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World Oceans Day 2020: इन वजहों से बढ़ रही है समुद्र में गंदगी, जलीय जीवों को हो सकता है नुकसान

Mon, 08 Jun 2020 09:24 AM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व महासागर दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
समुद्र के महत्व और उनकी वजह से आने वाली चुनौतियों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 8 जून को विश्व महासागर दिवस मनाया जाता है। इस खास दिवस का मुख्य उद्येश्य महासागर के सकारात्मक अैर नकारात्मक पहलुओं के प्रति जागरूकता फैलाना है। विश्व महासागर दिवस के खास मौके पर लोग समुद्र तट की सफाई और इससे जुड़े अन्य आयोजनों में भाग लेते हैं। इस खास दिवस पर समुद्री जीवन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों जैसे अपतटीय तेल ड्रिलिंग और प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए कई जगह मार्च भी निकाले जाते हैं। सुमद्र अधिकांश ऑक्सीजन, भोजन और हवा प्रदान करते हैं और हमारी जलवायु को स्थिर रखने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं समुद्र व्हेल मछली और अन्य जीवों जैसे अद्भुत जानवरों और पारिस्थितिक तंत्र के लिए घर भी हैं, जो पृथ्वी को रहने लायक शानदार जगह बनाते हैं। लेकिन मानवीय घटनाओं के वजह से समुद्री वातावरण को खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
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विश्व महासागर दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीब आठ मिलियन मीट्रिक टन प्लास्टिक दुनिया के महासागरों में जाता है। इस वजह से दिन पर दिन समुद्र में प्लास्टिक की वृद्धि हो रही है और समुद्र में प्रदूषण फैल रहा है। नॉर्थवेस्ट पैसेज और आर्कटिक के अन्य हिस्से भी समुद्री प्रदूषण से प्रभावित हैं।
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विश्व महासागर दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
समुद्र में तैरने वाले प्लास्टिक से हर साल एक मिलियन से ज्यादा जलीय जीवों और पक्षियों की मृत्यु हो जाती है। समुद्र में बढ़ते प्लास्टिक का जीवें पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने समुद्र के सबसे प्रचुर प्रकाश संश्लेषक जीवाणुओं को रसायनों से उजागर किया, जो प्लास्टिक की थैलियों से उत्पादित होते हैं। रसायनों के कारण बैक्टीरिया को बढ़ने और ऑक्सीजन का उत्पादन करने में कठिनाई होती है। यह काफी भयावह है। क्योंकि बैक्टीरिया 10 फीसदी ऑक्सीजन उत्पादित करते हैं, जिससे हम सांस लेते हैं।

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विश्व महासागर दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
ग्लोबल वार्मिंग से मछलियों को खतरा
महासागरों और उनमें मौजूद जीवों को जलवायु परिवर्तन से भी खतरा है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई कि समुद्र में बढ़ते तापमान के कारण पहले से ही मछलियों की आबादी कम हो रही है। रटगर्स विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली टीम ने पाया कि 80 वर्षों में मछलियों की आबादी में औसतन 4.1 फीसदी की गिरावट आई है। 1930 से 2010 के बीच 1.4 मिलियन मीट्रिक टन मछली खो चुकी हैं।
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विश्व महासागर दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
महासागरीय वार्मिंग से व्यक्तिगत प्रजातियों को नुकसान नहीं पहुंचाता है। लेकिन इससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र तबाह हो सकता है। एक अध्ययन में यह पाया गया कि प्रति वर्ष समुद्र की गर्म लहरें बढ़ती जा रही हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र में गर्म लहरें 50 फीसदी तक बढ़ गई हैं।
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