हमें पर्यावरण प्रदूषण की चिंता तो है लेकिन जिन चीजों से पर्यावरण प्रदूषित होता है वो चीजें हमारी सबसे ज्यादा प्रिय भी बनी हुई हैं। 21वीं सदी पर्यावरण के संरक्षण की नहीं बल्कि 'विनाश' की सदी है! इंसान खुद ही पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन है। पर्यावरण के संरक्षण के लिए बड़ी-बड़ी बहसों की जगह अगर हम अपनी छोटी-छोटी आदतों में बदलाव ले आएं तो हमारे जिस अस्तित्व पर पर्यावरण के दूषित होने से खतरा मंडरा रहा है वो अस्तित्व लंबे वक्त तक बचा रहेगा। अगर धरती को बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले प्लास्टिक को ना कह दें। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस है, आइए जानते हैं जाने-अनजाने हम खुद ही पर्यावरण के दुश्मन कैसे साबित हो रहे हैं...