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सही सीढ़ियां मतलब सफलता की ऊंचाई, इन बातों का रखेंगे ध्यान तो होगी उन्नति

Mon, 16 Mar 2020 08:01 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Stairs

घर की सही दिशा का जितना महत्व है, उतना ही घर की सीढ़ियों का सही दिशा में होना भी महत्वपूर्ण है। ये आपके घर की खुशियों के आने का रास्ता खोलती या बंद करती हैं। सीढ़ियां बनाते वक्त किसी भी इमारत या भवन में यदि वास्तुशास्त्र के नियमों का पालन करके सही वास्तुजोन में इनका निर्माण कराया जाए, तो उस घर में रहने वाले सदस्यों के लिए ये कामयाबी एवं सफलता की सीढ़ियां बन सकती हैं। इनसे निकलने वाली एनर्जी इतनी शक्तिशाली होती है कि यह सफलता के रास्ते को काफी हद तक प्रभावित करती है।

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vastu tips
वास्तु में सीढ़ियों का विशेष महत्व है, भवन के दक्षिण-पश्चिम यानी कि नैऋत्य कोण में पृथ्वी तत्व की प्रधानता होती है, अतः यहां सीढ़ियां बनाने से इस दिशा का भार बढ़ जाता है, जो वास्तु की दृष्टि में बहुत शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिशा में सीढ़ियों का निर्माण सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इससे धन-संपत्ति में वृद्धि एवं स्वास्थ्य अच्छा रहता है। दक्षिण में बनी सीढ़ियां निवासियों के लिए प्रसिद्धि और यश का कारण बनती हैं। 
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Vastu tips for Stairs
पश्चिम दिशा में सीढ़ी का निर्माण करवाने से लाभदायक परिणाम मिलते हैं। यदि जगह का अभाव है, तो आग्नेय कोण में भी निर्माण करवाया जा सकता है। घर का मध्य भाग यानी कि ब्रह्म स्थान अति संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। अतः भूलकर भी यहां सीढ़ियों का निर्माण न कराएं। ईशान कोण को तो वास्तु में हल्का और खुला रखने की बात कही गई है, अतः यहां सीढ़ियां बनवाना अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो सकता है। 

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vastu tips
वास्तुशास्त्र के नियम के अनुसार सीढ़ियों का निर्माण उत्तर से दक्षिण की ओर अथवा पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर करवाना चाहिए। शुभ फल की प्राप्ति के लिए सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए। जैसे- 5, 7, 9, 11, 15, 17 आदि। सीढ़ियों के शुरू और अंत में दरवाजा होना चाहिए। नीचे का दरवाजा ऊपर के दरवाजे के बराबर या थोड़ा बड़ा हो। वहीं एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी का अंतर 9 इंच होना चाहिए।
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Walking Stairs
इन बातों का रखें ध्यान
  • बिजली और अग्नि से संबंधित कोई भी सामान जैसे इंवर्टर, जनरेटर, वाटर कूलर, एसी मोटर, मिक्सी, मसाला या आटा पीसने की घरेलू चक्की आदि सीढ़ियों के नीचे रखना वास्तु दोष है।
  • सीढ़ियों के नीचे किचन, पूजा घर, शौचालय, स्टोर रूम नहीं होना चाहिए। जहां तक हो सके, गोलाकार सीढ़ियां नहीं बनवानी चाहिए। 
  • सीढ़ियों का निर्माण इस प्रकार हो कि चढ़ते समय व्यक्ति दाहिनी तरफ मुड़ता हुआ जाए यानी कि क्लॉकवाइज।
  • खुली सीढ़ियां वास्तुसम्मत नहीं होतीं, अतः इनके ऊपर शेड अवश्य होना चाहिए। टूटी-फूटी, असुविधाजनक सीढ़ियां अशांति तथा गृह क्लेश पैदा करती हैं।
  • सीढ़ियों के नीचे का स्थान खुला रहने देने से घर के बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
  • यदि सीढ़ियों में वास्तु दोष है और तोड़कर दोबारा बनाना संभव नहीं है तो वहां एक पिरामिड लगा दें। यह उपाय उत्पन्न दोषों को कम करने में मदद करता है।
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