरे-धीरे दोनों घुटनों को छाती पर रखें। इसके बाद अपने हाथों की कैंची बनाते हुए घुटनों को पकड़ें। अब अपने सांस को बाहर निकालते हुए सिर को जमीन से ऊपर उठाते  हुए अपनी ठोड़ी को घुटनों से मिलाएं। अब हाथों की कैंची बनी हथेलियों से घुटनों को  छाती की ओर सुविधानुसार दबाएं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
शवासन
इस आसन के नाम से ही स्पष्ट है कि मुर्दे के समान आसन। शवासन करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को ज्यादा से ज्यादा अंतर रखते हुए फैलाएं। इस दौरान आपके पैरों के पंजे बाहर की तरफ और एड़ियां अंदर की तरफ होनी चाहिए। अब आप दोनों हाथों को भी शरीर से लगभग एक फिट की दूरी पर रखें। अपनी हाथों की अंगुलियां आकाश की तरफ रखें और गर्दन को सीधा रखें। अब धीरे-धीरे अपनी आंखों को बंद कर लें और धीरे-धीरे सांस खींचें और छोड़ें। अपनी आंखों को बंद कर सांसों पर ध्यान दें। इस आसन को करते समय शरीर को पूरा ढीला छोड़ देते हैं।
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